गर्म तवे पर तुरंत पानी डालना क्यों है भारी भूल? जानिए इसके पीछे का चौंकाने वाला विज्ञान और होने वाले नुकसान

रसोई में खाना बनाते समय अक्सर लोग जल्दबाजी में रोटी या पराठा सेकने के तुरंत बाद गर्म तवे को सिंक में डाल देते हैं या उस पर सीधे नल का पानी चला देते हैं। ऐसा करते ही ‘छन्न’ की तेज आवाज के साथ धुआं और भाप उठती है। कई लोगों को लगता है कि ऐसा करने से तवा जल्दी साफ हो जाएगा या ठंडा हो जाएगा।

विज्ञान के दृष्टिकोण से यह आदत आपके बर्तनों को हमेशा के लिए खराब कर सकती है और रसोई में दुर्घटना का कारण भी बन सकती है। इसके पीछे का मुख्य वैज्ञानिक कारण है ‘थर्मल शॉक’ (Thermal Shock)।

इसके पीछे का साइंस: क्या होता है ‘थर्मल शॉक’?

भौतिक विज्ञान का एक बुनियादी नियम है—गर्मी पाकर धातुएं फैलती हैं (Thermal Expansion) और ठंडा होने पर सिकुड़ती हैं (Contraction)।

  1. अचानक तापमान का भारी अंतर: जब तवा गैस चूल्हे पर होता है, तो उसका तापमान 200°C से 300°C तक पहुंच जाता है। इस अत्यधिक गर्मी के कारण धातु के अणु (Molecules) फैल जाते हैं।

  2. असमान सिकुड़न (Uneven Contraction): जब इस खौलते गर्म तवे पर सामान्य नल का पानी (लगभग 20°C से 25°C) डाला जाता है, तो तवे की जिस सतह पर पानी गिरता है, वह हिस्सा सेकंड के सौवें हिस्से में तेजी से ठंडा होकर सिकुड़ने की कोशिश करता है। वहीं, तवे के अंदरूनी और नीचे का हिस्सा अब भी गर्म और फैला हुआ होता है।

  3. संरचनात्मक खिंचाव: धातु के एक हिस्से के अचानक सिकुड़ने और दूसरे हिस्से के गर्म रहने के कारण धातु के भीतर भारी आंतरिक खिंचाव (Internal Stress) पैदा होता है। इसी भौतिक घटना को थर्मल शॉक कहा जाता है।

गर्म तवे पर पानी डालने से होने वाले 4 बड़े नुकसान

  • तवे का मुड़ना या टेढ़ा होना (Warping): थर्मल शॉक के कारण तवे का निचला सपाट तल टेढ़ा हो जाता है। तवा बीच से ऊपर उठ जाता है या एक तरफ झुक जाता है। एक बार तवा मुड़ जाने के बाद उस पर तेल बीच में टिकने के बजाय किनारों पर भागने लगता है, जिससे रोटियां और डोसा एक समान नहीं सिकते।

  • नॉन-स्टिक कोटिंग का उखड़ना: अगर तवा नॉन-स्टिक (टेफ्लॉन या सिरेमिक कोटेड) है, तो गर्म तवे पर ठंडा पानी पड़ते ही धातु और कोटिंग अलग-अलग दरों पर सिकुड़ती हैं। इससे कोटिंग में बारीक दरारें पड़ जाती हैं, परत पपड़ी बनकर छूटने लगती है और जहरीले केमिकल्स खाने में मिल सकते हैं।

  • कास्ट आयरन (कच्चे लोहे) का चटकना: कास्ट आयरन या भारी लोहे के तवे बहुत मजबूत होते हैं लेकिन वे लचीले नहीं होते। जब गर्म कास्ट आयरन पर ठंडा पानी डाला जाता है, तो थर्मल शॉक की वजह से तवा बीच से टूट या चटक (Crack) सकता है।

  • खौलते छींटे और भाप से जलने का जोखिम: 200 डिग्री के तवे पर पानी गिरते ही पानी तुरंत भाप में बदलता है। अगर तवे पर थोड़ा भी तेल या घी बचा हो, तो गर्म तेल के बारीक छींटे चेहरे या हाथों पर उड़ सकते हैं, जिससे गंभीर जलन हो सकती है।

तवे को साफ करने का सही और वैज्ञानिक तरीका

  • प्राकृतिक रूप से ठंडा होने दें: गैस बंद करने के बाद तवे को चूल्हे पर ही 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ दें ताकि वह धीरे-धीरे कमरे के तापमान पर आ सके।

  • गुनगुने पानी का प्रयोग: अगर तवे पर कुछ चिपका हुआ है और तुरंत धोना जरूरी है, तो ठंडे पानी के बजाय हल्के गुनगुने या गर्म पानी का उपयोग करें ताकि तापमान का अंतर कम से कम रहे।

  • लोहे के तवे की सीजनिंग बचाएं: लोहे के तवे को ठंडा होने के बाद हल्के स्पंज से धोएं और सुखाकर हल्का सा सरसों का तेल लगाकर रखें, जिससे उस पर जंग न लगे।

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