
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सरकार के मुखिया के रूप में अपने 25 वर्ष पूरे करने के अवसर पर दिल्ली के श्री विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना और शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया। इसी वीडियो को आधार बनाकर राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता सौरव दास ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर को टैग करते हुए एक पोस्ट साझा की। वीडियो के बहाने उन्होंने प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करने के लिए थरूर की पुरानी टिप्पणियों को हवा देने की कोशिश की। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर शुरू हुआ यह संवाद देखते ही देखते वायरल हो गया, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता को एक विवादित मुद्दे पर खींचने का प्रयास दिखाई दे रहा था।
थरूर की ही क्लिष्ट अंग्रेजी शैली में घेराबंदी: सौरव दास ने क्या लिखा था?
सौरव दास ने इस क्लिप को साझा करते हुए जानबूझकर शशि थरूर की प्रसिद्ध और क्लिष्ट अंग्रेजी शब्दावली का अनुकरण किया। उन्होंने थरूर को संबोधित करते हुए लिखा कि इस वीडियो को देखकर उन्हें डॉ. थरूर की एक पुरानी और जबरदस्त टिप्पणी की याद आ गई है। दास ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा कि क्या थरूर अपनी वाक्पटुता पर बिना कोई अनुचित दबाव महसूस किए उस अनिर्वचनीय और आनंददायक टिप्पणी को दोबारा दोहराने का कष्ट करेंगे? दास का यह कदम स्पष्ट रूप से थरूर को उकसाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक पुराना और तीखा राजनीतिक विवाद दोबारा जिंदा करने की मंशा से प्रेरित प्रतीत हो रहा था।
जब शशि थरूर ने एक ही लाइन में फेर दिया पूरे मंसूबे पर पानी
विवादों में घसीटे जाने की इस कोशिश को कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बेहद सहजता और कूटनीतिक हाजिरजवाबी से नाकाम कर दिया। थरूर ने बिना किसी उत्तेजना के सीधा और स्पष्ट जवाब देते हुए लिखा, “यदि मुझे जरा भी अंदाजा होता कि आप किस बारे में बात कर रहे हैं, तो मुझे बिल्कुल ऐतराज नहीं होता! कृपया मुझे भी बताएं कि आपका इशारा किस तरफ है।” थरूर के इस संक्षिप्त और बेफिक्र जवाब ने पूरे नैरेटिव की हवा निकाल दी। उन्होंने खुद को किसी भी तरह के राजनीतिक बखेड़े से पूरी तरह अलग रखते हुए गेंद वापस सौरव दास के पाले में डाल दी, जिससे उकसावे की यह पूरी रणनीति धरी की धरी रह गई।
2018 की विवादित टिप्पणी और सोशल मीडिया पर एआई का विश्लेषण
हालांकि सौरव दास ने अपनी पोस्ट में किसी टिप्पणी का सीधा नाम नहीं लिया था, लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स और एआई टूल्स ने तुरंत भांप लिया कि उनका इशारा 2018 में थरूर द्वारा दिए गए एक पुराने बयान की तरफ था। उस दौरान थरूर ने एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में आरएसएस से जुड़े एक पुराने संदर्भ का हवाला देते हुए शिवलिंग और बिच्छू वाला रूपक इस्तेमाल किया था, जिस पर भाजपा ने उस समय तीखा विरोध दर्ज कराया था और काफी कानूनी व राजनीतिक हंगामा हुआ था। सौरव दास संभवतः उसी विवाद को वर्तमान संदर्भ में फिर से खड़ा करना चाहते थे, लेकिन थरूर के चतुराई भरे ‘अनजान’ बनने के अंदाज ने मामले को वहीं शांत कर दिया।
राजनीतिक परिपक्वता और डिजिटल जाल से बचने का सधा हुआ कूटनीतिक संदेश
शशि थरूर का यह जवाबी रुख यह दर्शाता है कि डिजिटल दौर में जब राजनेताओं को सनसनीखेज बयानों में फंसाने की कोशिशें आम हो चुकी हैं, तब संयम और वाक-चातुर्य सबसे बड़ा रक्षा-कवच साबित होता है। राहुल गांधी और कांग्रेस द्वारा संसद से लेकर सड़क तक चलाए जा रहे मौजूदा राजनीतिक विरोध के बीच, थरूर ने किसी भी अनावश्यक और अप्रसांगिक व्यक्तिगत विवाद को जन्म देने से खुद को दूर रखा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं को इस बात का भली-भांति अहसास है कि सोशल मीडिया पर कौन सी बहस वास्तविक मुद्दों से जुड़ी है और कौन सी महज बिना वजह हेडलाइंस बटोरने का छलावा।
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