
सनातन धर्म में श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन भाई-बहन के पवित्र प्रेम और रक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष रक्षाबंधन के पावन पर्व पर एक अत्यंत दुर्लभ खगोलीय व ज्योतिषीय घटना घटने जा रही है। पंचांगीय गणना के अनुसार लगभग 70 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद रक्षाबंधन के दिन ही साल का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा का एक बड़ा हिस्सा पृथ्वी की घनी छाया में आ जाएगा, जिससे वह तांबे जैसे लाल रंग यानी ‘ब्लड मून’ (Blood Moon) के रूप में नजर आएगा। एक ही दिन रक्षाबंधन, चंद्र ग्रहण और ब्लड मून के इस अद्भुत संयोग को लेकर देशभर में श्रद्धालुओं और बहनों के मन में पूजा व राखी बांधने के समय को लेकर जिज्ञासा बनी हुई है।
70 साल बाद रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग
खगोल विज्ञान और ज्योतिषीय इतिहास के अनुसार रक्षाबंधन यानी श्रावण पूर्णिमा पर गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण और ब्लड मून का ऐसा संयोग दशकों में एक बार निर्मित होता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह चंद्र ग्रहण वायु तत्व की राशि कुंभ और राहु के शतभिषा नक्षत्र में घटित होगा। भारतीय समयानुसार यह खगोलीय घटना सुबह 06:53 बजे से प्रारंभ होकर दोपहर 12:32 बजे तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान चंद्रमा का लगभग 93 से 96 प्रतिशत भाग पृथ्वी की छाया में ढका रहेगा, जिससे विदेशी आकाश में चंद्रमा का रंग रक्त वर्ण जैसा दिखाई देगा।
क्या भारत में मान्य होगा सूतक काल?
रक्षाबंधन के दिन ग्रहण होने के कारण सबसे बड़ा संशय सूतक काल और मंदिरों के कपाट बंद होने को लेकर है। धार्मिक शास्त्रों और वैदिक ज्योतिष का यह सर्वमान्य नियम है कि ग्रहण का सूतक काल, यम-नियम और धार्मिक पाबंदियां केवल उसी भू-भाग में लागू होती हैं जहां ग्रहण नग्न आंखों से प्रत्यक्ष रूप से दृश्यमान हो।
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भारत में दृश्यता: 28 अगस्त को जब यह ग्रहण घटित होगा, उस समय भारत में दिन का उजाला रहेगा और चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा। इसलिए यह ग्रहण भारत में बिल्कुल दिखाई नहीं देगा।
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सूतक काल का प्रभाव: भारत में दृश्यता शून्य होने के कारण यहां कोई सूतक काल मान्य नहीं होगा।
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पूजा-पाठ व मंदिर: देश भर के मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे और नित्य पूजा-अर्चना, जप, तप या रक्षाबंधन के अनुष्ठानों पर किसी भी प्रकार का कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।
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कहां दिखेगा ग्रहण: यह गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण और ब्लड मून मुख्य रूप से उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, अटलांटिक और प्रशांत महासागर के क्षेत्रों में साफ दिखाई देगा।
रक्षाबंधन पर भद्रा का साया और राखी बांधने का श्रेष्ठ मुहूर्त
रक्षाबंधन के दिन ग्रहण के सूतक का कोई असर नहीं रहेगा, साथ ही इस बार भद्रा काल का संकट भी त्योहार के समय नहीं रहेगा। ज्योतिषीय पंचांग के अनुसार भद्रा 27 अगस्त की रात को ही समाप्त हो जाएगी, जिसके चलते 28 अगस्त की सुबह रक्षाबंधन का पर्व पूरी तरह से भद्रा-दोष से मुक्त रहेगा।
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पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 27 अगस्त, प्रातः 09:08 बजे से
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पूर्णिमा तिथि समापन: 28 अगस्त, प्रातः 09:48 बजे तक
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राखी बांधने का सर्वोत्तम प्रातःकालीन मुहूर्त: प्रातः 05:57 बजे से प्रातः 09:48 बजे तक
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अपराह्न का वैकल्पिक मुहूर्त: दोपहर 01:30 बजे से सायं 04:00 बजे तक (जो जातक सुबह राखी नहीं बांध सकें, वे दोपहर में यह संस्कार पूरा कर सकते हैं)।
रक्षाबंधन पूजा विधि और भाई-बहन के लिए नियम
इस पावन दिन पर प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा की थाली तैयार करें। थाली में कुमकुम, अक्षत (अक्षत चावल), चंदन, दीपक, मिठाई और पवित्र रक्षासूत्र रखें। सबसे पहले अपने ईष्टदेव और भगवान श्री गणेश को रक्षासूत्र अर्पित करें। इसके बाद भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बिठाएं। भाई के मस्तक पर रोली-अक्षत का तिलक लगाएं, आरती उतारें और दाहिनी कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर मिठाई खिलाएं। भाई अपनी बहनों को रक्षा का वचन देते हुए उपहार भेंट करें।
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