
भारतीय सिनेमा के इतिहास में सस्पेंस थ्रिलर जॉनर को एक नया मुकाम देने वाली फ्रेंचाइजी ‘दृश्यम’ का अगला अध्याय अब बड़े पर्दे पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी सीबीएफसी ने बहुप्रतीक्षित सस्पेंस ड्रामा ‘दृश्यम – द कनक्लूजन’ को बिना किसी दृश्य या संवाद में बदलाव किए क्लीन चिट दे दी है। बोर्ड की जांच समिति ने फिल्म के प्रवाह और रचनात्मक संतुलन की सराहना करते हुए इसे ‘यू/ए’ (U/A) सर्टिफिकेट जारी किया है। किसी भी बड़े बजट की थ्रिलर फिल्म के लिए सेंसर की कैंची चले बिना रिलीज की अनुमति मिलना फिल्म निर्माताओं और दर्शकों दोनों के लिए बड़ी खबर मानी जा रही है।
अजय देवगन स्टारर इस फ्रेंचाइजी के तीसरे और अंतिम भाग को लेकर उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक के सिनेमा प्रेमियों में जबरदस्त उत्सुकता देखी जा रही है। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, लखनऊ, कानपुर और पटना जैसे हिंदी भाषी क्षेत्रों के सिंगल स्क्रीन और मल्टीप्लेक्स में अभी से एडवांस बुकिंग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सेंसर बोर्ड के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि निर्देशक की मूल कहानी और दृश्यों के प्रभाव के साथ कोई समझौता नहीं किया गया है, जिससे थियेटरों में दर्शकों को पूरा सस्पेंस ड्रामा उसी तीव्रता के साथ देखने को मिलेगा जैसा निर्माताओं ने प्लान किया था।
क्या 2 और 3 अक्टूबर का रहस्य सुलझा पाएगी पुलिस, कहानी में नया मोड़
सेंसर बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार फिल्म का आधिकारिक रनटाइम लगभग दो घंटे पैंतालीस मिनट तय किया गया है। कहानी वहीं से रफ्तार पकड़ेगी जहां पिछले भाग में विजय सलगांवकर और उनके परिवार को पुलिसिया जांच के एक नए भंवर में फंसा हुआ दिखाया गया था। गोवा की सुरम्य वादियों और पोंडा के बैकड्रॉप पर रची गई यह कहानी इस बार सीधे कानूनी दांवपेच, फोरेंसिक साक्ष्य और मानवीय मनोविज्ञान के गहरे द्वंद्व को दर्शाती नजर आएगी। सूत्रों के अनुसार बोर्ड के सदस्यों ने फिल्म के क्लाइमेक्स और स्क्रीनप्ले की सराहना की है, जिसमें किसी भी प्रकार की हिंसा या अश्लीलता का सहारा लिए बिना विशुद्ध दिमागी खेल के जरिए तनाव को बनाए रखा गया है।
फिल्म में तब्बू और अक्षय खन्ना की भूमिकाएं इस बार और भी ज्यादा आक्रामक और निर्णायक मोड़ पर दिखाई देंगी। दोनों वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के किरदार सलगांवकर परिवार के बनाए चक्रव्यूह को भेदने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकते हैं। सेंसर जांच के दौरान निर्माताओं ने दलील दी थी कि फिल्म का हर दृश्य कहानी के प्रवाह और भावनात्मक जुड़ाव के लिए आवश्यक है, जिसे बोर्ड ने स्वीकार करते हुए किसी भी डायलॉग को म्यूट करने या विजुअल कट लगाने का निर्देश नहीं दिया।
अजय देवगन और तब्बू का आमना-सामना, बॉक्स ऑफिस पर बड़े धमाके की उम्मीद
व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि बिना किसी कट के प्रमाण पत्र मिलने से फिल्म की हाइप को सीधा फायदा पहुंचेगा। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के पारंपरिक सिनेमाघरों में ‘दृश्यम’ सीरीज की पकड़ बेहद मजबूत रही है। पारिवारिक सुरक्षा के इर्द-गिर्द बुनी गई इस कहानी को हर वर्ग का दर्शक अपने साथ जोड़कर देखता आया है। परिवार की रक्षा के लिए एक आम इंसान के असाधारण कदमों को दर्शाती यह कहानी इस बार अपने निर्णायक निष्कर्ष पर पहुंचेगी, जिसे देखने के लिए दर्शक लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।
फिल्म विश्लेषक इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि आधुनिक एआई सर्च इंजनों और गूगल डिस्कवर पर इस फिल्म को लेकर सर्च ट्रेंड्स पिछले कुछ दिनों में तेजी से ऊपर चढ़े हैं। दर्शक यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या इस बार कानून के हाथ विजय सलगांवकर के गिरेबान तक पहुंच पाएंगे या फिर वह हमेशा की तरह अपनी चतुराई से बच निकलेगा। फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर भी इस बार बेहद सधा हुआ बताया जा रहा है, जो हर महत्वपूर्ण दृश्य में सस्पेंस को बढ़ाने का काम करता है।
रिलीज डेट और टिकट खिड़की पर एडवांस बुकिंग का माहौल
मल्टीप्लेक्स श्रृंखलाओं ने फिल्म की स्क्रीनिंग को लेकर अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। देश भर के 4000 से अधिक स्क्रीन्स पर इस महा मुकाबले को रिलीज करने की योजना बनाई गई है। टीयर 2 और टीयर 3 शहरों के सिनेमाघरों में भी दर्शकों की संभावित भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त शोज जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। फिल्म के निर्देशक ने हालिया साक्षात्कार में स्पष्ट किया था कि यह भाग फ्रेंचाइजी का अंतिम और सबसे भावनात्मक अध्याय होगा, जहां हर किरदार के फैसलों का अंतिम परिणाम सामने आएगा।
सेंसर बोर्ड से मिली इस हरी झंडी के बाद निर्माताओं ने अपने डिजिटल और जमीनी प्रचार अभियान को और तेज करने का फैसला किया है। प्रमुख शहरों में विशेष फैन स्क्रीनिंग और प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जाएगा। अजय देवगन के करियर की यह सबसे सफल फ्रेंचाइजियों में से एक है, इसलिए टिकट खिड़की पर पहले दिन के आंकड़ों को लेकर ट्रेड पंडित ऐतिहासिक शुरुआत का अनुमान लगा रहे हैं। अब सबकी निगाहें सिनेमाघरों के पर्दे पर टिकी हैं, जहां 2 और 3 अक्टूबर के उस प्रसिद्ध किस्से का अंतिम न्याय होने जा रहा है।
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