नशे के सौदागरों की अब खैर नहीं! योगी सरकार का मास्टर प्लान तैयार, हर जिले में चलेगा ‘सफाई’ अभियान; जानें क्या है पूरी रणनीति

लखनऊ, डेस्क। उत्तर प्रदेश को पूरी तरह ‘नशामुक्त’ बनाने के लिए योगी सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और सख्त अभियान शुरू करने का फैसला किया है। नशे के अवैध कारोबार और तस्करी को जड़ से मिटाने के लिए सरकार ने न केवल अपराधियों की धरपकड़, बल्कि उनकी आर्थिक कमर तोड़ने की भी तैयारी कर ली है। सोमवार को लखनऊ में मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में ‘नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर’ (एनकॉर्ड) की उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें प्रदेश से नशे के खात्मे के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर मुहर लगाई गई।

हर जिले में हर महीने होगी 2 बैठकें, अफसरों को सख्त निर्देश

मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि अब कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। नशा उन्मूलन अभियान की गंभीरता को देखते हुए सभी जिलों में हर महीने कम से कम दो एनकॉर्ड (Narco-Coordination) बैठकें अनिवार्य कर दी गई हैं। जिन जिलों के प्रदर्शन में ढिलाई मिलेगी, वहां के संबंधित अधिकारियों पर कड़ी गाज गिर सकती है। सरकार का मुख्य लक्ष्य युवाओं को इस दलदल से बचाना और तस्करी के जाल को पूरी तरह ध्वस्त करना है।

संपत्ति जब्ती और रडार पर ‘हाई वैल्यू टारगेट’

योगी सरकार का यह अभियान केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अपराधियों के साम्राज्य को मिट्टी में मिलाने की योजना है:

  • संपत्ति की कुर्की: एनडीपीएस एक्ट और सफेमा (SAFEMA) के तहत चिन्हित नशे के सौदागरों की अवैध संपत्तियों को जब्त किया जाएगा।

  • 20 बड़े टारगेट चिन्हित: पुलिस कमिश्नरों और कप्तानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में 20 ऐसे ‘हाई वैल्यू टारगेट’ (बड़े तस्कर) चिन्हित करें, जो नशे के सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहे हैं।

  • अफीम की खेती पर नजर: जिन जिलों में वैध अफीम की खेती होती है, वहां पुलिस, राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें अचानक भौतिक सत्यापन करेंगी ताकि अवैध कालाबाजारी रोकी जा सके।

स्कूल-कॉलेज और हॉस्टल के पास ‘स्पेशल पहरा’

सरकार ने युवाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए शिक्षण संस्थानों के पास विशेष निगरानी रखने को कहा है।

  • स्कूलों, कॉलेजों और हॉस्टलों के पास चिह्नित ‘हॉटस्पॉट्स’ पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी।

  • कोडीन कफ सिरप की अवैध बिक्री रोकने के लिए अब ऑफलाइन के बजाय ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम तैयार किया जाएगा।

  • भांग की दुकानों की संख्या की समीक्षा होगी और क्षेत्रीय आवश्यकता के आधार पर उन्हें सीमित किया जाएगा ताकि आड़ में गांजा की बिक्री न हो सके।

अब तक की बड़ी कार्रवाई: आंकड़ों की जुबानी

बैठक में अब्दुल हमीद (IG, ANTF) ने बताया कि सरकार की सख्ती के परिणाम दिखने लगे हैं:

  • भारी मात्रा में बरामदगी: साल 2022 से अब तक लगभग 925 करोड़ रुपये मूल्य के नशीले पदार्थों का निस्तारण (Disposal) किया जा चुका है।

  • गिरफ्तारी: सिर्फ साल 2026 के शुरुआती दो महीनों में ही 1,176 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 6,000 किलो से ज्यादा नशीला माल पकड़ा गया।

  • जागरूकता अभियान: लखनऊ में ‘यूपी दिवस 2026’ और ‘राष्ट्रीय जम्बूरी’ के दौरान हजारों लोगों को नशा न करने की ‘ई-शपथ’ दिलाई गई।

जनभागीदारी और नशामुक्ति केंद्र

सरकार केवल डंडे के बल पर नहीं, बल्कि समाज की मदद से भी नशे को खत्म करना चाहती है। इसके लिए एनजीओ द्वारा संचालित डी-एडिक्शन सेंटरों की नियमित जांच होगी। साथ ही सिनेमाघरों, रेडियो चैनलों और सोशल मीडिया के जरिए ‘नशामुक्त भारत’ का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।

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