‘CM सर, शूटिंग मोड से बाहर निकलिए’: थलपति विजय का स्टालिन सरकार पर तीखा हमला

तमिल सिनेमा के शीर्ष सुपरस्टार और ‘तमिलागा वेत्री कड़गम’ (TVK) के अध्यक्ष थलपति विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) सरकार के खिलाफ अब तक का सबसे आक्रामक सियासी रुख अख्तियार कर लिया है। राज्य में लगातार बिगड़ती कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा में चूक, युवाओं के बीच ड्रग्स के बढ़ते खतरे और चेन्नई के मरीना बीच पर वायुसेना के एयर शो के दौरान हुई प्रशासनिक बदइंतजामी को लेकर विजय ने मुख्यमंत्री पर सीधा तंज कसा। विजय ने सख्त लहजे में कहा कि “मुख्यमंत्री महोदय, अब अपने प्रचार और शूटिंग मोड से बाहर निकलिए और जमीनी हकीकत का सामना कीजिए।” सुपरस्टार से राजनेता बने विजय का यह तीखा बयान सोशल मीडिया से लेकर राज्य के राजनीतिक हलकों में आग की तरह फैल गया है, जिसने राज्य की सत्ताधारी पार्टी को कड़ा जवाब देने पर मजबूर कर दिया है।

‘रील लाइफ’ बनाम ‘रियल गवर्नेंस’: किन मुद्दों पर थलपति विजय ने डीएमके को कठघरे में खड़ा किया?

थलपति विजय का मुख्य आरोप यह है कि राज्य सरकार वास्तविक समस्याओं को सुलझाने के बजाय केवल जनसंपर्क (PR), सोशल मीडिया रील और फोटो-ऑप्स के जरिए अपनी छवि चमकाने में व्यस्त है।

  • चेन्नई एयर शो में भीषण कुप्रबंधन: मरीना बीच पर आयोजित एयर शो के दौरान भीषण गर्मी, पानी की कमी और ट्रैफिक जाम के चलते पांच लोगों की मौत और सैकड़ों के बेहोश होने की घटना को विजय ने सीधे तौर पर प्रशासनिक असंवेदनशीलता करार दिया।

  • युवाओं में ड्रग्स का जानलेवा जाल: टीवीके प्रमुख ने आरोप लगाया कि राज्य के स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण इलाकों तक सिंथेटिक ड्रग्स और गांजे का नेटवर्क फैल चुका है, जिसे रोकने में पुलिस और खुफिया तंत्र पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।

  • महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध: राज्य में महिलाओं और स्कूली छात्राओं के खिलाफ हो रहे यौन उत्पीड़न और हिंसक अपराधों की घटनाओं का हवाला देते हुए विजय ने कहा कि राज्य का गृह विभाग (जो स्वयं मुख्यमंत्री के पास है) सिर्फ औपचारिक बयानबाजी तक सीमित रह गया है, जबकि जमीनी स्तर पर अपराधियों में कानून का कोई खौफ नहीं बचा।

डीएमके का पलटवार: ‘सिनेमाई संवादों से जमीनी राजनीति नहीं सीखी जा सकती’

थलपति विजय के इस तीखे वार के बाद सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के मंत्रियों और प्रवक्ताओं ने भी तुरंत मोर्चा खोल दिया। डीएमके के वरिष्ठ नेताओं ने विजय पर पलटवार करते हुए कहा कि फिल्मों में लिखे-लिखाए डायलॉग बोलना और असल जिंदगी में करोड़ों लोगों का प्रशासन चलाना दो बिल्कुल अलग चीजें हैं। पार्टी प्रवक्ताओं ने तंज कसा कि विजय खुद फिल्मों के सेट से सीधे राजनीति में छलांग लगा रहे हैं और वे जमीनी हकीकत व द्रविड़ मॉडल की कल्याणकारी योजनाओं की सफलता को समझे बिना केवल हेडलाइंस बटोरने के लिए सनसनीखेज बयान दे रहे हैं। उप-मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के समर्थकों ने भी यह दलील दी कि तमिलनाडु आज देश के सबसे विकसित और औद्योगिक राज्यों में शुमार है, और विपक्ष हताशा के चलते प्रशासनिक त्रुटियों का राजनीतिकरण कर रहा है।

तमिलागा वेत्री कड़गम (TVK) का राजनीतिक उभार: क्या डीएमके और अन्नाद्रमुक के लिए बज गई खतरे की घंटी?

थलपति विजय की राजनीतिक पार्टी ‘तमिलागा वेत्री कड़गम’ के औपचारिक गठन और उनकी पहली ऐतिहासिक जनसभा के बाद से ही तमिलनाडु की राजनीति में तीसरे ध्रुव की हलचल तेज हो गई है। राज्य में दशकों से डीएमके और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के बीच ही सत्ता का सीधा मुकाबला रहा है। लेकिन विजय के पास राज्य के कोने-कोने में युवाओं, महिलाओं और पहली बार वोट करने वाले मतदाताओं की एक विशाल और समर्पित फैन फॉलोइंग है। विजय ने अपनी पार्टी की विचारधारा को ‘सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और वैज्ञानिक सोच’ पर आधारित बताया है, जो सीधे तौर पर डीएमके के पारंपरिक कोर वोट बैंक में सेंध लगाने का दम रखती है। स्टालिन सरकार पर लगातार तीखे हमले कर विजय यह साबित करने में जुटे हैं कि वे सिर्फ प्रतीकात्मक राजनीति करने नहीं आए हैं, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनाव में सीधे सत्ता परिवर्तन की लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में हैं।

2026 विधानसभा चुनाव की बिसात पर गहराता सियासी घमासान

‘शूटिंग मोड’ वाले इस बयान ने साफ कर दिया है कि तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनाव केवल पारंपरिक दलों की औपचारिक लड़ाई नहीं होंगे। एक तरफ मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन अपने ‘द्रविड़ मॉडल’ और कल्याणकारी योजनाओं के दम पर सत्ता में दोबारा वापसी का दावा कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ थलपति विजय खुद को भ्रष्टाचार-मुक्त, युवा केंद्रित और निर्भीक जननायक के रूप में पेश कर रहे हैं। भाजपा और अन्नाद्रमुक भी इस नए राजनीतिक समीकरण पर बेहद बारीकी से नजर गड़ाए हुए हैं। विजय द्वारा उठाया गया हर सवाल और डीएमके का हर पलटवार यह साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु की धरती पर सिनेमाई रसूख और सत्ताधारी सियासत के बीच यह टकराव और अधिक उग्र रूप धारण करने वाला है।

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