
संयुक्त राज्य अमेरिका के इतिहास में राष्ट्रपति और मुख्यधारा की मीडिया के बीच अब तक का सबसे बड़ा और अभूतपूर्व टकराव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तीन प्रमुख समाचार संस्थानों—सीएनएन (CNN), एमएस नाउ (MS NOW) और पोलिटिको (Politico) के पत्रकारों के प्रवेश और व्हाइट हाउस कवरेज पर अचानक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद अमेरिकी मीडिया जगत में भूचाल आ गया है। इस अप्रत्याशित और सख्त फैसले के विरोध में अमेरिका के सभी शीर्ष टेलीविजन नेटवर्क एकजुट हो गए हैं। जहां एक ओर प्रतिबंधित मीडिया संस्थानों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ संघीय अदालत में मानहानि और प्रेस की स्वतंत्रता के हनन का मुकदमा दायर किया है, वहीं दूसरी ओर देश के सभी बड़े न्यूज ब्रॉडकास्टर्स ने राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यक्रमों की साझा ‘पूल कवरेज’ (Pool Coverage) का पूर्ण बहिष्कार कर ऐतिहासिक बगावत का बिगुल फूंक दिया है।
अमेरिकी टीवी नेटवर्क्स का अभूतपूर्व कदम: राष्ट्रपति ट्रंप की कवरेज रोकी
व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति की दैनिक गतिविधियों, भाषणों और आधिकारिक दौरों को रिकॉर्ड करने के लिए दशकों से एक स्थापित ‘प्रेस पूल’ व्यवस्था काम करती आ रही है। इस व्यवस्था के तहत बारी-बारी से एक प्रमुख नेटवर्क कैमरे और माइक्रोफोन के जरिए राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग करता है और वही फुटेज बाकी सभी चैनलों को साझा की जाती है। सोमवार को सीएनएन की बारी थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने उनके पत्रकारों को परिसर में घुसने से रोक दिया और उनके प्रेस पास जब्त कर लिए। इसके विरोध में व्हाइट हाउस टीवी पूल का हिस्सा रहने वाले पांचों प्रमुख अमेरिकी ब्रॉडकास्टर्स—एबीसी (ABC), सीबीएस (CBS), सीएनएन (CNN), फॉक्स न्यूज (Fox News) और एनबीसी (NBC)—ने एकजुटता दिखाते हुए आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की पूल कवरेज को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का ऐलान कर दिया। यहां तक कि आमतौर पर रिपब्लिकन समर्थक माने जाने वाले फॉक्स न्यूज ने भी इस बहिष्कार का पूरा समर्थन किया। चैनलों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के बारे में निष्पक्ष और सटीक जानकारी पाना जनता का मौलिक अधिकार है, और किसी भी प्रशासन को सिर्फ इसलिए मीडिया संस्थान पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है क्योंकि उसे उसकी रिपोर्टिंग पसंद नहीं आई।
बिना मीडिया के हुआ नए हेलीपैड का उद्घाटन, ट्रंप की आवाज तक नहीं आई साफ
इस ऐतिहासिक बॉयकॉट का सीधा असर व्हाइट हाउस में आयोजित आधिकारिक कार्यक्रमों पर साफ देखने को मिला। राष्ट्रपति ट्रंप जब व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में बने नए हेलीपैड का उद्घाटन करने पहुंचे और निर्माण कर्मियों से बातचीत की, तो वहां कोई भी आधिकारिक टीवी पूल कैमरा या डेडिकेटेड माइक मौजूद नहीं था। हेलीकॉप्टर ‘मरीन वन’ के तेज शोर में राष्ट्रपति क्या बोल रहे थे, वह व्हाइट हाउस की अपनी लाइवस्ट्रीम पर भी किसी को सुनाई नहीं दिया। प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों और फोटो पत्रकारों ने भी तीन प्रतिबंधित संस्थानों के समर्थन में राष्ट्रपति की तस्वीरों को जारी करने में देरी की। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की महत्वपूर्ण बैठकों और दौरों के दौरान भी राष्ट्रपति को बिना साझा टीवी पूल कैमरों के ही आगे बढ़ना पड़ा।
‘अमेरिकी संविधान के फर्स्ट अमेंडमेंट पर हमला’: मीडिया ने खटखटाया अदालत का दरवाजा
प्रतिबंध का सामना कर रहे तीनों मीडिया संस्थानों—सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको—ने वाशिंगटन डीसी की संघीय अदालत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ सूसी विल्स, कम्युनिकेशंस डायरेक्टर स्टीवन चेउंग और सीक्रेट सर्विस डायरेक्टर के खिलाफ औपचारिक याचिका दाखिल की है। मीडिया संस्थानों ने अदालत में दलील दी है कि बिना किसी पूर्व सूचना या निष्पक्ष प्रक्रिया के सिर्फ आलोचनात्मक खबरों के चलते पत्रकारों के क्रेडेंशियल्स रद्द करना अमेरिकी संविधान के ‘फर्स्ट अमेंडमेंट’ (First Amendment) यानी प्रेस व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ‘फिफ्थ अमेंडमेंट’ के तहत निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया के अधिकारों का सीधा और खुला उल्लंघन है। मीडिया संगठनों ने अदालत से इस असंवैधानिक प्रतिबंध पर तत्काल रोक (Temporary Restraining Order) लगाने की मांग की है।
ट्रंप का पलटवार: ‘मीडिया अमेरिका में कैंसर की तरह, यह प्रेस पर नहीं फेक न्यूज पर वार’
दूसरी ओर, मीडिया के कड़े विरोध के बावजूद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने रुख पर पूरी तरह अडिग नजर आ रहे हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर तीखा पलटवार करते हुए लिखा कि व्हाइट हाउस स्वतंत्र प्रेस पर कोई हमला नहीं कर रहा है, बल्कि यह उस ‘फेक न्यूज’ के खिलाफ सीधी जंग है जो अमेरिका में कैंसर की तरह फैल चुकी है। ट्रंप ने कहा कि मुख्यधारा की मीडिया का एक बड़ा हिस्सा भ्रष्ट, सुनियोजित तरीके से पक्षपाती और पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो चुका है, जो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। व्हाइट हाउस ने मुख्यधारा की मीडिया से दूरी बनाते हुए ‘ट्रंप टीवी’ (Trump TV) नाम से अपना खुद का 24/7 स्ट्रीमिंग चैनल भी लॉन्च कर दिया, जिसके जरिए प्रशासन के भाषण और प्रेस विज्ञप्तियां सीधे प्रसारित की जा रही हैं। हालांकि, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगामी दौरे और संयुक्त राष्ट्र की बैठकों के महत्वपूर्ण सप्ताह में मीडिया और सत्ता के बीच इस तरह की खुली जंग ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
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