‘पंजाब को भारत से नहीं, KP और बलूचिस्तान से खतरा’: पाकिस्तान में मरियम नवाज का विवादित बयान

पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति में एक बार फिर प्रांतीय टकराव और तीखी बयानबाजी का नया बवंडर खड़ा हो गया है। पाकिस्तान के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावशाली प्रांत पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ (Maryam Nawaz) ने एक ऐसा बयान दे डाला है जिसने पूरे देश के राजनीतिक और सुरक्षा गलियारों में खलबली मचा दी है। हमेशा भारत के खिलाफ बयानबाजी कर अपनी घरेलू राजनीति चमकाने वाले पाकिस्तानी हुक्मरानों के उलट मरियम नवाज ने सार्वजनिक रूप से दावा किया है कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत को पूर्वी सीमा यानी भारत से कोई खतरा नहीं है, बल्कि असली सुरक्षा संकट और खतरा देश के ही दो अशांत प्रांतों—खैबर पख्तूनख्वा (KPK) और बलूचिस्तान (Balochistan) से है। उनके इस अप्रत्याशित बयान के बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और बलूच व पश्तून राष्ट्रवादी नेताओं ने उन पर देश को तोड़ने और प्रांतों के बीच नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है।

कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठक में दिया चौंकाने वाला बयान

लाहौर में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और प्रांतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ कानून-व्यवस्था पर आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए मरियम नवाज ने यह टिप्पणी की। हाल के दिनों में पंजाब के सीमावर्ती जिलों—विशेषकर मियांवाली, डेरा गाजी खान और अटोक में हुए आतंकी हमलों और पुलिस चौकियों पर घात लगाकर किए गए हमलों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की सुरक्षा प्राथमिकताओं को दोबारा तय करने की जरूरत है।

मरियम नवाज ने सख्त लहजे में कहा—”पंजाब के लोगों को यह गलतफहमी छोड़ देनी चाहिए कि हमारा मुख्य दुश्मन या खतरा सीमा पार भारत से आ रहा है। भारत की तरफ से हमारी अंतरराष्ट्रीय सीमा पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। पंजाब को आज अगर सबसे बड़ा खतरा है, तो वह खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की सीमाओं से रिसकर आ रही दहशतगर्दी, स्मगलिंग और हथियारबंद गिरोहों से है।”

टीटीपी और अलगाववादी हमलों का बनाया आधार

अपने बयान के पक्ष में तर्क देते हुए मरियम नवाज ने पाकिस्तान में सक्रिय प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूच अलगाववादी गुटों की गतिविधियों का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि खैबर पख्तूनख्वा में पीटीआई की प्रांतीय सरकार आतंकवाद को रोकने में पूरी तरह विफल रही है, जिसके चलते आतंकी गिरोह केपीके से पंजाब के शांतिपूर्ण इलाकों में घुसपैठ कर रहे हैं और सुरक्षा बलों को निशाना बना रहे हैं।

मरियम ने दावा किया कि बलूचिस्तान और केपीके के अनियंत्रित इलाकों से नशीले पदार्थों, अवैध हथियारों और आत्मघाती हमलावरों का नेटवर्क पंजाब में दाखिल होने की लगातार फिराक में रहता है। उन्होंने पंजाब पुलिस और आतंकवाद निरोधक विभाग (CTD) को आदेश दिया कि वे पूर्वी सीमा के बजाय पश्चिमी और प्रांतीय सीमाओं पर नाकाबंदी और निगरानी को दोगुना करें।

इमरान खान की पार्टी और बलूच नेताओं का फूटा गुस्सा: ‘देश को बांटने की साजिश’

मरियम नवाज के इस बयान के सामने आते ही पाकिस्तान की संसद से लेकर प्रांतीय विधानसभाओं तक घमासान शुरू हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI), जिसकी खैबर पख्तूनख्वा में सरकार है, ने इस बयान पर बेहद तीखा विरोध दर्ज कराया है। केपीके के मुख्यमंत्री और पीटीआई नेताओं ने कहा कि मरियम नवाज ने अपने इस संकीर्ण और अहंकार से भरे बयान से पूरे पश्तून और बलूच समुदाय का अपमान किया है।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि मरियम नवाज का यह बयान यह साबित करता है कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) सिर्फ ‘पंजाब की पार्टी’ बनकर रह गई है और उसे फेडरेशन (संघ) के अन्य छोटे प्रांतों की भावनाओं से कोई सरोकार नहीं है। बलूच अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी सवाल उठाया कि दशकों तक बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर पंजाब को चमकाने वाले हुक्मरान आज आतंकवाद के नाम पर बलूचों को पूरे देश के सामने विलेन बनाकर पेश कर रहे हैं।

सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठान के लिए असहज स्थिति

मरियम नवाज का यह बयान पाकिस्तानी सेना और वहां के पारंपरिक सुरक्षा विमर्श के लिए भी एक अजीब स्थिति पैदा करता है। दशकों से पाकिस्तानी सेना और डीप स्टेट अपने विशाल रक्षा बजट और अस्तित्व को भारत के कथित ‘खतरे’ के नाम पर ही जायज ठहराते रहे हैं। ऐसे में सत्तारूढ़ दल की सबसे प्रमुख नेता और नवाज शरीफ की बेटी द्वारा भारत के खतरे को खारिज कर आंतरिक प्रांतों को सबसे बड़ा खतरा बताना सेना के पारंपरिक नैरेटिव से पूरी तरह मेल नहीं खाता। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सेना के भीतर भी अब यह आम सहमति बन चुकी है कि पाकिस्तान को बाहरी दुश्मनों से ज्यादा अपने ही बनाए आतंकी भस्मासुरों (TTP और बलूच विद्रोहियों) से अस्तित्व का खतरा पैदा हो चुका है।

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