
पश्चिम बंगाल की सबसे हाई-प्रोफाइल विधानसभा सीट नंदीग्राम में होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। पुराने आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत पाकर जेल से बाहर आए कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोला है। हल्दिया उप-सुधार गृह से रिहा होते ही मिलन प्रधान ने सवाल दागा कि जब शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम को अपनी ‘कर्मभूमि’ बताते हैं, तो फिर वे यहां के बेटे से इतना क्यों डरते हैं?
पूर्व मेदिनीपुर जिले के हल्दिया जेल के बाहर कांग्रेस और विपक्षी समर्थकों के भारी हुजूम के बीच प्रधान ने ऐलान किया कि वे बिना वक्त गंवाए सीधे चुनावी मैदान में उतरेंगे। उन्होंने दावा किया कि नंदीग्राम की जनता इस बार किसी ‘बाहरी’ को नहीं, बल्कि अपनी माटी के बेटे को विधानसभा भेजेगी।
आंखों पर पट्टी बांधी, होटल ले जाकर नाम वापस लेने का बनाया दबाव: प्रधान का सनसनीखेज आरोप
जेल से रिहा होने के बाद मीडिया से बातचीत में मिलन प्रधान ने अपनी गिरफ्तारी के दौरान पुलिस की कार्यशैली पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया:
“दिनभर चुनाव प्रचार करने के बाद जब मैं चांदीपुर में विश्राम कर रहा था, तभी सादे कपड़ों में आई पुलिस ने मुझे जबरन उठा लिया। गाड़ी में मेरी आंखों पर गमछा बांध दिया गया ताकि मुझे रास्ता न दिखे। मुझे मंदारमनी के एक होटल में ले जाया गया और वहां आंखों पर पट्टी बांधकर ही कमरे में बिठाया गया। वहां कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद थे। मुझसे सीधे कहा गया—’आपको जो चाहिए बताइए, कल सुबह तक मिल जाएगा, बस अपनी उम्मीदवारी वापस ले लीजिए’। मैंने साफ कह दिया कि मैं विचारधारा की राजनीति करता हूं और किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटूंगा।””
प्रधान ने कहा कि जब वे किसी प्रलोभन या दबाव में नहीं आए, तो 2007 के पुराने और आधारहीन मामलों की आड़ लेकर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
‘नंदीग्राम छोड़ चुके हैं शुभेंदु, भाजपा ने बाहरी को उतारा मैदान में’
कांग्रेस उम्मीदवार ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के विकास के दावों की भी जमकर हवा निकाली। उन्होंने आरोप लगाया कि नंदीग्राम में कंक्रीट की कुछ सड़कों के अलावा पिछले वर्षों में कोई बुनियादी काम नहीं हुआ है। आज भी यहां के लोग पीने के पानी के लिए तालाबों पर निर्भर हैं।
उन्होंने सवाल किया कि यहां उपचुनाव की नौबत क्यों आई? क्योंकि शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम सीट छोड़कर चले गए। भाजपा उम्मीदवार हसीरानी रथ के चयन पर तंज कसते हुए प्रधान ने कहा, “हसीरानी एक मां हैं और हम मातृशक्ति का सम्मान करते हैं। लेकिन भाजपा ने नंदीग्राम में किसी बाहरी व्यक्ति को मैदान में क्यों उतारा? क्या नंदीग्राम का कोई बेटा या बेटी टिकट का हकदार नहीं था?”
कलकत्ता हाईकोर्ट से मिली अंतरिम जमानत, राज्य सरकार की दलीलें खारिज
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के तुरंत बाद कांग्रेस और विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सोशल मीडिया पर गिरफ्तारी की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या बताया था।
मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने सवाल किया था कि जब 2021 से पुराने वारंट लंबित थे, तो नामांकन के तुरंत बाद ही कार्रवाई क्यों की गई? हाईकोर्ट ने प्रधान को सभी 6 मामलों में अंतरिम जमानत मंजूर करते हुए निष्पक्ष तरीके से चुनाव प्रचार करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया।
6 अक्टूबर को मतदान, नंदीग्राम में आर-पार की जंग
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए 6 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।
नंदीग्राम में ममता बनर्जी खेमे द्वारा कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने और टीएमसी की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने के बाद मुकाबला सीधा और बेहद दिलचस्प हो चुका है। एक तरफ जहां भाजपा अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, वहीं जेल से रिहा होकर लौटे मिलन प्रधान के तीखे तेवरों ने मुकाबले को पूरी तरह त्रिकोणीय से आमने-सामने की जंग में तब्दील कर दिया है।
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