जून में दिखेगा ‘प्लैनेट परेड’ का अद्भुत नजारा, एक कतार में चमकेंगे शुक्र, गुरु और बुध; जानें कब और कैसे देखें

नई दिल्ली। अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए जून 2026 का यह महीना बेहद रोमांचक साबित होने वाला है। इस महीने ब्रह्मांड में एक ऐसी अद्भुत और दुर्लभ घटना घटने जा रही है, जिसे देखने के लिए वैज्ञानिक और आम लोग हमेशा उत्सुक रहते हैं। आसमान में जल्द ही ‘प्लैनेट परेड’ (Planets Parade) यानी ग्रहों की एक अनोखी कतार दिखाई देने वाली है, जिसमें सौरमंडल के तीन प्रमुख ग्रह— शुक्र (Venus), गुरु (Jupiter) और बुध (Mercury)— एक साथ एक ही दिशा में जुगलबंदी करते नजर आएंगे।

यदि आप भी इस जादुई नजारे के गवाह बनना चाहते हैं, तो अपने कैलेंडर में तारीखें नोट कर लें। खगोलविदों के अनुसार, आगामी 11 जून से 15 जून 2026 के बीच इस खगोलीय घटना को सबसे साफ और स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। आइए जानते हैं कि इस नजारे को देखने का सबसे सही समय, दिशा और तरीका क्या है।

सूर्यास्त के बाद पश्चिम दिशा में सजेगी ग्रहों की महफिल

जानकारों के मुताबिक, इस प्लैनेट परेड को देखने का सबसे अच्छा समय सूर्यास्त के ठीक बाद का होगा। सूर्य छिपने के करीब आधे घंटे बाद जब आसमान में थोड़ा अंधेरा छाने लगेगा, तब पश्चिम दिशा (West Direction) में यह नजारा साफ होने लगेगा।

इस त्रिकोणीय मिलन में सबसे खास बात यह होगी कि शुक्र ग्रह अपनी पूरी भव्यता के साथ सबसे ज्यादा चमकता हुआ दिखाई देगा। ठीक उसके पास ही देवगुरु बृहस्पति (बृहस्पति) अपनी दिव्य चमक बिखेरते नजर आएंगे। वहीं, सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह बुध भी इसी कतार में थोड़ा नीचे या आसपास टिमटिमाते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा।

किसी दूरबीन की जरूरत नहीं, नंगी आंखों से दिखेगा ब्रह्मांड का चमत्कार

इस खूबसूरत नजारे का आनंद लेने के लिए आपको किसी महंगे वैज्ञानिक उपकरण, टेलीस्कोप या स्पेशल चश्मे की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर आपके इलाके में मौसम साफ रहता है और आसमान में बादल नहीं हैं, तो आप अपनी नंगी आंखों (Naked Eyes) से भी इस त्रिमूर्ति के दीदार कर सकते हैं।

जो लोग एस्ट्रोफोटोग्राफी के शौकीन हैं, उनके लिए यह एक सुनहरा मौका है। वे अच्छी क्वालिटी वाले मोबाइल फोन या डीएसएलआर कैमरे से इस अद्भुत दृश्य को कैद कर सकते हैं। हालांकि, यदि आपके पास सामान्य दूरबीन (Binoculars) है, तो इन ग्रहों की बनावट और उनके बीच की दूरी को और भी शानदार तरीके से देखा जा सकता है।

क्या होती है प्लैनेट परेड और इसके पीछे का विज्ञान?

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या सच में ग्रह एक-दूसरे के पास आ जाते हैं? तो आपको बता दें कि यह केवल पृथ्वी से दिखने वाला एक दृश्य भ्रम (Optical Illusion) होता है। अंतरिक्ष में सभी ग्रह सूर्य के चक्कर लगाते हुए अपनी-अपनी तय कक्षाओं (Orbits) में करोड़ों किलोमीटर की दूरी पर ही स्थित होते हैं।

परंतु, चक्कर काटते-काटते जब उनकी स्थिति ऐसी हो जाती है कि पृथ्वी से देखने पर वे आसमान के एक ही छोटे से हिस्से में एक लाइन या समूह में नजर आने लगते हैं, तो खगोल विज्ञान में इस घटना को ‘प्लैनेट परेड’ या ‘ग्रहों का संयोजन’ कहा जाता है।

शहर की चकाचौंध से दूर, यहां से दिखेगा सबसे साफ नजारा

अगर आप इस खगोलीय परेड का पूरा लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो ऐसी जगह का चुनाव करें जहां कृत्रिम रोशनी (Artificial Lights) कम से कम हो। शहरों में ऊंची इमारतों, फैक्ट्रियों और स्ट्रीट लाइट्स के प्रदूषण की वजह से आसमान धुंधला दिखाई देता है।

इस नजारे को सबसे बेहतरीन तरीके से देखने के लिए किसी खुले मैदान, घर की सबसे ऊंची छत, गांव के खुले इलाके या शहर से बाहरी छोर पर जाएं। ध्यान रहे कि जिस तरफ आप देख रहे हैं (यानी पश्चिम दिशा में), वहां सामने कोई बड़ा पेड़ या बहुमंजिला इमारत न हो, ताकि क्षितिज (Horizon) पूरी तरह साफ दिखाई दे। खगोलशास्त्रियों के लिए जून का यह दूसरा हफ्ता बेहद अहम है, क्योंकि ऐसी घटनाएं सालों में एकाध बार ही देखने को मिलती हैं।

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