
धार्मिक डेस्क : शक्ति की उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्रि इस साल 19 मार्च, गुरुवार से शुरू हो रहा है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नववर्ष का भी आरंभ होता है। इस नौ दिवसीय उत्सव के दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। पहले दिन यानी प्रतिपदा को शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना (घटस्थापना) की जाती है, जिसे लेकर भक्तों और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार नवरात्रि पर कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, जो भक्तों के लिए सुख-समृद्धि के द्वार खोलेंगे।
कलश स्थापना का क्या है सबसे शुभ समय?
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि सही मुहूर्त में घटस्थापना की जाए, तो मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 19 मार्च को सुबह से ही प्रतिपदा तिथि लग जाएगी। विद्वानों का मानना है कि इस दिन अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करना सर्वोत्तम रहेगा। भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे राहुकाल का त्याग कर शुभ चौघड़िया में ही मां का आह्वान करें, ताकि उनकी पूजा निर्विघ्न संपन्न हो सके।
क्यों खास है इस बार की नवरात्रि?
हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का आध्यात्मिक और प्राकृतिक दोनों ही दृष्टि से बड़ा महत्व है। वसंत ऋतु के आगमन के साथ ही प्रकृति में भी बदलाव आते हैं और इसी समय मां की आराधना भक्तों के मन को शांति प्रदान करती है। इस बार 19 मार्च से शुरू होकर यह महापर्व मार्च के अंतिम सप्ताह तक चलेगा। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ अखंड ज्योति जलाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार, कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है, जिसमें सभी देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए इसकी स्थापना में शुद्धता और नियमों का पालन अनिवार्य है।
घटस्थापना की सरल विधि और तैयारी
नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भक्त अपने पूजा घर की साफ-सफाई करते हैं। कलश स्थापना के लिए मिट्टी के पात्र में जो (जौ) बोए जाते हैं और फिर तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधकर, उस पर आम के पत्ते और नारियल रखकर स्थापित किया जाता है। मां दुर्गा की चौकी को लाल कपड़े से सजाया जाता है। श्रद्धालुओं के लिए यह नौ दिन संयम, साधना और भक्ति के होते हैं। मंदिरों में भी मां के दर्शन के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं, ताकि 19 मार्च की सुबह से ही भक्त माता के जयकारों के साथ उत्सव की शुरुआत कर सकें।
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