Baglamukhi Jayanti 2026: वशीकरण और शत्रुओं के स्तंभन की देवी हैं मां बगलामुखी, जानें उनकी 16 अलौकिक शक्तियां और उत्पत्ति की कथा

Baglamukhi Mata Powers and Origin: हिंदू धर्म और तंत्र शास्त्र में मां बगलामुखी का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। दसों महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या के रूप में पूजी जाने वाली मां बगलामुखी को ‘पीतांबरा’ भी कहा जाता है। इस वर्ष 24 अप्रैल 2026 को वैशाख शुक्ल अष्टमी के दिन मां बगलामुखी की जयंती मनाई जाएगी। इन्हें शत्रुओं पर विजय, वाक-शक्ति के स्तंभन और कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता दिलाने वाली देवी माना जाता है।

मां बगलामुखी की उत्पत्ति की पौराणिक कथाएं

शास्त्रों में मां बगलामुखी के प्राकट्य को लेकर दो प्रमुख कथाएं प्रचलित हैं:

  • सौराष्ट्र की हरिद्रा झील से उत्पत्ति: सतयुग के समय एक भीषण तूफान उठा जिससे पूरी सृष्टि के नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया। भगवान विष्णु ने इस संकट से रक्षा के लिए आदिशक्ति की कठोर तपस्या की। विष्णु जी की भक्ति से प्रसन्न होकर देवी जगदंबा सौराष्ट्र (गुजरात) की हरिद्रा झील में बगलामुखी के रूप में प्रकट हुईं और अपनी स्तंभन शक्ति से उस विनाशकारी तूफान को शांत कर पृथ्वी की रक्षा की।

  • ब्रह्मा जी के ग्रंथों की रक्षा: एक अन्य कथा के अनुसार, जब एक राक्षस ने ब्रह्मा जी के वेद और ग्रंथों को चुराकर पाताल लोक में छिपा दिया, तब देवी ने बगुले का रूप धारण किया। उन्होंने अपनी दिव्य शक्ति से राक्षस का वध कर ब्रह्मा जी को उनके ग्रंथ वापस दिलाए। इसी कारण उन्हें ‘बगलामुखी’ कहा गया।

वशीकरण समेत मां बगलामुखी की 16 दिव्य शक्तियां

मां बगलामुखी केवल विनाश की देवी नहीं हैं, बल्कि वे 16 ऐसी शक्तियों की स्वामिनी हैं जो भक्त के जीवन को संतुलित और विजयी बनाती हैं:

  1. मंगला: जीवन में शुभता और मंगल लाने वाली।

  2. वश्या: शत्रुओं और विपरीत परिस्थितियों को वश में करने की शक्ति।

  3. अचला: भक्तों को स्थिरता प्रदान करने वाली।

  4. मुंधरा: शत्रु के मुख को बंद करने वाली।

  5. स्तंभिनी: शत्रु की बुद्धि, वाणी और क्रियाओं को जड़ कर देने वाली (प्रमुख शक्ति)।

  6. बला: शारीरिक और मानसिक बल प्रदान करने वाली।

  7. जृम्भिणि: शत्रु की चेतना को निष्क्रिय करने वाली।

  8. मोहिनी: संसार को मोहित करने और आकर्षण की शक्ति।

  9. भाविका: भक्तों की भावनाओं को समझने और सिद्ध करने वाली।

  10. धात्री: संसार का पोषण और धारण करने वाली।

  11. कलना: समय (काल) पर नियंत्रण रखने वाली।

  12. भ्रामिका: विरोधियों के मन में भ्रम पैदा कर उन्हें परास्त करने वाली।

  13. कल्पमसा: समस्त पापों और दुष्टों का नाश करने वाली।

  14. कालकर्षिणि: काल को आकर्षित करने और टालने वाली।

  15. भोगस्था: सांसारिक सुख और भोग-विलास प्रदान करने वाली।

  16. मंदगमना: शांति और स्थिर गति के साथ न्याय करने वाली।

मां का स्वरूप और विशेष उपासना

बगलामुखी मां का रंग स्वर्ण के समान पीला है, इसलिए उन्हें पीला रंग और पीले फूल अत्यंत प्रिय हैं। वे दो भुजाओं वाली हैं, जिनके दाहिने हाथ में गदा है और बाएं हाथ से उन्होंने एक असुर की जीभ पकड़ रखी है। यह स्वरूप दर्शाता है कि वे भक्तों के शत्रुओं की वाणी और कुचक्रों को रोक देती हैं। महाभारत युद्ध से पूर्व स्वयं भगवान कृष्ण ने पांडवों से मां बगलामुखी की साधना करवाई थी, जिसके बाद ही उन्हें विजय प्राप्त हुई।

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