बड़ा मंगल 2026: लखनऊ समेत पूरे देश में 4 मई को पहला बड़ा मंगल, बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए सुंदरकांड की इन 5 चौपाइयों का करें पाठ

लखनऊ/नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की ऐतिहासिक परंपरा और हनुमान भक्तों की अटूट आस्था का पर्व ‘बड़ा मंगल’ इस साल 4 मई 2026 से शुरू हो रहा है। ज्येष्ठ माह के मंगलवार को आने वाले इस विशेष पर्व पर हनुमान जी की आराधना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि ज्येष्ठ के मंगल के दिन ही प्रभु श्रीराम की मुलाकात हनुमान जी से हुई थी, इसीलिए इसे ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढ़वा मंगल’ कहा जाता है। इस पावन अवसर पर यदि आप सुंदरकांड की कुछ विशिष्ट चौपाइयों का पाठ करते हैं, तो बजरंगबली के साथ प्रभु श्री राम की भी असीम अनुकंपा प्राप्त होती है।

ज्येष्ठ मास के पहले बड़े मंगल का महत्व

ज्येष्ठ मास के मंगलवार सामान्य दिनों की तुलना में अधिक प्रभावशाली माने जाते हैं। 4 मई 2026 को पड़ने वाला पहला बड़ा मंगल नई शुरुआत और संकल्प सिद्धि के लिए बेहद शुभ है। इस दिन लखनऊ के पुराने हनुमान मंदिर (अलीगंज) समेत देश भर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन के असाध्य रोग और शोक मिट जाते हैं और साधक को अष्ट सिद्धि व नौ निधि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सुंदरकांड की ये 5 चौपाइयां बदल देंगी आपका भाग्य

सुंदरकांड हनुमान जी की वीरता और भक्ति का सबसे सुंदर संकलन है। बड़े मंगल पर इन 5 चौपाइयों का पाठ विशेष फलदायी है:

  • 1. कार्य सिद्धि के लिए: “कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम पाहीं।।”

    जब जामवंत जी ने हनुमान जी को उनकी शक्ति याद दिलाई थी, तब यह कहा था। इस चौपाई के पाठ से असंभव लगने वाले कार्य भी सफलतापूर्वक पूरे हो जाते हैं।

  • 2. सफलता और सुरक्षा के लिए: “प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदय राखि कोसलपुर राजा।।”

    लंका प्रवेश के समय हनुमान जी ने प्रभु राम को हृदय में बसाया था। किसी भी नए शहर या नए काम में प्रवेश करते समय इसे पढ़ने से शत्रु भी मित्र बन जाते हैं।

  • 3. लक्ष्य प्राप्ति और समर्पण के लिए: “हनुमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम। राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम।।”

    यह चौपाई आलस्य को दूर कर लक्ष्य के प्रति समर्पण जगाती है। विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह ऊर्जा का स्रोत है।

  • 4. संकटों से मुक्ति के लिए: “दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।”

    जब माता सीता ने हनुमान जी के माध्यम से राम जी को संदेश भेजा था, तब इस भाव का प्रयोग हुआ था। भारी विपदा के समय यह चौपाई सुरक्षा कवच की तरह काम करती है।

  • 5. भक्ति और शक्ति के लिए: “धरइ जो बिबिध देह सुरत्राता। तुम्ह से सठन्ह सिखावनु दाता॥”

    अधर्म का नाश और धर्म की रक्षा के भाव वाली यह चौपाई आत्मबल बढ़ाती है और व्यक्ति के भीतर सात्विकता का संचार करती है।

बड़े मंगल पर पूजा की सरल विधि

4 मई की सुबह स्नान के पश्चात लाल या केसरिया रंग के वस्त्र धारण करें। हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल या शुद्ध घी का दीपक जलाएं। उन्हें सिंदूर चढ़ाएं और बेसन के लड्डू या बूंदी का भोग लगाएं। सुंदरकांड का पाठ करने के बाद ऊपर दी गई 5 चौपाइयों का कम से कम 11 बार जाप करें। अंत में हनुमान चालीसा का पाठ कर प्रसाद वितरण करें।

Check Also

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर 70 साल बाद चंद्रग्रहण और ‘ब्लड मून’ का महासंयोग, जानें भारत में सूतक काल व राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

सनातन धर्म में श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन भाई-बहन के पवित्र प्रेम और रक्षा …