
आसमान में 35 हजार फीट की ऊंचाई पर जब मौत और जिंदगी के बीच फासला महज चंद सेकंड का रह गया था, तब एक भारतीय पायलट के अदम्य साहस, फौलादी इरादों और पेशेवर सूझबूझ ने 180 बेकसूर मुसाफिरों को एक भयावह हवाई त्रासदी से बचा लिया। फ्लाईदुबई के अंतरराष्ट्रीय विमान में हुए जानलेवा ड्रामे के बाद जिस एक नाम की गूंज आज पूरी दुनिया के उड्डयन सेक्टर और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुनाई दे रही है, वह हैं भारतीय मूल के जांबाज कैप्टन स्मित मच्छार (Captain Smit Machhar)। जब विमान के कॉकपिट में उनका ही साथी को-पायलट मानसिक संतुलन खोकर विमान को जमीन पर क्रैश कराने की जिद पर अड़ गया था, तब कैप्टन स्मित मच्छार ने लहूलुहान होकर भी कंट्रोल नहीं छोड़ा और 9/11 जैसे संभावित आत्मघाती हमले को नाकाम कर देश का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।
पूरी दुनिया आज भारत के इस वीर सपूत की बहादुरी को सलाम कर रही है। विमानन सुरक्षा विश्लेषक इसे इतिहास के सबसे साहसिक और जटिल हवाई बचाव अभियानों में से एक मान रहे हैं।
कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छार? भारत की माटी से वैश्विक आसमान तक का सफर
कैप्टन स्मित मच्छार मूल रूप से भारत के रहने वाले एक बेहद अनुभवी, अनुशासित और शांतचित्त कमर्शियल पायलट हैं। बचपन से ही आसमान में उड़ान भरने का सपना देखने वाले स्मित ने भारत के प्रतिष्ठित फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थानों से अपनी बुनियादी पायलट ट्रेनिंग पूरी की। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रकार के वाणिज्यिक यात्री विमानों, विशेष रूप से बोइंग 737 श्रृंखला के एयरक्राफ्ट को उड़ाने में विशेषज्ञता और टाइप रेटिंग हासिल की।
अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस में अपनी सेवाएं देने से पहले स्मित मच्छार ने हजारों घंटों की सुरक्षित उड़ान (Flying Hours) का शानदार रिकॉर्ड कायम किया था। अपने शांत स्वभाव, संकट प्रबंधन में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और तकनीकी दक्षता के चलते वे अपने सहयोगियों और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हमेशा बेहद सम्मानित माने जाते रहे हैं। फ्लाईदुबई में एक सीनियर कमांडर और कैप्टन के रूप में वे लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय रूटों पर सेवाएं दे रहे थे।
35,000 फीट पर कॉकपिट में क्या हुआ था? जब स्मित के सामने आया साक्षात काल
यह खौफनाक घटना तब घटी जब फ्लाईदुबई का बोइंग 737 विमान 180 यात्रियों को लेकर अपने सामान्य क्रूजिंग स्तर पर उड़ रहा था। उसी दौरान अचानक को-पायलट गंभीर मानसिक अवसाद और साइकोटिक ब्रेकडाउन का शिकार हो गया। उसने चिल्लाते हुए ऑटोपायलट बंद कर दिया और थ्रॉटल को आगे धकेलकर विमान के नोज को तेजी से नीचे की ओर झुका दिया, ताकि विमान सीधे जमीन पर मौजूद घनी आबादी या संवेदनशील प्रतिष्ठान से टकराकर पूरी तरह तबाह हो जाए।
जैसे ही कैप्टन स्मित मच्छार ने अपने सहयोगी की यह जानलेवा हरकत भांपी, वे बिना एक पल गंवाए कंट्रोल व्हील पर झपट पड़े। इसके बाद कॉकपिट के संकरे दायरे में दोनों के बीच जिंदगी और मौत की खूनी जंग छिड़ गई। को-पायलट ने स्मित पर नुकीले औजार और घूंसों से अंधाधुंध वार करना शुरू कर दिया। हमले में स्मित का सिर, चेहरा और हाथ गंभीर रूप से कट गए और वे खून से लथपथ हो गए। असहनीय दर्द और बहते खून के बावजूद स्मित मच्छार ने एक हाथ से हमलावर को रोके रखा और दूसरे हाथ से विमान के योक (स्टीयरिंग) को सीधा खींचकर संतुलन बनाए रखा।
अदम्य साहस: लहूलुहान हालत में केबिन क्रू को किया अलर्ट और बचा ली 180 जानें
जब को-पायलट पूरी तरह अनियंत्रित होकर जान लेने पर आमादा हो गया, तो कैप्टन स्मित ने अपने होश नहीं खोए। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना कॉकपिट का इमरजेंसी इंटरकॉम ऑन किया और केबिन क्रू को गुप्त संकट कोड भेज दिया। कोड सुनते ही वरिष्ठ फ्लाइट अटेंडेंट्स और कुछ बहादुर मुसाफिरों ने इमरजेंसी पासकोड डालकर दरवाजा खोला और अंदर घुसकर हिंसक को-पायलट को दबोच लिया। उसे रस्सियों और सीटबेल्ट से बांधकर पीछे की सीट पर जकड़ दिया गया।
इसके बाद भी चुनौती खत्म नहीं हुई थी। अत्यधिक खून बहने की वजह से कैप्टन स्मित की आंखों के सामने अंधेरा छा रहा था, लेकिन 180 यात्रियों के भरोसे ने उनके हौसले को टूटने नहीं दिया। उन्होंने तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क साधा, आपातकाल घोषित किया और अकेले दम पर विमान को नजदीकी हवाई अड्डे के रनवे पर पूरी तरह सुरक्षित लैंड करा दिया। लैंडिंग होते ही जब यात्रियों को पता चला कि उनके कैप्टन ने किस तरह खून से सने हाथों से उनकी जिंदगी बचाई है, तो पूरी फ्लाइट में तालियों और आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
पूरी दुनिया कर रही है सलाम, वीरता पुरस्कार देने की उठी मांग
सुरक्षित लैंडिंग के तुरंत बाद कैप्टन स्मित मच्छार को अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद अब उनकी हालत पूरी तरह खतरे से बाहर है। अस्पताल के बिस्तर पर भी उनकी सादगी देखते ही बनती थी, जब उन्होंने कहा कि उन्होंने बस एक पायलट के रूप में अपनी ड्यूटी और देश के संस्कारों का पालन किया।
विमानन विशेषज्ञों, अंतरराष्ट्रीय पायलट एसोसिएशनों और सोशल मीडिया पर अब भारत सरकार से लेकर अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठनों तक मांग उठ रही है कि कैप्टन स्मित मच्छार को सर्वोच्च नागरिक और विमानन वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाए। प्रतिकूल परिस्थितियों में अपने प्राणों की आहुति देने से पीछे न हटने वाले कैप्टन स्मित मच्छार ने साबित कर दिया है कि भारतीय प्रतिभा और साहस का लोहा आज पूरी दुनिया क्यों मानती है।
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