नई दिल्ली: अंटार्कटिका जा रहे ‘MV होंडियस’ क्रूज शिप पर हुई रहस्यमयी मौतों ने एक ऐसे दुश्मन को दोबारा चर्चा में ला दिया है, जो दशकों से इंसानों के बीच मौजूद तो है, लेकिन अब अपने सबसे खतरनाक रूप ‘एंडीज स्ट्रेन’ (Andes Strain) में सामने आया है। चिकित्सा विज्ञान जहां कैंसर और कई लाइलाज बीमारियों पर विजय पा रहा है, वहीं हंता वायरस का यह स्ट्रेन आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है। इसका मृत्यु दर (Fatality Rate) चौंकाने वाला है—संक्रमित होने वाले हर दो में से एक व्यक्ति की जान जा सकती है।
एंडीज स्ट्रेन: हंता वायरस का सबसे ‘बागी’ रूप
हंता वायरस का इतिहास करीब 70 साल पुराना है, लेकिन इसका ‘एंडीज स्ट्रेन’ इसे दुनिया के अन्य वायरसों से अलग और ज्यादा खतरनाक बनाता है।
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इंसान से इंसान में फैलाव: आमतौर पर हंता वायरस चूहों से इंसानों में आता है। लेकिन 1996 में अर्जेंटीना में खोजा गया ‘एंडीज स्ट्रेन’ इस परिवार का इकलौता ऐसा वायरस है, जिसमें ह्यूमन-टू-ह्यूमन ट्रांसमिशन (इंसान से इंसान में फैलने) की क्षमता है।
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फेफड़ों पर सीधा प्रहार: यह स्ट्रेन ‘हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम’ (HPS) का कारण बनता है। इसमें मरीज के फेफड़ों में तरल पदार्थ (पानी) भर जाता है, जिससे सांस लेना असंभव हो जाता है और अंततः घुटन से मौत हो जाती है।
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सुपर स्प्रेडर का खतरा: शोध बताते हैं कि इस वायरस से संक्रमित कुछ लोग ‘सुपर स्प्रेडर’ की तरह काम करते हैं, जो बहुत कम समय में कई लोगों को संक्रमित कर सकते हैं।
क्रूज शिप की वो खौफनाक दास्तां
अप्रैल 2026 में अर्जेंटीना से शुरू हुआ एक सफर उस समय मातम में बदल गया जब जहाज पर सवार यात्रियों की एक-एक कर मौत होने लगी। जांच में पता चला कि एक डच कपल अनजाने में चूहों के संक्रमित मल-मूत्र के संपर्क में आया था। चूंकि वे ‘एंडीज स्ट्रेन’ की चपेट में थे, इसलिए जहाज के बंद माहौल और करीबी संपर्क के कारण यह संक्रमण अन्य यात्रियों तक भी पहुंच गया। डब्ल्यूएचओ (WHO) के मुताबिक, इस स्ट्रेन का ट्रांसमिशन विंडो बहुत छोटा होता है, लेकिन इसी दौरान यह सबसे ज्यादा घातक होता है।
हंता वायरस के प्रमुख लक्षण: कब हो जाएं सावधान?
हंता वायरस के लक्षण शुरुआत में सामान्य फ्लू जैसे लगते हैं, जिससे इसकी पहचान करना मुश्किल होता है:
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तेज बुखार और मांसपेशियों में दर्द (खासकर जांघों, पीठ और कंधों में)।
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सिरदर्द, चक्कर आना और ठंड लगना।
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पेट में दर्द, मतली या डायरिया।
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गंभीर स्थिति: संक्रमण के 4 से 10 दिनों बाद फेफड़ों में पानी भरने के कारण खांसी और सांस लेने में भयंकर तकलीफ शुरू हो जाती है।
बचाव ही एकमात्र समाधान: कैसे रखें खुद को सुरक्षित?
चूंकि इस वायरस के लिए अभी तक कोई वैक्सीन या एंटी-वायरल दवा उपलब्ध नहीं है, इसलिए एक्सपर्ट्स केवल एहतियात बरतने की सलाह देते हैं:
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चूहों से दूरी: अपने घर, किचन और स्टोर रूम को चूहों से मुक्त रखें। चूहों के मल, मूत्र या लार के सीधे संपर्क में आने से बचें।
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सफाई के दौरान सावधानी: अगर आप किसी पुरानी अलमारी या बंद गोदाम की सफाई कर रहे हैं, तो वहां सीधे झाड़ू न लगाएं (इससे वायरस हवा में उड़ सकता है)। पहले कीटाणुनाशक का छिड़काव करें।
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सुरक्षा उपकरण: ऐसी जगहों पर सफाई करते समय N95 मास्क और दस्ताने (Gloves) जरूर पहनें।
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खुले खाने से बचें: खाने-पीने की चीजों को हमेशा ढक कर रखें ताकि चूहे उन तक न पहुंच सकें।
हंता वायरस भले ही कोरोना की तरह हवा में तेजी से न फैलता हो, लेकिन इसकी उच्च मृत्यु दर इसे बेहद डरावना बनाती है। जागरूकता और चूहों से दूरी ही इस ‘साइलेंट किलर’ से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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