
रिवाल्वर, पिस्टल और राइफल: चुनावी हलफनामे में दर्ज है हथियारों का शौक
प्रोफेसर रामगोपाल यादव के पास वैध असलहों का अच्छा-खासा संग्रह है। उनके द्वारा दाखिल किए जाने वाले संपत्ति और आपराधिक ब्योरे के हलफनामों के अनुसार, वे कई आधुनिक व पारंपरिक हथियारों के लाइसेंसधारक हैं। उनके पास एक एनपी बोर रिवाल्वर, एक राइफल और एक विदेशी पिस्टल जैसे लाइसेंसी असलहे दर्ज रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह बात जगजाहिर है कि उन्हें निशानेबाजी और सुरक्षात्मक हथियारों को सहेजने का शौक दशकों पुराना है। वे अपने हर चुनावी नामांकन के दौरान चुनाव आयोग के समक्ष अपने इन सभी कानूनी हथियारों और उनके कारतूसों का पूरा विधिवत ब्योरा पारदर्शी तरीके से पेश करते रहे हैं।
कॉलेज के प्रोफेसर से राजनीति के चाणक्य: मुलायम सिंह यादव ऐसे लेकर आए थे मुख्यधारा में
रामगोपाल यादव का शुरुआती जीवन किताबों, अध्यापन और अकादमिक जगत के बीच बीता। उन्होंने आगरा और कानपुर विश्वविद्यालय से भौतिक विज्ञान और राजनीति विज्ञान में उच्च शिक्षा हासिल की और बाद में इटावा के के.के. कॉलेज में राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष (प्रोफेसर) के पद पर लंबे समय तक अध्यापन कार्य किया। कॉलेज में रहते हुए उन्होंने शिक्षक संघ और स्थानीय स्तर पर अपनी संगठनात्मक क्षमता का लोहा मनवाया।
उनकी बौद्धिक क्षमता, तार्किक विश्लेषण और कानून की गहरी समझ को सबसे पहले उनके चचेरे भाई और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव (नेताजी) ने पहचाना। नेताजी उन्हें 1980 के दशक के उत्तरार्ध में सक्रिय राजनीति में लेकर आए। शुरुआत में उन्होंने इटावा जिला परिषद के अध्यक्ष पद का चुनाव जीता और स्थानीय राजनीति की जमीन तैयार की। इसके बाद जब 1992 में समाजवादी पार्टी की स्थापना हुई, तो पार्टी के संविधान निर्माण, चुनाव आयोग से जुड़े दस्तावेजों और कानूनी रणनीतियों की पूरी जिम्मेदारी नेताजी ने प्रो. रामगोपाल यादव के कंधों पर ही सौंपी।
संसद के उच्च सदन में सपा की सबसे बुलंद आवाज
साल 1992 में पहली बार राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद प्रो. रामगोपाल यादव ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे कई बार राज्यसभा और एक बार संभल लोकसभा सीट से सांसद चुने जा चुके हैं। राज्यसभा में नियम-कायदों की समझ और संविधान की सटीक व्याख्या के लिए वे पक्ष और विपक्ष दोनों खेमों में बेहद सम्मानित माने जाते हैं। कठिन से कठिन राजनीतिक संकट चाहे 2017 में पार्टी के भीतर का अंदरूनी शक्ति संघर्ष रहा हो या फिर चुनाव आयोग में पार्टी सिंबल की जंग प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने हमेशा अखिलेश यादव के राजनीतिक ढाल के रूप में आगे आकर पार्टी को बिखरने से बचाया। यही कारण है कि राज्यसभा चुनाव में पार्टी जब भी अपने सबसे भरोसेमंद चेहरे को उच्च सदन भेजने का फैसला करती है, तो प्रो. रामगोपाल यादव की उम्मीदवारी पहली प्राथमिकता बन जाती है।
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