चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में जारी भारी उठापटक के बीच एक बड़ा प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है। राज्य सरकार की अदालतों में पैरवी करने वाले एडवोकेट जनरल पी.एस. रमन सहित 100 से अधिक विधि अधिकारियों (Law Officers) ने एक साथ अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। पश्चिम बंगाल में हुए हालिया सत्ता परिवर्तन और वहां अधिकारियों के इस्तीफे की झड़ी के बाद अब तमिलनाडु में भी वैसी ही स्थिति देखने को मिल रही है।
सत्ता परिवर्तन की आहट और इस्तीफों का दौर
तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच इन इस्तीफों को बेहद अहम माना जा रहा है। दरअसल, सरकारी वकीलों और विधि अधिकारियों की नियुक्तियां राजनीतिक आधार पर की जाती हैं। लोकतांत्रिक परंपरा रही है कि जब भी राज्य में सत्ता बदलती है या नई सरकार के आने की संभावना होती है, तो पिछली सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी नैतिक आधार पर पद छोड़ देते हैं। इससे नई सरकार को अपनी पसंद के विशेषज्ञों और वकीलों की टीम चुनने का मौका मिलता है।
फिलहाल पद पर बने रहेंगे अधिकारी, नहीं रुकेगा अदालती काम
भले ही 100 से अधिक अधिकारियों ने इस्तीफा सौंप दिया है, लेकिन उन्हें अगले एक सप्ताह तक पद पर बने रहने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अदालतों में राज्य सरकार का पक्ष रखने के लिए कोई न कोई मौजूद रहे और न्यायिक प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। आमतौर पर नई सरकार तीन-चार वकीलों की अंतरिम नियुक्ति करती है, लेकिन अभिनेता विजय की पार्टी (TVK) की सरकार बनने की चर्चाओं और राजनीतिक सस्पेंस के कारण अभी तक कोई नई नियुक्ति नहीं हो पाई है।
नई सरकार की नियुक्तियों पर टिकी नजरें
एक वरिष्ठ विधि अधिकारी के मुताबिक, “राज्य का प्रतिनिधित्व अदालत में शून्य नहीं हो सकता, इसलिए हम तब तक अपनी सेवाएं देंगे जब तक नई टीम की घोषणा नहीं हो जाती।” नियम के अनुसार, जैसे ही नई सरकार शपथ लेगी, वह अपनी विचारधारा और पार्टी से जुड़े अनुभवी वकीलों को इन महत्वपूर्ण पदों पर तैनात करेगी। वर्तमान में तमिलनाडु सरकार की ओर से पैरवी करने वाली यह विशाल टीम अब नई सरकार के आधिकारिक स्वरूप का इंतजार कर रही है।
बंगाल से तुलना: राजनीतिक बदलाव का असर
बता दें कि कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह का घटनाक्रम देखा गया था, जहां तृणमूल कांग्रेस के सत्ता से बाहर होने और भाजपा की नई सरकार आने के बाद कई अधिकारियों ने इस्तीफा दिया था। तमिलनाडु में भी अब वैसा ही प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल रहा है, जो राज्य की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत दे रहा है।
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