
उत्तर प्रदेश की राजनीति में रोजगार के मुद्दे पर एक बार फिर तीखा घमासान छिड़ गया है। इस बार विवाद के केंद्र में राज्य के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक हैं, जिनका एक ताजा बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। डिप्टी सीएम ने युवाओं को नौकरी के पीछे भागने के बजाय टैक्सी या ई-रिक्शा चलाने और परिवार के साथ वक्त बिताने की सलाह दी है। लखनऊ में आयोजित एक सार्वजनिक मंच से दिए गए इस बयान के बाद सियासी गलियारों से लेकर इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है। विपक्षी दलों ने इसे शिक्षित बेरोजगार युवाओं के भविष्य और उनकी डिग्री के साथ भद्दा मजाक बताते हुए सरकार की रोजगार नीति पर कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
नौकरी के चक्कर में मत पड़ो, चार घंटा गाड़ी चलाओ: ब्रजेश पाठक
राजधानी लखनऊ में सहकारिता आधारित नई कैब सेवा ‘भारत टैक्सी’ के आधिकारिक शुभारंभ का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक मौजूद रहे। मंच से चालकों और युवाओं को संबोधित करते हुए ब्रजेश पाठक स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता के फायदे गिनाने लगे। इसी दौरान उन्होंने कहा कि युवाओं को नौकरी के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने तर्क देते हुए कहा, “नौकरी के चक्कर में मत पड़ो। अपनी गाड़ी लो, चार घंटा चलाओ और दोपहर में अपने लड़का-बच्चों के संग रहो। दूसरों की नौकरी करोगे तो क्या बच्चों के पास दो घंटा बैठ पाओगे? आखिरी सवारी अपने घर के पास वाली लो। दो बज गया, खाना खाने का समय हुआ तो घर आ गए, दो घंटा बच्चों के साथ खाए-पिए, सोए, आराम किए और फिर शाम को निकल गए रात दस बजे तक के लिए। रुपया ही रुपया अपने घर का होगा।”
पराधीनता और लेबर अड्डे का दिया उदाहरण
डिप्टी सीएम ने अपने भाषण में रामचरितमानस की चौपाई ‘पराधीन सपनेहुँ सुखु नाहीं’ का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी के अधीन काम करने में कोई सुख और आजादी नहीं है। उन्होंने दिहाड़ी मजदूरों का उदाहरण देते हुए कहा कि लेबर अड्डे से जब किसी मजदूर को काम पर ले जाया जाता है, तो अगर वह गुड़-पानी पीने में दस मिनट भी ज्यादा लगा दे तो ठेकेदार उसे डांटने लगता है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि अपनी मोटर और अपना हाथ होने से इंसान आजाद रहता है। जिस दिन ज्यादा पैसे की जरूरत हो, उस दिन दो सवारी अधिक ढो लो। उन्होंने आगे कहा कि गांव और शहर के जितने भी हुनरमंद नौजवान हैं, वे मोटर चलाएं क्योंकि मोटर चलाना कोई खराब काम नहीं है, बल्कि इससे स्वाभिमान से पैसा कमाया जा सकता है।
विपक्ष का तीखा हमला: पहले पकौड़ा, अब टैक्सी चलवाने की तैयारी
ब्रजेश पाठक का यह बयान सामने आते ही समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने डिप्टी सीएम के बयान पर तंज कसते हुए लिखा कि देश का युवा रिक्शा नहीं, देश चलाएगा। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर उप मुख्यमंत्री जी को रिक्शा चलाने का इतना ही शौक है, तो वह उपहार स्वरूप उन्हें रिक्शा भेज सकते हैं। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए सवाल दागा कि क्या बीजेपी के नेता अपने घर के युवाओं और बच्चों से रिक्शा या टैक्सी चलवाएंगे? सोशल मीडिया यूजर्स ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि पहले युवाओं को चाय-पकौड़े तलने की सलाह दी गई और अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं से टैक्सी चलाने को कहा जा रहा है।
भारत टैक्सी योजना और बयान का संदर्भ
विवाद बढ़ने के बाद सत्ता पक्ष के समर्थकों और रणनीतिकारों का कहना है कि डिप्टी सीएम के बयान को जानबूझकर गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि लखनऊ में शुरू की गई ‘भारत टैक्सी’ योजना पूरी तरह जीरो-कमीशन मॉडल पर आधारित है और इसमें ड्राइवरों को पांच लाख रुपये तक का सामाजिक सुरक्षा बीमा दिया जा रहा है। निजी ओला-उबर जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मनमाने कमीशन से ड्राइवरों को मुक्ति दिलाने और स्वरोजगार को सम्मान देने के उद्देश्य से यह बात कही गई थी। हालांकि, विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब प्रदेश में लाखों युवा शिक्षक भर्ती, पुलिस भर्ती और यूपीपीएससी की परीक्षाओं के लिए वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में सरकार के दूसरे सबसे बड़े नेता द्वारा नौकरी छोड़ने की बात कहना युवाओं के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
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