
महिलाओं के शरीर और स्वास्थ्य को लेकर समाज में कई तरह के भ्रम और आधी-अधूरी जानकारियां तैरती रहती हैं। इनमें से एक सबसे आम सवाल यह है कि— क्या बड़े स्तन (Breast Size) होने से किसी गंभीर बीमारी, विशेषकर ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) का खतरा बढ़ जाता है? इस बात को लेकर कई महिलाओं के मन में एक अनजाना डर और संशय बना रहता है।
लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स और वैज्ञानिक शोधों (Researches) ने इस विषय पर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। आइए जानते हैं ब्रेस्ट साइज और कैंसर के बीच का सच, बड़े साइज के कारण होने वाली वास्तविक शारीरिक दिक्कतें और वे कौन से लक्षण हैं जिन्हें महिलाओं को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
साइज से नहीं, इन 5 कारणों से बढ़ता है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा
‘नेशनल ब्रेस्ट कैंसर फाउंडेशन’ (National Breast Cancer Foundation) की रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े ब्रेस्ट होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि महिला को ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका अधिक है। मेडिकल साइंस में अब तक हुई किसी भी रिसर्च में ब्रेस्ट के साइज और कैंसर के बीच कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है।
कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों के मुख्य जोखिम कारक (Risk Factors) कुछ और हैं, जैसे:
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डेंस ब्रेस्ट (Dense Breast): ब्रेस्ट में फैट (वसा) की तुलना में ब्रेस्ट टिश्यू (तंतुओं) का अत्यधिक घना होना।
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आनुवंशिकता (Genetics): परिवार में पहले किसी करीबी (मां, बहन या बेटी) को ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास होना।
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बढ़ती उम्र: उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले प्राकृतिक बदलाव।
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मोटापा (Obesity): शरीर का वजन अत्यधिक होना।
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अनहेल्दी लाइफस्टाइल: शारीरिक सक्रियता की कमी (व्यायाम न करना) और खराब खान-पान।
जांच में मुश्किल: हालांकि, एक्सपर्ट्स यह जरूर बताते हैं कि जिन महिलाओं का ब्रेस्ट साइज बड़ा होता है, उनके स्तनों की शारीरिक जांच (मैमोग्राम या क्लिनिकल टेस्ट) करना थोड़ा जटिल हो सकता है। इसलिए ऐसी महिलाओं के लिए नियमित डॉक्टर की सलाह और रूटीन चेकअप अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
बड़े ब्रेस्ट साइज से होने वाली 3 असली शारीरिक दिक्कतें:
भले ही बड़े साइज से कैंसर का खतरा न हो, लेकिन अत्यधिक भारीपन के कारण महिलाओं को रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ वास्तविक शारीरिक समस्याओं और असहजता (Discomfort) का सामना करना पड़ता है:
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क्रोनिक दर्द (Chronic Pain): बड़े स्तनों के अतिरिक्त वजन के कारण रीढ़ की हड्डी पर लगातार दबाव बना रहता है। इस वजह से कई महिलाएं पीठ (Back pain), गर्दन (Neck pain) और कंधों में लगातार रहने वाले दर्द की शिकायत करती हैं।
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पोस्चर (उठने-बैठने का तरीका) बिगड़ना: वजन के संतुलन को बनाए रखने के लिए शरीर का पोस्चर अनजाने में आगे की तरफ झुक जाता है, जिससे मांसपेशियों में खिंचाव आता है।
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त्वचा में संक्रमण (Skin Irritation): भारीपन के कारण स्तनों के निचले हिस्से की त्वचा में पसीने के जमा होने से रैशेज या फंगल इन्फेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है।
चिकित्सकों के अनुसार, ये समस्याएं कष्टदायक जरूर हो सकती हैं, लेकिन ये किसी गंभीर जानलेवा बीमारी या कैंसर का संकेत बिल्कुल नहीं होती हैं।
हार्मोनल बदलाव और ब्रेस्ट में परिवर्तन
महिलाओं के स्तनों के आकार और बनावट में जीवनभर कई तरह के प्राकृतिक बदलाव आते हैं, जो पूरी तरह सामान्य हैं। किशोरावस्था (Puberty), मासिक धर्म (Periods), गर्भावस्था (Pregnancy), स्तनपान (Breastfeeding), वजन के घटने-बढ़ने और मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण स्तनों में अस्थाई सूजन, भारीपन या पानी से भरी हल्की गांठें (Cysts) महसूस हो सकती हैं, जो ज्यादातर मामलों में गैर-कैंसरकारी (Benign) होती हैं।
इन 5 चेतावनी भरे लक्षणों को कभी न करें इग्नोर:
अगर आपको अपने ब्रेस्ट में नीचे दिए गए कोई भी नए या अचानक बदलाव दिखाई देते हैं, तो बिना डरे या संकोच किए तुरंत किसी महिला रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) या ऑन्कोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए:
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स्तनों या अंडरआर्म्स (कांख) में कोई नई, सख्त या बिना दर्द वाली गांठ महसूस होना।
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स्तनों की त्वचा के रंग में बदलाव, सिकुड़न या त्वचा का संतरे के छिलके जैसा (Dimpling) दिखना।
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निप्पल का अचानक अंदर की तरफ मुड़ जाना (Inverted Nipple)।
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निप्पल से बिना दूध के कोई असामान्य या खूनी स्राव (Discharge) होना।
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दोनों स्तनों के सामान्य आकार या बनावट में अचानक कोई बड़ा अंतर आ जाना।
महिलाओं के लिए जरूरी सलाह:
विशेषज्ञों के अनुसार, 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं को डॉक्टर की सलाह पर साल में या दो साल में एक बार नियमित मैमोग्राम (Mammogram) टेस्ट जरूर कराना चाहिए। इसके साथ ही, हर उम्र की महिला को महीने में एक बार ब्रेस्ट सेल्फ एग्जाम (Breast Self-Exam – खुद से स्तनों की जांच) करने की आदत डालनी चाहिए ताकि शरीर में होने वाले किसी भी अस्वाभाविक बदलाव को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सके।
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