पेरिस, फ्रांस: फ्रांस की राजधानी पेरिस से एक ऐसा खौफनाक मामला सामने आया है जिसने पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा के दावों पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। स्कूल में बच्चों की देखभाल करने वाले ‘स्कूल मॉनिटरों’ (School Monitors) पर यौन शोषण, शारीरिक प्रताड़ना और बच्चों को भूखा रखने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि फिलहाल पेरिस के 84 प्रीस्कूल, 20 प्राइमरी स्कूलों और 10 डे-केयर सेंटर्स में जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है।
मासूमों के साथ हैवानियत: रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे
रिपोर्ट्स के अनुसार, तीन से चार साल तक के छोटे बच्चों के साथ कथित बलात्कार की घटनाएं सामने आई हैं। जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच ही 78 स्कूल मॉनिटरों को सस्पेंड किया जा चुका है, जिनमें से 31 पर यौन शोषण के सीधे आरोप हैं। इन मॉनिटरों पर आरोप है कि वे बच्चों को डराते-धमकाते थे, उनके बाल खींचते थे और उन्हें जबरन इतना खाना खिलाते थे कि बच्चे बीमार हो जाते थे, जबकि कई बार उन्हें भूखा रखा जाता था। एक दिल दहला देने वाली घटना में, जब एक तीन साल के बच्चे ने स्कूल जाने से इनकार किया और गेट पर ही सहम गया, तो उसे जबरन अंदर धकेला गया। बाद में पता चला कि उसी स्कूल में उसके साथ हैवानियत की गई थी।
क्या है स्कूल मॉनिटरों की सिस्टम में खोट?
फ्रांस की शिक्षा व्यवस्था में ‘स्कूल मॉनिटर’ वे एडल्ट होते हैं जो लंच, ब्रेक और स्कूल के बाद बच्चों की देखरेख करते हैं। सबसे बड़ी खामी यह है कि इनकी नियुक्ति शिक्षा मंत्रालय या सीधे स्कूल द्वारा नहीं, बल्कि स्थानीय काउंसिलों द्वारा की जाती है। इन मॉनिटरों के पास अक्सर न तो कोई औपचारिक ट्रेनिंग होती है और न ही बच्चों को संभालने की विशेष योग्यता। चूंकि फ्रांस में तीन साल की उम्र से ही बच्चों के लिए नर्सरी स्कूल अनिवार्य है, इसलिए लाखों बच्चे रोजाना ऐसे असुरक्षित माहौल का सामना करने को मजबूर हैं।
सिस्टम की नाकामी पर उठे सवाल
इस शर्मनाक खुलासे के बाद पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगॉयर ने स्वीकार किया है कि यह समस्या ‘सिस्टेमिक’ है। खुद मेयर ने बचपन में स्कूल मॉनिटर द्वारा यौन शोषण का सामना किया था। प्रशासन ने अब 20 मिलियन यूरो की एक बड़ी योजना घोषित की है ताकि व्यवस्था को सुधारा जा सके। हालांकि, अभिभावक संगठनों का कहना है कि यह कदम बहुत देर से उठाया गया है। कई माता-पिता का आरोप है कि उन्होंने वर्षों पहले भी शिकायतें की थीं, लेकिन उन्हें अनसुना कर दिया गया। एक आरोपी मॉनिटर को तो शारीरिक हिंसा की शिकायतों के बावजूद दूसरे स्कूल में ट्रांसफर कर दिया गया था, जिससे साफ है कि सिस्टम की निगरानी प्रक्रिया बेहद कमजोर है।
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