बहरा होने से पहले कानों में महसूस होते हैं ये 5 खामोश लक्षण, डॉक्टरों ने दी बड़ी चेतावनी इन्हें उम्र या थकान समझने की भूल न करें

अक्सर लोग सोचते हैं कि बहरापन या सुनने की क्षमता (Hearing Loss) खोने का मतलब है कि अचानक से कानों में आवाजें आना बिल्कुल बंद हो जाएं। लेकिन मेडिकल साइंस के अनुसार हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। अधिकांश मामलों में सुनने की शक्ति कम होने की प्रक्रिया इतनी धीमी और साइलेंट होती है कि इसके शुरुआती संकेतों को लोग उम्र का बढ़ना, शरीर की थकान या आसपास का शोर समझकर आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं।

‘यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन डेफनेस एंड अदर कम्युनिकेशन डिसऑर्डर्स’ के मुताबिक, उम्र के साथ सुनने की क्षमता कम होना दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित कर रहा है। फोर्टिस हॉस्पिटल (मुलुंड, मुंबई) के सीनियर कंसल्टेंट ईएनटी (ENT) सर्जन डॉ. संजय भाटिया चेतावनी देते हैं कि अगर इन शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो कानों को पूरी तरह खराब होने से बचाया जा सकता है। आइए जानते हैं कानों से जुड़े उन लक्षणों के बारे में जिन्हें आपको आज से ही गंभीरता से लेना चाहिए।

1. आवाज तो सुनाई देती है, लेकिन ‘शब्द’ साफ समझ नहीं आते

सुनने की समस्या का पहला संकेत यह नहीं होता कि आपको सन्नाटा महसूस होने लगे। कई बार आपको यह तो पता चलता है कि सामने वाला कुछ बोल रहा है, लेकिन उसने क्या शब्द कहे, यह साफ-साफ समझ नहीं आता। खासकर भीड़भाड़ वाली जगहों, फैमिली फंक्शन्स, शादियों या रेस्तरां जैसे माहौल में बातचीत को समझने में दिमाग पर बहुत ज्यादा जोर डालना पड़ता है।

2. बार-बार दूसरों से कहना पड़े—”क्या कहा? जरा दोबारा बोलना”

क्या आपको हाल के दिनों में लोगों से अपनी बात बार-बार दोहराने (Repeat) के लिए कहना पड़ रहा है? शुरुआत में यह बेहद सामान्य लग सकता है, लेकिन जब यह आपकी रोजमर्रा की आदत बन जाए, तो समझ लें कि कानों की नसें कमजोर हो रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस बदलाव को खुद मरीज से पहले उसके परिवार के सदस्य या दोस्त नोटिस करते हैं।

3. टीवी या मोबाइल की आवाज को लगातार बहुत तेज रखना

एक बेहद आम और सबसे बड़ा संकेत यह है कि जब आप टीवी देखते हैं या मोबाइल पर कोई वीडियो सुनते हैं, तो उसकी वॉल्यूम (आवाज) लगातार बढ़ाते जाते हैं। घर के दूसरे सदस्यों को वह आवाज बहुत तेज और चुभने वाली लगती है, लेकिन आपको वह बिल्कुल नॉर्मल सुनाई देती है। चूंकि यह बदलाव धीरे-धीरे होता है, इसलिए लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते।

4. फोन पर बातचीत करने में अचानक कठिनाई महसूस होना

जब हम किसी से आमने-सामने बात करते हैं, तो हमारा दिमाग सामने वाले के चेहरे के हावभाव, एक्सप्रेशन्स और होंठों की मूवमेंट (लिप-रीडिंग) से आधी बात खुद ही समझ लेता है। लेकिन फोन पर केवल और केवल आवाज के भरोसे बात करनी होती है। यही वजह है कि कानों में हल्की सी भी खराबी आते ही सबसे पहले फोन पर बात करने में दिक्कत होने लगती है।

5. कानों में लगातार घंटी, भिनभिनाहट या सीटी जैसी आवाज आना

क्या आपको शांत कमरे में बैठने पर भी अपने कानों के अंदर अजीब सी सीटी, सनसनाहट या घंटी बजने जैसी आवाजें सुनाई देती हैं? चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को ‘टिनिटस’ (Tinnitus) कहा जाता है। डॉ. संजय भाटिया के अनुसार, टिनिटस अक्सर कानों के अंदरूनी हिस्से में आ रही किसी बड़ी खराबी या बहरेपन की शुरुआत का एक बहुत ही स्पष्ट और गंभीर संकेत होता है।

नजरअंदाज करने पर डिप्रेशन और मानसिक तनाव का खतरा

डॉ. संजय भाटिया स्पष्ट रूप से चेतावनी देते हैं कि सुनने की इस समस्या को नजरअंदाज करना केवल कानों तक सीमित नहीं रहता। जब व्यक्ति को समाज में लोगों की बातें समझ नहीं आतीं, तो वह शर्मिंदगी से बचने के लिए लोगों से बात करना बंद कर देता है। धीरे-धीरे यह सामाजिक दूरी (Social Isolation), भारी निराशा, मानसिक तनाव और गंभीर अवसाद (Depression) का कारण बन जाती है।

यदि आपको या आपके घर में किसी बुजुर्ग को इनमें से कोई भी लक्षण लगातार महसूस हो रहा है, तो बिना देरी किए किसी अच्छे ईएनटी (ENT) डॉक्टर से संपर्क करें और ‘ऑडियोमेट्री टेस्ट’ (कानों की सुनने की जांच) जरूर करवाएं।

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