‘झोला उठाने का समय आ गया’: दवा की कीमतों और कैंसर इलाज के खर्च को लेकर केंद्र पर बरसी कांग्रेस; पूछे तीखे सवाल

देशभर में जीवनरक्षक दवाओं की बढ़ती कीमतों और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के महंगे इलाज को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर तीखे सवाल दागते हुए आरोप लगाया कि सरकार की कथित जनविरोधी नीतियों के कारण आम मरीजों पर महंगी दवाओं का भारी बोझ पड़ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयान का हवाला देते हुए रमेश ने तंज कसा कि अगर सरकार मरीजों को राहत नहीं दे सकती, तो प्रधानमंत्री के ‘झोला उठाकर जाने का समय’ बहुत जल्दी आ रहा है।

‘नीरो की तरह बंसी बजाने में व्यस्त हैं प्रधानमंत्री’: कांग्रेस

जयराम रमेश ने अपने आधिकारिक बयान में स्वास्थ्य क्षेत्र में कथित मुनाफाखोरी और सरकार की निष्क्रियता पर निशाना साधा:

  • नीरो से तुलना: उन्होंने आरोप लगाया, “मोदी सरकार की नीतियों के कारण देशभर में मरीजों पर महंगी दवाओं की मार पड़ रही है, लेकिन प्रधानमंत्री नीरो की तरह अपनी अलग ही डफली बजाने में व्यस्त हैं।”

  • दवाओं के नाम पर अंधाधुंध वसूली: कांग्रेस ने दावा किया कि कई जरूरी इंजेक्शनों और दवाओं की वास्तविक उत्पादन लागत की तुलना में मरीजों से 60 से 67 गुना तक अधिक कीमत वसूली जा रही है, जिससे मध्यम और गरीब वर्ग के परिवारों की जीवनभर की बचत इलाज में लुट रही है।

जब कानून में रास्ता है, तो सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने में देरी क्यों?

कांग्रेस ने पेटेंट और दवा मूल्य नियंत्रण व्यवस्था से जुड़े कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए सरकार से जवाब मांगा:

  • कानूनी प्रावधानों की अनदेखी: रमेश ने कहा कि जब भारतीय पेटेंट कानून और जनस्वास्थ्य नियमों में अनिवार्य लाइसेंसिंग (Compulsory Licensing) और आपातकालीन मूल्य सीमा तय करने के स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं, तो सरकार विदेशी और बड़ी फार्मा कंपनियों के सामने लाचार क्यों बनी हुई है?

  • अदालती टिप्पणियों का जिक्र: उन्होंने सवाल उठाया कि जब अदालतों ने भी जीवनरक्षक दवाओं को आमजन की पहुंच में लाने के रास्ते स्पष्ट किए हैं, तब भी कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाएं आम मरीजों की पहुंच से बाहर क्यों हैं?

  • सीधा सवाल: “प्रधानमंत्री जी, देश के गरीब और बेबस मरीजों के लिए सस्ती और सुलभ दवा कब सुनिश्चित होगी? नहीं तो जैसा आपने स्वयं कहा था कि ‘झोला उठाने का समय’ जल्दी आ रहा है।”

स्वास्थ्य खर्च से गरीबी रेखा के नीचे जा रहे परिवार

कांग्रेस नेताओं ने इस बात पर चिंता जताई कि भारत में आउट-ऑफ-पॉकेट एक्सपेंडिचर (जेब से होने वाला स्वास्थ्य खर्च) आज भी मरीजों की कमर तोड़ रहा है। कैंसर, किडनी रोग, हृदय रोग और ऑटोइम्यून डिसऑर्डर की आधुनिक दवाएं इतनी महंगी हैं कि एक सामान्य परिवार उनके खर्च से कर्ज के जाल में फंस जाता है।

पार्टी ने मांग की कि नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) के दायरे में सभी जीवनरक्षक और ऑन्कोलॉजी (कैंसर) दवाओं को तुरंत लाया जाए और उन पर लगाई जा रही अत्यधिक प्रॉफिट मार्जिन पर सख्त कैपिंग की जाए।

दवाओं के मुद्दे पर कांग्रेस के इस ताजा हमले के बाद स्वास्थ्य नीति और फार्मा मूल्य नियंत्रण पर केंद्र सरकार की भावी प्रतिक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

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