नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही, भरपाई के लिए 723 अरब रुपये की दरकार; वैश्विक मदद की गुहार

पहाड़ी देश नेपाल में बीते दिनों भोटेकोशी और त्रिशूली नदी कॉरिडोर में आई प्रलयंकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा से हुए व्यापक नुकसान का आकलन करने के बाद नेपाल सरकार ने आधिकारिक रिपोर्ट जारी की है। राष्ट्रीय योजना आयोग और आपदा जोखिम न्यूनीकरण प्राधिकरण द्वारा तैयार की गई ‘रैपिड डैमेज एंड नीड्स असेसमेंट’ (RDNA) रिपोर्ट के अनुसार, देश के बुनियादी ढांचे, ऊर्जा ग्रिड और सामाजिक व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने के लिए लगभग 723.31 अरब नेपाली रुपये (करीब 4.74 अरब अमेरिकी डॉलर) के विशाल बजट की आवश्यकता होगी।

नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, यह नुकसान देश के वार्षिक बजट के एक तिहाई हिस्से के बराबर है। वर्ष 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद यह नेपाल पर आया सबसे बड़ा आर्थिक और मानवीय संकट बन चुका है।

ऊर्जा और परिवहन ढांचा पूरी तरह ध्वस्त: पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स बहे

सरकारी आकलन के अनुसार, बाढ़ का सबसे क्रूर प्रहार देश के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ा है, जिसे दुरुस्त करने के लिए कुल बजट का 75 फीसदी हिस्सा यानी करीब 473.57 अरब नेपाली रुपये (3.1 अरब डॉलर) चाहिए।

  • ऊर्जा और पावर ग्रिड: भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटी में स्थित 13 से अधिक बड़ी जलविद्युत (Hydroelectric) परियोजनाएं और 5 सौर संयंत्र मलबे में दब गए हैं या बह गए हैं। ऊर्जा संकट को दूर करने के लिए 390.62 अरब रुपये की जरूरत आंकी गई है।

  • सड़क और पुल संपर्क: करीब 69 किलोमीटर प्रमुख सड़कें पूरी तरह जमींदोज हो चुकी हैं। 33 मोटर वाहन पुल बाढ़ के तेज बहाव में बह गए और 53 झूला पुल (सस्पेंशन ब्रिज) गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके पुनर्निर्माण के लिए 73.34 अरब रुपये चाहिए।

  • चीन से व्यापार ठप: नेपाल और चीन के बीच व्यापार के लिए रीढ़ माने जाने वाले प्रमुख ग्यिरोंग सीमा बंदरगाह और उसके संपर्क मार्गों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे दोनों देशों के बीच माल ढुलाई पूरी तरह रुक गई है।

7,500 से अधिक मकान जमींदोज, स्कूल और अस्पताल भी मलबे में तब्दील

बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन जिलों के सैकड़ों गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 7,570 से अधिक निजी मकान पूरी तरह या आंशिक रूप से तबाह हो चुके हैं, जिसमें नुवाकोट की बिदुर नगरपालिका सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है।

इसके अलावा 48 सरकारी कार्यालय भवन, 18 स्कूल, 7 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 30 प्राचीन सांस्कृतिक विरासत स्थल क्षतिग्रस्त हुए हैं। सामाजिक ढांचे और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए 103.55 अरब नेपाली रुपये की जरूरत का अनुमान लगाया गया है। वहीं व्यापार, बैंक शाखाओं और करीब 1,806 हेक्टेयर कृषि भूमि के नष्ट होने से उत्पादक क्षेत्रों को 50.77 अरब रुपये से अधिक का झटका लगा है।

दो चरणों में होगा पुनर्निर्माण: अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ‘क्लाइमेट जस्टिस’ की अपील

नेपाल सरकार ने इस व्यापक पुनर्निर्माण योजना को दो स्पष्ट चरणों में विभाजित किया है:

  • अल्पकालिक चरण (अगले 6 महीने): मलबे की सफाई, तत्काल खाद्यान्न, अस्थायी आश्रय और नदी प्रबंधन के लिए करीब 8.73 अरब नेपाली रुपये खर्च किए जाएंगे।

  • दीर्घकालिक चरण: स्थायी पुलों, हाइड्रोपावर ग्रिड्स, स्कूलों और पक्के मकानों के निर्माण के लिए 714.58 अरब रुपये खर्च किए जाएंगे।

सीमित वित्तीय संसाधनों के चलते नेपाल सरकार ने संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और पड़ोसी मित्र देशों से तत्काल आर्थिक सहयोग की गुहार लगाई है। नेपाल ने इस आपदा को ‘जलवायु न्याय’ (Climate Justice) के अंतरराष्ट्रीय मंच से जोड़ते हुए कहा है कि कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार विकसित और संपन्न देशों की यह ऐतिहासिक नैतिक जिम्मेदारी है कि वे जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे कमजोर हिमालयी देशों के पुनर्निर्माण में आगे आएं।

Check Also

‘प्लीज! मदद कीजिए, उन पर हमले कीजिए’; ट्रंप के सामने दो बार गिड़गिड़ाए सऊदी प्रिंस MBS, लेकिन अमेरिका ने सीधे किया इनकार

यमन के रणनीतिक बंदरगाह शहर मोचा (Al-Mokha) पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के कब्जे और …