
नई नई दिल्ली: मोदी कैबिनेट ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए बुधवार को बड़े फैसलों पर मुहर लगा दी है। छोटे और मध्यम शहरों (टियर-2 और टियर-3) को हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए सरकार ने ‘उड़ान’ (UDAN) योजना के संशोधित स्वरूप को हरी झंडी दे दी है। इस महायोजना के लिए कुल 28,840 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है। सरकार का लक्ष्य अब केवल महानगरों तक सीमित न रहकर देश के दूर-दराज के इलाकों में भी हवाई सफर को आम आदमी की पहुंच में लाना है।
हवाई चप्पल वाले भी करेंगे हवाई सफर: 100 नए एयरपोर्ट की तैयारी
कैबिनेट बैठक के बाद मिली जानकारी के अनुसार, ‘मॉडिफाइड उड़ान योजना’ के तहत देशभर में 100 नए एयरपोर्ट्स विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुधारने के लिए 200 नए हेलीपैड बनाने का भी लक्ष्य रखा गया है। इस निवेश से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे। सरकार का विजन है कि अगले कुछ वर्षों में भारत का एविएशन सेक्टर दुनिया के सबसे मजबूत नेटवर्क में से एक बनकर उभरे।
इमिग्रेशन और वीजा सिस्टम होगा हाई-टेक: IVFRT 3.0 को मंजूरी
विदेशी यात्रियों और प्रवासियों के लिए भारत आने की प्रक्रिया को और अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए कैबिनेट ने ‘आईवीएफआरटी 3.0’ (IVFRT 3.0) योजना के विस्तार को मंजूरी दी है। इस परियोजना के लिए 1,800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक प्रभावी रहेगी। इसका मुख्य उद्देश्य वीजा, इमिग्रेशन और फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया को आधुनिक और डिजिटल बनाना है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और सही यात्रियों को बिना किसी देरी के सेवाएं मिल सकेंगी।
ग्लोबल वार्मिंग पर भारत का कड़ा रुख: पेरिस समझौते के तहत एनडीसी को मुहर
वित्तीय आवंटन के अलावा, कैबिनेट ने वैश्विक पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय लिया है। सरकार ने पेरिस समझौते के तहत भारत के ‘नेशनली डिटरमाइंड कंट्रीब्यूशन’ (NDC) को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। यह फैसला स्पष्ट करता है कि भारत कार्बन उत्सर्जन कम करने और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की अपनी वैश्विक प्रतिबद्धताओं पर अडिग है। इस फैसले से भविष्य में देश की कॉर्पोरेट रणनीतियों और विकास की दिशा पूरी तरह से ‘इको-फ्रेंडली’ और सतत विकास (Sustainable Development) पर केंद्रित होगी।
30,640 करोड़ के कुल निवेश से बदलेगी तस्वीर
कुल मिलाकर, कैबिनेट ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए 30,640 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी देकर अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने की कोशिश की है। एविएशन, इमिग्रेशन और क्लाइमेट चेंज—इन तीनों ही मोर्चों पर सरकार के ये फैसले आने वाले दशक में भारत की वैश्विक स्थिति को और मजबूत करेंगे। छोटे शहरों के व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि अब व्यापार और आपातकालीन यात्रा के लिए उन्हें बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
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