अयोध्या के भव्य राम मंदिर में सामने आए कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितता कांड की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इस अंतरिम रिपोर्ट के जो अंश और निष्कर्ष सामने आ रहे हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं।
एसआईटी की पड़ताल के मुताबिक, राम मंदिर परिसर में सेंधमारी सिर्फ दानपेटियों से नकदी गायब होने तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर के वित्तीय प्रबंधन से लेकर प्रशासनिक, सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं तक में गंभीर खामियां और विफलताएं पाई गई हैं। एसआईटी ने पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही पर कड़े सवालिया निशान खड़े किए हैं।
प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आईं ये 5 बड़ी खामियां:
1. दान और कीमती धातुओं के लेखा-जोखा में भारी लापरवाही
एसआईटी ने अपनी जांच में पाया कि श्रद्धालुओं द्वारा दानपात्रों में चढ़ाए जाने वाले सोने, चांदी और अन्य बहुमूल्य रत्नों व धातुओं का कोई समुचित और व्यवस्थित रिकॉर्ड (Logbook) उपलब्ध नहीं है।
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पारदर्शिता की कमी: दानपेटियों से नकदी निकालने, उसे मुख्य कार्यालय तक ले जाने, नोटों की गिनती करने और फिर उन्हें बैंक में जमा कराने की पूरी चेन (Process) में सुरक्षा और पारदर्शिता का घोर अभाव पाया गया।
2. टेंडर और खरीदारी में नियमों की अनदेखी
जांच दल ने मंदिर परिसर की विभिन्न व्यवस्थाओं और सामग्रियों की खरीद से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की। रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के टेंडर जारी करने और अन्य आवश्यक सामग्रियों की खरीद-फरोख्त की प्रक्रियाओं में पारदर्शी व्यवस्था और तय मानकों का पालन नहीं किया गया।
3. करीबियों और रिश्तेदारों को ‘बैकडोर’ नियुक्तियां
एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट में एक और बेहद संवेदनशील मुद्दा सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि जांच में कुछ जिम्मेदार पदाधिकारियों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर अपने बेहद करीबी लोगों और सगे-संबंधियों को मंदिर प्रशासन की महत्वपूर्ण कड़ियों में नियुक्तियां (Jobs) देने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।
4. सीसीटीवी (CCTV) का बेहद कमजोर बैकअप प्लान
तकनीकी सुरक्षा के मोर्चे पर भी एक बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। एसआईटी की जांच के अनुसार, इतने संवेदनशील और अति-सुरक्षित मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज का डिजिटल बैकअप केवल 45 दिनों तक ही सुरक्षित रखा जा रहा था, जो कि सुरक्षा मानकों के लिहाज से बेहद कम है। इसके अलावा, पुराने डिजिटल साक्ष्यों और वीडियो को अलग से किसी सुरक्षित सर्वर पर संरक्षित (Archive) करने की कोई व्यवस्था नहीं थी।
एसआईटी (SIT) की प्रमुख सिफारिशें: ‘ट्रस्ट के पुनर्गठन और आईएएस (IAS) को सीईओ बनाने की मांग’
इन गंभीर खामियों को देखते हुए विशेष जांच दल ने मंदिर प्रबंधन को अधिक जवाबदेह, पेशेवर और आधुनिक बनाने के लिए कई कड़े और महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
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आईएएस अधिकारी की कप्तानी (CEO): सोशल मीडिया और सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक, एसआईटी ने सिफारिश की है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाए और सभी सदस्यों की जिम्मेदारियां लिखित में तय हों। साथ ही, व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार के किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (IAS) को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में नियुक्त किया जाए।
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साप्ताहिक ऑडिट और डेली एंट्री: वित्तीय गड़बड़ी को पूरी तरह रोकने के लिए प्रतिदिन आने वाले चढ़ावे की डिजिटल एंट्री और दान की कुल राशि का साप्ताहिक ऑडिट (Weekly Audit) अनिवार्य रूप से कराने का सुझाव दिया गया है।
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180 दिनों का सीसीटीवी बैकअप: सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज स्टोरेज की अवधि को वर्तमान 45 दिनों से बढ़ाकर सीधे 180 दिन (6 महीने) करने की सख्त सिफारिश की गई है।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अक्षरशः पालन: एसआईटी ने जोर दिया है कि देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court) द्वारा राम मंदिर ट्रस्ट के संचालन, प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर दिए गए सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से और पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए।
फिलहाल, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसआईटी ने विस्तृत और निष्पक्ष जांच के लिए शासन से थोड़ा और समय मांगा है। अब सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के सार्वजनिक होने और उसके बाद दोषियों पर होने वाली बड़ी कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।
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