वाशिंगटन | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ व्यापारिक रणनीति को न्यायपालिका से एक और करारा झटका लगा है। गुरुवार को अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत (US Court of International Trade) ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए 10% वैश्विक आयात शुल्क को ‘अवैध’ करार देते हुए तुरंत रद्द कर दिया है। अदालत ने न केवल इन शुल्कों को कानून के विरुद्ध बताया, बल्कि सरकार को आदेश दिया है कि वह आयातकों से वसूला गया पैसा वापस करे।
क्यों अवैध घोषित हुए टैरिफ?
ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी 2026 को दुनिया भर से आने वाले सामानों पर 10% का नया आयात शुल्क लागू किया था। इसके लिए प्रशासन ने 1974 के व्यापार कानून की धारा 122 का हवाला दिया था।
-
अदालत का फैसला: 2-1 के बहुमत से दिए गए फैसले में कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति ने धारा 122 का गलत इस्तेमाल किया है।
-
कानूनी आधार: धारा 122 राष्ट्रपति को केवल तब शुल्क लगाने की अनुमति देती है जब देश ‘गंभीर भुगतान संतुलन घाटे’ (Balance of Payments Deficit) का सामना कर रहा हो या डॉलर की कीमत को गिरने से बचाना हो। कोर्ट के अनुसार, अमेरिका फिलहाल ऐसे किसी संकट में नहीं है।
5 दिनों में लौटाने होंगे पैसे
अदालत ने सरकार को इस फैसले का पालन करने के लिए महज 5 दिनों का समय दिया है। उन सभी व्यापारियों और आयातकों को टैक्स का पैसा रिफंड करना होगा जिन्होंने इस अवधि के दौरान शुल्क का भुगतान किया था। गौरतलब है कि इस टैरिफ के खिलाफ 24 अमेरिकी राज्यों और कई छोटे व्यापारियों ने एकजुट होकर मुकदमा दायर किया था।
किन क्षेत्रों पर नहीं पड़ेगा असर?
राहत की बात यह है कि यह फैसला सभी शुल्कों पर लागू नहीं होता। निम्नलिखित क्षेत्रों पर लगे टैरिफ फिलहाल जारी रहेंगे:
-
स्टील (Steel)
-
एल्युमीनियम (Aluminum)
-
ऑटोमोबाइल सेक्टर (Automobile)
क्योंकि ये शुल्क अलग कानूनों के तहत लगाए गए हैं और इस विशेष कानूनी चुनौती के दायरे में नहीं आते।
प्रशासन की दलील और विशेषज्ञों की राय
ट्रंप प्रशासन ने दलील दी थी कि अमेरिका का वार्षिक व्यापार घाटा 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, इसलिए ये शुल्क जरूरी थे। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि व्यापार घाटा होना ‘भुगतान संतुलन संकट’ के बराबर नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप ने यह 10% टैरिफ उन पिछले भारी शुल्कों की भरपाई के लिए लगाया था जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में असंवैधानिक करार दिया था।
अब आगे क्या?
अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) इस फैसले को ‘यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स’ में चुनौती दे सकता है। वर्तमान में ये 10% टैरिफ 24 जुलाई 2026 को समाप्त होने वाले थे, लेकिन इस अदालती आदेश ने प्रशासन की भविष्य की व्यापारिक योजनाओं पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया