UP Chunav: अखिलेश यादव का Gen-Z दांव, सपा ने शुरू किया कॉलेज-यूनिवर्सिटी में PDA जागरूकता अभियान

उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है, लेकिन इस बार समाजवादी पार्टी (सपा) ने एक बिल्कुल नए और आक्रामक चुनावी फॉर्मूले पर काम शुरू किया है। देश के विभिन्न हिस्सों में हाल के दिनों में छात्रों और युवाओं के मुद्दों को लेकर बने माहौल के बीच सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने अपनी कोर ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति को नई पीढ़ी यानी ‘जेन-जी’ (Gen-Z) से जोड़ने का बड़ा दांव चला है। पार्टी ने प्रदेश के तमाम विश्वविद्यालयों, डिग्री कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में विशेष ‘PDA जागरूकता अभियान’ की शुरुआत कर दी है। इस अभियान का सीधा मकसद पहली बार वोट डालने जा रहे और कॉलेज जाने वाले युवाओं को अपनी विचारधारा और प्राथमिकताओं से जोड़ना है।

कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ‘जेन-जी कनेक्ट’, समाजवादी छात्रसभा को मिली कमान

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के मार्गदर्शन में शुरू हुआ यह विशेष अभियान 30 सितंबर तक प्रदेशव्यापी स्तर पर चलाया जाएगा। पार्टी नेतृत्व ने इस पूरे युवा अभियान की मुख्य कमान अपनी छात्र इकाई ‘समाजवादी छात्रसभा’ को सौंपी है, जिसमें पार्टी के अन्य युवा संगठन भी पूरा सहयोग दे रहे हैं। समाजवादी छात्रसभा के प्रदेश अध्यक्ष विनीत कुशवाहा के अनुसार, संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सीधे कॉलेज परिसरों में जाकर छात्रों से रूबरू हो रहे हैं। पारंपरिक रैलियों या भाषणों के बजाय यह अभियान संवाद आधारित रखा गया है, जिसमें क्लासरूम से लेकर हॉस्टल और कैंटीन तक छात्र-छात्राओं से सीधा संपर्क साधा जा रहा है। यह पहल सपा के नए सदस्यता अभियान से भी जुड़ी हुई है, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को सीधे पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलाई जा सके।

छात्रों के सीधे फीडबैक से तैयार होगा 2027 का चुनावी घोषणा पत्र

इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत इसका फीडबैक मॉडल है। सपा नेता कॉलेज परिसरों में जाकर युवाओं से उनके ज्वलंत शैक्षणिक, सामाजिक और करियर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। छात्रों की परेशानियां, सिस्टम को लेकर उनकी शिकायतें और भविष्य की सरकारों से उनकी अपेक्षाओं को एक लिखित और डिजिटल रिपोर्ट के रूप में संकलित किया जा रहा है। छात्रसभा द्वारा जुटाया गया यह जमीनी डाटा सीधे लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय भेजा जाएगा। पार्टी आलाकमान का कहना है कि इन सुझावों, शिकायतों और युवाओं की प्राथमिकताओं को सीधे तौर पर पार्टी के आगामी चुनावी घोषणा पत्र (Manifesto) का आधार बनाया जाएगा। सपा का मानना है कि बंद कमरों में नीतियां बनाने के बजाय सीधे युवाओं की जुबानी उनकी मांगें समझकर वादे तय किए जाने चाहिए।

फीस वृद्धि, छात्रसंघ चुनाव और रोजगार जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी

समाजवादी पार्टी इस अभियान के जरिए सीधे तौर पर युवाओं की दुखती रग पर हाथ रख रही है। पार्टी ने अभियान के केंद्र में मुख्य रूप से चार-पांच बड़े मुद्दे रखे हैं:

  1. फीस वृद्धि का विरोध: सरकारी और निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में लगातार बढ़ाई जा रही फीस के खिलाफ छात्रों को एकजुट करना।

  2. छात्रसंघ चुनावों की बहाली: छात्र राजनीति की नर्सरी माने जाने वाले छात्रसंघ चुनावों को दोबारा शुरू कराने की मांग उठाना।

  3. आरक्षण का निष्पक्ष क्रियान्वयन: उच्च शिक्षा और नियुक्तियों में आरक्षण के नियमों के सटीक और पारदर्शी पालन का मुद्दा।

  4. रोजगार, पेपर लीक और भर्तियां: समय पर प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित कराना, पेपर लीक पर सख्त रोक और युवाओं के लिए नियमित सरकारी नौकरियां सुनिश्चित करना।

डिजिटल ऐप और क्यूआर कोड के जरिए टेक-सेवी युवाओं से जुड़ाव

जेन-जी पीढ़ी पूरी तरह डिजिटल और स्मार्टफोन पर निर्भर है, इसलिए सपा ने केवल पर्चे बांटने के बजाय आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। पार्टी ने युवाओं के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप और ‘Gen-Z की राय’ नाम से ऑनलाइन फॉर्म व क्यूआर (QR) कोड आधारित फीडबैक सिस्टम तैयार किया है। कॉलेज परिसरों और प्रमुख स्थानों पर लगाए जा रहे पोस्टरों पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करके छात्र सीधे रोजगार, शिक्षा, स्टार्टअप, तकनीक और स्वास्थ्य से जुड़ी अपनी उम्मीदें दर्ज कर पा रहे हैं। इस डिजिटल पहल से सपा को शहरी और अर्ध-शहरी युवाओं का एक सटीक डाटाबेस तैयार करने में भी मदद मिल रही है।

पुराने वादों की वापसी और नए सामाजिक समीकरणों को साधने की जुगत

इस युवा केंद्रित अभियान के साथ ही सपा अपने पिछले शासनकाल की कुछ अत्यंत लोकप्रिय और चर्चित योजनाओं को नए तेवर के साथ दोबारा लागू करने का संकेत दे रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, घोषणा पत्र में कन्या विद्याधन, बेरोजगारी भत्ता और छात्र-छात्राओं के लिए मुफ्त लैपटॉप वितरण जैसी योजनाओं को आधुनिक रूप में फिर से शुरू करने का वादा शामिल किया जा सकता है। इसके साथ ही, महिलाओं को सालाना वित्तीय सहायता देने, लाखों आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों के लिए सम्मानजनक मानदेय व कार्य घंटे तय करने वाली नीति लाने की भी योजना है। जातीय संतुलन को व्यापक रूप देने के लिए अखिलेश यादव कांशीराम, महाराणा प्रताप और वीरांगना अवंती बाई जैसी महान ऐतिहासिक शख्सियतों के सम्मान और प्रतिमाओं की स्थापना जैसे प्रतीकों के जरिए हर तबके को जोड़ने की कोशिश में जुटे हैं।

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