
देश की राजधानी नई दिल्ली से एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जगत प्रकाश नड्डा (जेपी नड्डा) को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में भर्ती कराया गया है। गुरुवार, 13 अगस्त की देर शाम उन्हें सीने में असहजता और बेचैनी की शिकायत महसूस हुई थी, जिसके बाद एहतियातन उन्हें तुरंत एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग ले जाया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के अस्पताल में भर्ती होने की सूचना मिलते ही राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए दुआओं का दौर शुरू हो गया। स्थिति की गंभीरता और अटकलों को विराम देते हुए एम्स प्रशासन ने शुक्रवार, 14 अगस्त को एक आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन जारी कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर विस्तृत जानकारी साझा की है।
एम्स ने जारी किया आधिकारिक बयान: हालत स्थिर, एंजियोग्राफी की गई
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली के मीडिया एवं प्रोटोकॉल डिविजन की ओर से जारी किए गए आधिकारिक बयान में बताया गया कि 65 वर्षीय केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को बेचैनी की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया था। एम्स के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों की देखरेख में उनके स्वास्थ्य का गहन परीक्षण किया गया। 13 अगस्त की शाम को ही उनकी प्राथमिक जांचों के साथ-साथ कोरोनरी एंजियोग्राफी (Coronary Angiography) भी सफलतापूर्वक संपन्न की गई।
एम्स के आधिकारिक हेल्थ बुलेटिन में स्पष्ट रूप से कहा गया है, “केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की 13 अगस्त 2026 की शाम को बेचैनी की शिकायत के बाद जांच की गई, जिसमें कोरोनरी एंजियोग्राफी भी शामिल थी। वह फिलहाल पूरी तरह स्थिर हैं और उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी के लिए एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग में ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।” डॉक्टरों के अनुसार उनके सभी वाइटल पैरामीटर्स (रक्तचाप, पल्स रेट और ऑक्सीजन स्तर) सामान्य पाए गए हैं और घबराने जैसी कोई बात नहीं है।
क्या होती है कोरोनरी एंजियोग्राफी और क्यों की गई यह जांच?
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, कोरोनरी एंजियोग्राफी दिल की रक्त नलिकाओं (Coronary Arteries) की स्थिति का सटीक मूल्यांकन करने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण डायग्नोस्टिक प्रक्रिया है। जब किसी मरीज को सीने में भारीपन, असामान्य दबाव, सांस लेने में तकलीफ या बेचैनी की शिकायत होती है, तो हृदय रोग विशेषज्ञ यह जांच करने की सलाह देते हैं। इस प्रक्रिया के तहत कलाई (रेडियल आर्टरी) या कमर (फेमोरल आर्टरी) के रास्ते एक बहुत पतली और लचीली कैथेटर ट्यूब को रक्त वाहिका के जरिए हृदय तक पहुंचाया जाता है।
इसके बाद उस कैथेटर के जरिए एक विशेष आयोडीन युक्त कंट्रास्ट डाई इंजेक्ट की जाती है और अत्याधुनिक एक्स-रे मशीनों (फ्लोरोस्कोपी) की मदद से स्क्रीन पर हृदय की धमनियों के रियल-टाइम वीडियो और चित्र लिए जाते हैं। इससे डॉक्टरों को यह साफ पता चल जाता है कि हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली किसी धमनी में कोई रुकावट (ब्लॉकेज) या संकुचन तो नहीं है। जेपी नड्डा के मामले में भी किसी भी संभावित हृदय संबंधी जोखिम को पहले ही चरण में पकड़ने और उपचार की दिशा तय करने के लिए यह जांच कराई गई, जिसके परिणाम संतोषजनक बताए जा रहे हैं।
अस्पताल में भर्ती होने से पहले का व्यस्त दिनचर्या और राष्ट्रव्यापी दायित्व
जेपी नड्डा केंद्र सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण जैसा अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील मंत्रालय संभाल रहे हैं। संसद के मानसून सत्र और मंत्रालय की लगातार चलने वाली बैठकों के कारण उनका कार्य-शेड्यूल काफी व्यस्त चल रहा था। अस्पताल में भर्ती होने से ठीक पहले बुधवार को उन्होंने झारखंड और ओडिशा के सांसदों के साथ ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ (TB Mukt Bharat Abhiyaan) की प्रगति को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की थी।
इस बैठक के दौरान उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर जाकर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता परखने और शत-प्रतिशत स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने का आह्वान किया था। इसके अलावा वे 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर भी पूरी तरह सक्रिय रहे और उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से 1947 के विभाजन में अपनी जान गंवाने वाले लाखों निर्दोषों और विस्थापित परिवारों के त्याग को नमन किया था। दिन-रात के इस अत्यधिक कार्यभार और शारीरिक भागदौड़ के चलते उन्हें शाम के समय थकान और अस्वस्थता महसूस हुई, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने और अस्पताल में एडमिट होने की सलाह दी।
शीर्ष नेताओं और मुख्यमंत्रियों ने की शीघ्र स्वस्थ होने की कामना
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के एम्स में भर्ती होने की सूचना मिलते ही भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों, केंद्रीय मंत्रियों, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं ने उनके उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना की है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आदरणीय केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा जी के अस्वस्थ होने का समाचार प्राप्त हुआ, बाबा केदारनाथ से उनके शीघ्र और पूर्ण स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करता हूं।
उत्तर प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने एम्स के निदेशक और डॉक्टरों की टीम से संपर्क कर उनके स्वास्थ्य का लगातार अपडेट लिया है। कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सोशल मीडिया पर उनके दीर्घायु और जल्द काम पर लौटने के संदेश साझा किए हैं।
छात्र राजनीति से लेकर राष्ट्रीय फलक तक का बेमिसाल सफर
मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से ताल्लुक रखने वाले और 2 दिसंबर 1960 को पटना में जन्मे जगत प्रकाश नड्डा का राजनीतिक जीवन छात्र आंदोलन से शुरू होकर भारतीय जनता पार्टी के सर्वोच्च पद तक पहुंचा है। पटना विश्वविद्यालय से बीए और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के दौरान वे जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन में सक्रिय रहे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राष्ट्रीय सचिव और बाद में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में तीन बार विधायक, नेता प्रतिपक्ष और राज्य सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहने के बाद वे 2012 में राज्यसभा के सदस्य बने। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल (2014-2019) में उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के रूप में ‘आयुष्मान भारत’ जैसी ऐतिहासिक स्वास्थ्य बीमा योजना को सफलतापूर्वक जमीन पर उतारा। इसके बाद जून 2019 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और जनवरी 2020 में निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। उनके कुशल संगठनात्मक नेतृत्व में भाजपा ने देश भर के कई राज्यों में ऐतिहासिक चुनावी जीत दर्ज की। 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद वे एक बार फिर केंद्रीय कैबिनेट में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के रूप में देश की सेवा कर रहे हैं।
डिस्चार्ज को लेकर क्या है डॉक्टरों की योजना?
एम्स सूत्रों के मुताबिक, कार्डियोलॉजी विभाग की सीनियर फैकल्टी लगातार उनके स्वास्थ्य सूचकांकों पर नजर बनाए हुए है। कोरोनरी एंजियोग्राफी के बाद सामान्य प्रोटोकॉल के तहत मरीज को 24 से 48 घंटे के लिए चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाता है ताकि किसी भी तरह की संभावित शारीरिक जटिलता से बचा जा सके।
अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि उनकी रिकवरी बहुत अच्छी है और वे सामान्य रूप से बातचीत कर रहे हैं। यदि सभी रूटीन रिपोर्ट्स पूरी तरह सामान्य बनी रहती हैं, तो विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें जल्द ही अस्पताल से छुट्टी देकर घर पर कुछ दिनों के लिए पूर्ण विश्राम की सलाह दी जा सकती है। स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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