Iran Nuclear Program Update 2026: मिडिल ईस्ट के रणक्षेत्र से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। अमेरिका और इजरायल द्वारा पिछले 40 दिनों से ईरान पर किए जा रहे लगातार हमलों और मिसाइल वर्षा के बावजूद, तेहरान का परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) लगभग सुरक्षित बताया जा रहा है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के ताजा आकलन ने वाशिंगटन और यरूशलेम की रणनीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खुफिया रिपोर्ट: नहीं बदली परमाणु बम बनाने की समय-सीमा
अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले साल की गर्मियों से लेकर अब तक ईरान की परमाणु क्षमताओं में कोई बड़ा नकारात्मक बदलाव नहीं आया है।
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हमलों का असर: 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए अमेरिकी ऑपरेशन ‘मिडनाइट हैमर’ और इजरायली हमलों ने ईरान के पारंपरिक सैन्य ठिकानों और रक्षा उद्योगों को तो भारी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन परमाणु ठिकानों की गहराई ने उन्हें सुरक्षा कवच प्रदान किया है।
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ब्रेकआउट टाइम: विशेषज्ञों का मानना है कि जून 2025 के हमलों के बाद ईरान का परमाणु बम बनाने का समय (Breakout Time) जो 9 महीने से 1 साल तक बढ़ गया था, वह अभी भी वहीं बना हुआ है। यानी इतनी बमबारी के बाद भी उसे पीछे नहीं धकेला जा सका है।
IAEA की चिंता: 440 किलो यूरेनियम का रहस्य
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था (IAEA) ने एक सनसनीखेज डेटा साझा किया है:
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गायब यूरेनियम: एजेंसी लगभग 440 किलोग्राम 60 प्रतिशत समृद्ध यूरेनियम का पता नहीं लगा पा रही है।
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सुरक्षित सुरंगें: शक है कि इस भंडार का बड़ा हिस्सा इस्फहान (Isfahan) के भूमिगत सुरंग परिसरों में अत्यंत गहराई में छिपाया गया है। यदि इसे 90 प्रतिशत तक समृद्ध किया गया, तो यह कम से कम 10 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त होगा।
ट्रंप प्रशासन का रुख: “ईरान कभी नहीं बनेगा परमाणु शक्ति”
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स और उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने स्पष्ट शब्दों में दोहराया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।
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जेडी वैंस का बयान: “ईरान को परमाणु हथियार मिलने की अनुमति कभी नहीं दी जा सकती। हमारा सैन्य अभियान इसी लक्ष्य की ओर केंद्रित है।”
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रक्षा सचिव की रणनीति: अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा है कि अमेरिका सैन्य दबाव और कूटनीति के मिश्रण से यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान कभी ‘न्यूक्लियर स्टेट’ न बन पाए।
एक्सपर्ट्स की राय: क्यों विफल रही बमबारी?
पूर्व खुफिया विश्लेषक एरिक ब्रेवर के अनुसार, हालिया हमलों में परमाणु ठिकानों को ‘प्रायोरिटी’ (प्राथमिकता) पर नहीं रखा गया, बल्कि ईरान की सैन्य शक्ति को कुचलने पर जोर दिया गया।
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गहरी किलेबंदी: ईरान ने नतांज और फोर्डो जैसे अपने मुख्य परमाणु संयंत्रों को पहाड़ों के नीचे इतनी गहराई में बनाया है कि पारंपरिक बमबारी उन्हें नष्ट करने में सक्षम नहीं है।
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वैज्ञानिक क्षमता: पूर्व परमाणु निरीक्षक डेविड अल्ब्राइट का कहना है कि इजरायल द्वारा ईरानी वैज्ञानिकों को निशाना बनाने से तकनीकी देरी तो हो सकती है, लेकिन उनकी पूरी सामग्री अभी भी उनके पास मौजूद है।
तनाव और ऊर्जा संकट
7 अप्रैल 2026 को हुए अस्थायी युद्धविराम के बाद शांति वार्ता शुरू हुई थी, लेकिन ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को फिर से बंद करने के फैसले ने दुनिया को दहला दिया है।
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20% तेल आपूर्ति ठप: जलमार्ग बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है, जिससे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।
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