होर्मुज स्ट्रेट पर गहराया संकट: नाटो की नौसेना भेजने की तैयारी, क्या छिड़ेगी भयंकर समुद्री जंग?

दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ पर तनाव चरम पर है। ईरान द्वारा इस महत्वपूर्ण रास्ते को बंद किए जाने के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था डगमगा गई है। अब खबर है कि नाटो (NATO) देश इस क्षेत्र में अपनी नौसैनिक गतिविधियां तेज करने की योजना बना रहे हैं, ताकि जहाजों की आवाजाही को फिर से बहाल किया जा सके।

अंकारा बैठक में होगा बड़ा फैसला?

होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए नाटो के भीतर चर्चा जोरों पर है। सैन्य गठबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यदि जुलाई की शुरुआत तक यह समुद्री मार्ग नहीं खुलता, तो नाटो अपनी नौसेना तैनात कर सकता है। इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय 7-8 जुलाई को तुर्किये की राजधानी अंकारा में होने वाली नाटो शिखर बैठक में लिया जा सकता है। हालाँकि, अभी भी गठबंधन के सभी सदस्य देशों के बीच इस पर पूर्ण सहमति नहीं बन पाई है।

क्यों है होर्मुज स्ट्रेट इतना अहम?

होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘चोक पॉइंट’ है, जहाँ से वैश्विक तेल और एलएनजी (LNG) का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से तेहरान ने इसे बंद कर रखा है। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे कई देशों की आर्थिक विकास दर पर नकारात्मक असर पड़ा है।

ट्रंप और यूरोपीय देशों के बीच मतभेद

इस पूरे संकट के दौरान अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच दरार भी साफ नजर आ रही है। रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उन यूरोपीय देशों से बेहद नाराज हैं जिन्होंने स्ट्रेट को खोलने के लिए सक्रिय सैन्य मदद देने से इनकार कर दिया है।

  • स्पेन का रुख: स्पेन ने इस युद्ध का खुलकर विरोध किया है और अमेरिकी सेना को अपने सैन्य ठिकानों या एयरस्पेस के उपयोग की अनुमति देने से भी मना कर दिया है।

  • ब्रिटेन-फ्रांस की रणनीति: दूसरी ओर, फ्रांस और ब्रिटेन युद्ध के मैदान में सीधे उतरने के बजाय युद्ध की तीव्रता कम होने के बाद समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की एक अलग योजना पर काम कर रहे हैं।

क्या नाटो की योजना कारगर होगी?

नाटो के लिए यह कदम अपनी परंपरागत रणनीति से बड़ा बदलाव होगा। अब तक सहयोगियों का रुख यही था कि वे केवल तभी हस्तक्षेप करेंगे जब लड़ाई थम जाएगी। हालांकि, सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि हाल ही में अमेरिका द्वारा इसी तरह का एक सैन्य प्रयास विफल रहा था। अब दुनिया की नजरें अंकारा में होने वाली बैठक पर टिकी हैं कि क्या नाटो कोई ऐसा रास्ता निकाल पाएगा जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल हो सके, या यह क्षेत्र एक बड़े युद्ध की आग में झुलस जाएगा।

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