नई दिल्ली। मशहूर पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ की बहुचर्चित फिल्म ‘सतलुज’ (जिसका पुराना नाम ‘पंजाब 95’ था) को लेकर विवाद गहरा गया है। लंबे इंतजार के बाद इस फिल्म को हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज किया गया था, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए महज 48 घंटों के भीतर ही इसे प्लेटफॉर्म से हटाकर बैन कर दिया गया। अब इस कड़े फैसले के खिलाफ दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमिटी (DSGMC) खुलकर फिल्म के समर्थन में उतर आई है।
‘बैन करना गलत, हम घर-घर तक पहुंचाएंगे फिल्म’
एएनआई (ANI) की रिपोर्ट के अनुसार, DSGMC के अध्यक्ष ने फिल्म पर लगे प्रतिबंध को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और 1995 के दौर में पंजाब में हुए कथित मानवाधिकार उल्लंघनों व गैर-कानूनी अंतिम संस्कारों की जांच पर आधारित है। सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता, इसलिए कमिटी ने एलान किया है कि वे जल्द ही इस प्रतिबंधित फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित करेंगे।
स्कूलों और कॉलेजों में दी जाएगी जसवंत सिंह खालड़ा की सीख
कमिटी के अध्यक्ष ने सभी गुरुद्वारा सदस्यों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस फिल्म को डाउनलोड करके आम जनता को दिखाएं। इसके साथ ही, सिख शिक्षण संस्थानों और कॉलेजों के चेयरमैन के साथ एक अहम बैठक बुलाई गई है। DSGMC का प्लान है कि हर कॉलेज में जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन, उनके संघर्ष और उनकी विरासत पर विशेष सेमिनार आयोजित किए जाएं, ताकि आज की पीढ़ी एक अकेले सामाजिक कार्यकर्ता के समाज पर पड़े बड़े प्रभाव को समझ सके।
कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा और क्या है सतलुज नदी का राज?
यह फिल्म 1984 से 1995 के बीच पंजाब के उस दौर को दिखाती है, जब पुलिस हिरासत से हजारों लोग रहस्यमयी तरीके से लापता हो गए थे। बैंक डायरेक्टर और सामाजिक कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा ने जब इन लापता लोगों और लावारिस शवों के गैर-कानूनी अंतिम संस्कार की बहादुरी से जांच शुरू की, तो देश-दुनिया हिल गई। उन्होंने इस गंभीर मुद्दे को कनाडा की संसद में भी उठाया था। हालांकि, इस खुलासे के बाद सितंबर 1995 में खुद खालड़ा को उनके घर के बाहर से अगवा कर लिया गया और बाद में उनकी लाश सतलुज नदी से बरामद हुई थी।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया