संयुक्त राष्ट्र पर ईरान का ‘शोले’ तंज: बिना हाथ वाले ठाकुर से की UN की तुलना, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मजेदार मीम

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के संकट और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच राजनयिक स्तर पर एक बेहद अनोखा और हास्यप्रद वाकया सामने आया है। अमूमन कड़े कूटनीतिक बयानों और आधिकारिक पत्रों तक सीमित रहने वाली अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इस बार बॉलीवुड का लोकप्रिय तड़का देखने को मिला है। भारत स्थित ईरानी दूतावास ने वैश्विक संस्था संयुक्त राष्ट्र (UN) की विफलता और बड़े देशों के सामने उसकी कथित बेबसी का मजाक उड़ाने के लिए हिंदी सिनेमा की ऐतिहासिक फिल्म ‘शोले’ के मशहूर किरदार ‘ठाकुर बलदेव सिंह’ का सहारा लिया है।

ईरानी दूतावास द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया गया यह मीम देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गया और यूजर्स अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे हैं। इस मीम के जरिए ईरान ने दुनिया को यह समझाने की कोशिश की है कि कागजों पर और स्कूली किताबों में ताकतवर दिखने वाली संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था असल संकट के वक्त पूरी तरह निहत्थी, लाचार और पंगु साबित होती है।

डॉक्टर स्ट्रेंज बनाम शोले का ठाकुर: क्या है वायरल मीम की सच्चाई?

ईरानी दूतावास के आधिकारिक एक्स हैंडल से पोस्ट किए गए इस मीम को दो अलग-अलग हिस्सों (पैनल्स) में बांटा गया है। पहले पैनल में हॉलीवुड और मार्वल के मशहूर सुपरहीरो ‘डॉक्टर स्ट्रेंज’ की तस्वीर लगाई गई है, जिसमें वे अपनी जादुई शक्तियों के जरिए कई हाथों वाले एक सर्वशक्तिमान रूप में दिखाई दे रहे हैं। इस तस्वीर के ऊपर कैप्शन दिया गया है—“स्कूल की किताबों के मुताबिक UN” (UN according to school books)। यानी दुनिया भर के छात्रों को यह पढ़ाया जाता है कि संयुक्त राष्ट्र एक ऐसी संस्था है जिसके हाथ हर तरफ फैले हैं और वह वैश्विक शांति स्थापित करने में पूरी तरह सक्षम है।

वहीं, मीम के दूसरे पैनल में 1975 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ के अभिनेता संजीव कुमार द्वारा निभाया गया अमर किरदार ‘ठाकुर’ नजर आता है, जिसके दोनों हाथ विलेन गब्बर सिंह ने बेरहमी से काट दिए थे। इस तस्वीर के ऊपर ईरान ने कैप्शन लिखा है—“असलियत में UN” (UN in reality)। इस तुलना के माध्यम से ईरान ने सीधा और तीखा संदेश दिया कि असल संकट, युद्ध और महाशक्तियों के टकराव के समय संयुक्त राष्ट्र बिना हाथ वाले उस ठाकुर की तरह है, जो सब कुछ अपनी आंखों के सामने घटते हुए तो देखता है लेकिन कुछ करने में पूरी तरह असमर्थ और लाचार रहता है।

ईरान के विदेश मंत्री की बैठक और यूएन की कथित बेबसी पर फूटा गुस्सा

यह व्यंग्यात्मक मीम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की थी। तेहरान लंबे समय से इस बात को लेकर नाराजगी जता रहा है कि संयुक्त राष्ट्र अमेरिका और इजरायल द्वारा यूएन चार्टर के कथित उल्लंघनों और मध्य पूर्व में हमलों पर केवल औपचारिक बयानबाजी करता है, लेकिन ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रहता है।

ईरान का आरोप है कि जब छोटे या विकासशील देशों पर कोई बात आती है तो अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं बहुत तेजी से सक्रिय हो जाती हैं, लेकिन जब अमेरिका जैसी महाशक्तियां सैन्य दबाव बनाती हैं, तो यह वैश्विक संगठन पूरी तरह पंगु नजर आने लगता है। यही हताशा और आक्रोश भारतीय पॉप-कल्चर का सहारा लेकर एक कूटनीतिक चुटकी के रूप में बाहर आया।

सोशल मीडिया पर ईरान की ‘मीम डिप्लोमेसी’, यूजर्स बोले- इससे सटीक कुछ नहीं

यह पहला मौका नहीं है जब ईरान ने अपनी बात रखने के लिए भारतीय सिनेमा का सहारा लिया हो। इससे पहले भी ईरानी दूतावासों ने अक्षय कुमार की कॉमेडी फिल्म के सीन और तेलुगु फिल्म ‘बाहुबली’ व ‘भगवंत केसरी’ के क्लिप्स का इस्तेमाल कर अमेरिकी बयानों पर तंज कसे थे। कूटनीति की भाषा में इसे अब ‘मीम डिप्लोमेसी’ कहा जा रहा है, जहां भारी-भरकम प्रेस रिलीज के बजाय ऐसे हास्यप्रद मीम्स से लाखों लोगों तक अपना नैरेटिव पहुंचाया जाता है।

सोशल मीडिया पर भारतीय और अंतरराष्ट्रीय यूजर्स इस पोस्ट पर तरह-तरह की मजेदार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “ईरान ने गब्बर का नाम लिए बिना ही बता दिया कि असल में ‘ये हाथ मुझे दे दे ठाकुर’ किसने किया है।” वहीं दूसरे यूजर ने टिप्पणी की, “यूएन वाकई उस बूढ़े दादाजी की तरह है जिसकी मौजूदगी अच्छी तो लगती है, लेकिन जब घर में झगड़ा हो तो वह कुछ नहीं कर पाता।” इस तरह के अनोखे व्यंग्य ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आज के दौर में इंटरनेट कल्चर और सिनेमाई किरदारों का प्रभाव सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति में भी असरदार हथियार बन चुका है।

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