क्या लगातार AC में रहने से कमजोर हो जाती हैं हड्डियां? जानें क्या यह वाकई बढ़ाता है गठिया का दर्द

नई दिल्ली (डिजिटल डेस्क): भीषण गर्मी से तुरंत राहत पाने के लिए आजकल घरों और ऑफिसों में एयर कंडीशनर (AC) का इस्तेमाल एक आम जरूरत बन चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एसी की यह ठंडी हवा आपकी सेहत, विशेषकर आपकी हड्डियों और जोड़ों को कैसे प्रभावित करती है?

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या एसी के अत्यधिक उपयोग से हड्डियां अंदर से खोखली या कमजोर हो जाती हैं? या फिर जिन्हें पहले से ही गठिया (Arthritis) की शिकायत है, क्या एसी उनकी इस समस्या को और गंभीर बना देता है? इस महत्वपूर्ण विषय पर देश के प्रतिष्ठित मैक्स हॉस्पिटल (पटपड़गंज, दिल्ली) के ऑर्थोपेडिक एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के वाइस चेयरमैन और हेड, डॉ. एल. तोमर ने विस्तार से वैज्ञानिक सच्चाई साझा की है।

क्या एसी सीधे तौर पर हड्डियों को कमजोर करता है?

डॉ. एल. तोमर के अनुसार, एयर कंडीशनर (AC) सीधे या प्रत्यक्ष रूप से हमारी हड्डियों को कमजोर नहीं करता है। हड्डियों की मजबूती मुख्य रूप से शरीर में कैल्शियम, विटामिन डी3, संतुलित आहार, नियमित शारीरिक व्यायाम और हार्मोनल संतुलन पर निर्भर करती है।

दोष एसी का नहीं, लाइफस्टाइल का है: समस्या तब शुरू होती है जब कोई व्यक्ति अपनी दिनचर्या का अधिकांश समय (घर, ऑफिस और कार में) केवल एसी के भीतर ही बिताता है। ऐसा करने से वह प्रकृति और सूर्य की रोशनी (धूप) के संपर्क में नहीं आ पाता। लंबे समय तक धूप से दूर रहने के कारण शरीर में विटामिन डी की भारी कमी हो जाती है। जब शरीर में विटामिन डी कम होगा, तो भोजन से कैल्शियम का अवशोषण (Absorption) नहीं हो पाएगा, जिससे अंततः हड्डियां कमजोर होने लगेंगी और ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाएगा।

क्या ठंडी हवा से बढ़ता है गठिया (अर्थराइटिस) का खतरा?

गठिया या जोड़ों के दर्द से जूझ रहे मरीजों में अक्सर यह देखा गया है कि एसी चालू होते ही उनका दर्द बढ़ जाता है। इस पर एक्सपर्ट की राय बेहद स्पष्ट है:

  • स्थायी नुकसान नहीं: एसी कभी भी गठिया का मूल कारण नहीं बनता और न ही यह जोड़ों को कोई स्थायी (Permanent) नुकसान पहुंचाता है।

  • अकड़न की वजह: जब हम बहुत कम तापमान वाले ठंडे वातावरण में बैठते हैं, तो शरीर की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और मांसपेशियां जकड़ जाती हैं। इस मांसपेशियों की जकड़न के कारण जोड़ों में दर्द, अकड़न (Stiffness) और असहजता महसूस होने लगती है। खासकर ओल्ड एज या ऑस्टियोअर्थराइटिस (Osteoarthritis) के मरीजों को तापमान में गिरावट के कारण यह दर्द अधिक महसूस होता है, जिसका संबंध बीमारी के बढ़ने से नहीं बल्कि केवल ठंडक से है।

हड्डियों को फौलाद बनाए रखने के लिए एक्सपर्ट के 4 सुनहरे टिप्स

यदि आपका काम ऐसा है जहां आपको लंबे समय तक एसी में बैठना ही पड़ता है, तो डॉ. एल. तोमर के इन सुझावों को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें:

1. रोजाना 10 मिनट की ‘धूप थेरेपी’ है जरूरी

शरीर में नेचुरल विटामिन डी के स्तर को बनाए रखने के लिए प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट धूप में जरूर बैठें।

  • सही समय: सुबह 7:00 से 8:00 बजे के बीच की गुनगुनी धूप विटामिन डी के लिए सबसे सर्वोत्तम मानी जाती है। दोपहर 12:00 से 4:00 बजे के बीच की तेज धूप से बचें, क्योंकि इससे सनबर्न या टैनिंग की समस्या हो सकती है।

2. डाइट में शामिल करें कैल्शियम और विटामिन डी रिच फूड्स

हड्डियों के घनत्व (Bone Density) को मजबूत रखने के लिए अपने खानपान में सुधार करें।

  • क्या खाएं: रोजाना दूध का सेवन करें। इसके अलावा डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे पनीर, छाछ और दही को शामिल करें। विटामिन डी की कमी को प्राकृतिक रूप से पूरा करने के लिए शुद्ध देसी घी को संतुलित मात्रा में अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं।

3. वॉक और फिजिकल एक्टिविटी से नहीं आएगी जकड़न

हड्डियों और जोड़ों को सक्रिय रखना बेहद जरूरी है ताकि ठंडी हवा का उन पर प्रतिकूल असर न पड़े।

  • सलाह: यदि आप भारी वर्कआउट या जिम नहीं जा सकते, तो रोजाना कम से कम 20-30 मिनट की सैर (वॉक) जरूर करें। इसके अलावा, ऑफिस में काम के दौरान लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठने से बचें; हर एक घंटे में अपनी सीट से उठकर थोड़ा स्ट्रेचिंग करें।

4. एसी का तापमान हमेशा रखें ‘डिफॉल्ट’

कमरे को शिमला बनाने की होड़ में एसी का तापमान बहुत कम सेट करने से बचें।

  • सही तापमान: सरकारी गाइडलाइंस और स्वास्थ्य मानकों के अनुसार, एसी का आदर्श तापमान हमेशा 24°C (24 डिग्री सेल्सियस) पर ही सेट रखना चाहिए। इस तापमान पर शरीर का थर्मल संतुलन बना रहता है और मांसपेशियों में अकारण अकड़न या जोड़ों में दर्द की समस्या नहीं होती।

Check Also

डेंगू में अचानक गिरने लगे प्लेटलेट्स? तुरंत रिकवरी के लिए अपनाएं ये 5 असरदार तरीके; डॉक्टर से लेकर डाइट तक बड़े काम की है खबर

डेंगू वायरस शरीर में प्रवेश करते ही बोन मैरो (Bone Marrow) पर असर डालता है, …