राज्यसभा के लिए BJP से फिर उछला कवि कुमार विश्वास का नाम, MLC पैनल में भी था प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश की रिक्त हो रही राज्यसभा सीटों को लेकर राजनीतिक गलियारों में सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के संभावित उम्मीदवारों की फेहरिस्त पर जारी मंथन के बीच मशहूर कवि और पूर्व आप नेता डॉ. कुमार विश्वास का नाम एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि पार्टी नेतृत्व उन्हें संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) भेजने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब कुमार विश्वास का नाम भगवा दल से जुड़ा हो; इससे पहले उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) चुनावों के दौरान भी राज्य इकाई द्वारा भेजे गए नामों के पैनल में उनका नाम शामिल किया गया था, लेकिन उस समय किसी कारणवश सहमति नहीं बन पाई थी। अब राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर उनका नाम दोबारा सामने आने से सूबे की सियासत में नई बहस छिड़ गई है।

उत्तर प्रदेश कोटे की खाली हो रही राज्यसभा सीटों पर अपने कब्जे को बरकरार रखने के लिए भाजपा कोर कमेटी में लंबी चर्चाएं चल रही हैं। पार्टी द्वारा तैयार की जा रही संभावित नामों की सूची में स्मृति ईरानी, हरदीप सिंह पुरी, सुब्रत पाठक और हरीश द्विवेदी जैसे दिग्गजों के साथ-साथ कुमार विश्वास का नाम भी पैनल के स्तर पर चर्चा का हिस्सा बताया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति के सामने नामों का अंतिम पैनल भेजा जा रहा है, जिस पर आलाकमान मुहर लगाएगा।

विधान परिषद (MLC) से लेकर राज्यसभा तक का सफर

कुमार विश्वास के राजनीतिक पुनर्वास और भाजपा के साथ उनके तालमेल को लेकर लंबे समय से कयास लगाए जाते रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, जब उत्तर प्रदेश में विधान परिषद के लिए उम्मीदवारों का चयन हो रहा था, तब भी प्रदेश नेतृत्व के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने कुमार विश्वास का नाम पैनल में शामिल कर दिल्ली भेजा था। उस वक्त स्थानीय समीकरणों, पार्टी कार्यकर्ताओं की प्राथमिकता और अन्य तकनीकी वजहों से उनके नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी थी।

अब जब राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, तो उच्च सदन में एक प्रखर, तार्किक और बौद्धिक चेहरे की जरूरत को देखते हुए उनका नाम फिर से रेस में आगे बताया जा रहा है। संसद के उच्च सदन में विपक्ष के हमलों का सटीक जवाब देने और हिंदी पट्टी के मतदाताओं के बीच एक सशक्त सांस्कृतिक व राष्ट्रवादी संवाद कायम करने के लिए भाजपा रणनीतिकार कुमार विश्वास के नाम को उपयोगी विकल्प मान रहे हैं।

सार्वजनिक मंचों पर राष्ट्रवाद और प्रधानमंत्री की खुलकर तारीफ

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुमार विश्वास का नाम यूं ही चर्चा में नहीं आया है। पिछले कुछ वर्षों में कुमार विश्वास ने रामकथा ‘अपने-अपने राम’ और बड़े कवि सम्मेलनों के जरिए अपनी एक अलग राष्ट्रीय छवि गढ़ी है। वे सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के मुद्दों पर लगातार मुखर रहे हैं। हाल ही में विभिन्न मंचों पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की खुलकर सराहना की और केंद्र सरकार की नीतियों का समर्थन किया है।

विपक्षी दलों, खासकर आम आदमी पार्टी की कार्यशैली पर कुमार विश्वास के तीखे प्रहार हमेशा से भाजपा के राजनीतिक नैरेटिव के अनुकूल रहे हैं। ऐसे में भाजपा यदि उन्हें उच्च सदन भेजती है, तो पार्टी को संसद में एक ऐसा वक्ता मिलेगा जो न सिर्फ विपक्ष के दांव-पेंचों से भली-भांति वाकिफ है, बल्कि जनता की नब्ज पकड़कर सीधा संवाद स्थापित करने में भी माहिर है।

यूपी का संख्याबल और सीटों का गणित

उत्तर प्रदेश विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के आधार पर भाजपा गठबंधन की स्थिति बेहद मजबूत है। 10 सीटों पर होने वाले चुनाव में भाजपा अपने दम पर आठ सीटें आसानी से जीतने की स्थिति में है। प्रथम वरीयता के वोटों के हिसाब से एक सीट जीतने के लिए करीब 37 वोटों की आवश्यकता होगी। भाजपा के पास अपने और सहयोगी दलों के विधायकों को मिलाकर पर्याप्त संख्याबल मौजूद है, जबकि समाजवादी पार्टी दो सीटों पर आसानी से जीत दर्ज कर सकती है।

यही वजह है कि भाजपा के भीतर अपनी सुरक्षित सीटों के लिए कई पूर्व सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और सांगठनिक चेहरों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही है। इन राजनीतिक दिग्गजों के बीच कुमार विश्वास जैसे गैर-पारंपरिक और लोकप्रिय चेहरे को मौका मिलता है या नहीं, यह पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।

आधिकारिक घोषणा और कयासों का बाजार

फिलहाल भाजपा की ओर से किसी भी उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति को ध्यान में रखा जाएगा।

कुमार विश्वास के समर्थकों और राजनीतिक पंडितों की निगाहें अब दिल्ली में होने वाली केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक पर टिकी हैं। यदि शीर्ष नेतृत्व उनके नाम पर हरी झंडी देता है, तो यह उत्तर प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम साबित होगा।

Check Also

बीसी सखियों को उप मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन, प्रमुख सचिव को नियमानुसार कार्यवाही के निर्देश

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बीसी सखियों के प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात कर आश्वस्त किया …