Budh Pradosh Vrat 2026: बिजनेस में तरक्की और बुद्धि के लिए खास है बुध प्रदोष

नई दिल्ली : हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है, जो भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम दिन माना जाता है। अप्रैल 2026 का यह प्रदोष व्रत बुधवार के दिन पड़ने के कारण ‘बुध प्रदोष’ कहलाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुध प्रदोष का व्रत रखने से न केवल वैवाहिक जीवन सुखमय होता है, बल्कि व्यापार (Business) में उन्नति और वाणी में मधुरता भी आती है। विशेष रूप से विद्यार्थियों और कारोबारियों के लिए यह व्रत किसी वरदान से कम नहीं माना जाता है। आइए जानते हैं इस दिन का शुभ मुहूर्त और महादेव को प्रसन्न करने की सही विधि।

कब है बुध प्रदोष व्रत? तिथि और मुहूर्त

हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 अप्रैल 2026 को रात 12:12 मिनट से शुरू हो जाएगी, जो उसी दिन रात 10:31 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि और प्रदोष काल की पूजा के नियमों को देखते हुए 15 अप्रैल को ही बुध प्रदोष का व्रत रखा जाएगा।

शाम को पूजा का सबसे शुभ समय

भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में करना सबसे फलदायी होता है। 15 अप्रैल को शाम 06:47 मिनट से लेकर रात 09:00 मिनट तक पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। भक्तों के पास महादेव की आराधना के लिए कुल 2 घंटे 14 मिनट की अवधि होगी। इसके अलावा, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:27 से 05:11 तक रहेगा, जो आत्म-चिंतन और संकल्प के लिए उत्तम है।

बुध प्रदोष व्रत की सरल पूजा विधि

व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर शिवजी के समक्ष व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन मन ही मन ‘ओम नमः शिवाय’ का जाप करें। शाम को प्रदोष मुहूर्त में भगवान शिव का गंगाजल, दूध और शहद से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर बुध प्रदोष व्रत की कथा सुनें और अंत में शिव चालीसा या आरती का पाठ करें।

इन उपायों से चमकेगा कारोबार और करियर

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुध प्रदोष के दिन भगवान शिव को मूंग की दाल अर्पित करना बेहद शुभ होता है। इसके साथ ही, यदि आप अपनी वाणी या बुद्धि को प्रखर बनाना चाहते हैं, तो शिव मंदिर में हरे रंग की वस्तुओं का दान करें। छात्रों को इस दिन ‘गायत्री मंत्र’ या ‘शिव पंचाक्षर मंत्र’ का जाप करना चाहिए, जिससे एकाग्रता बढ़ती है और शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

आरती: जय शिव ओंकारा

पूजा के अंत में पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव की आरती करें:

“जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥”

मान्यता है कि जो भक्त प्रदोष के दिन सच्चे मन से शिव जी की आरती और अर्चना करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट मिट जाते हैं और उसे मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।

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