
अयोध्या में प्रभु श्री रामलला के भव्य और दिव्य जन्मभूमि मंदिर की पूजा व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित, मर्यादित तथा प्राचीन वैदिक परंपराओं के अनुकूल बनाने की दिशा में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा निर्णय लिया है। स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त से राम मंदिर के गर्भगृह और संपूर्ण परिसर में सेवा देने वाले सभी पुजारियों (अर्चकों) के लिए एक नया और अनिवार्य ड्रेस कोड लागू होने जा रहा है।
इस नई व्यवस्था के तहत अब राम मंदिर के सभी पुजारी रामानंदाचार्य परंपरा का पालन करते हुए बिना सिले हुए पीले रंग के रेशमी वस्त्र (पीताम्बरी) धारण करके ही गर्भगृह में प्रवेश करेंगे और भगवान श्री रामलला की पूजा-अर्चना संपन्न कराएंगे। 22 जनवरी 2024 को हुए ऐतिहासिक ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह के बाद से पुजारियों के लिए ‘चौबंदी’ (सिला हुआ वस्त्र) पहनने का नियम निर्धारित किया गया था, जिसे अब धार्मिक समिति के विचार-विमर्श के बाद बदलकर पूर्णतः शास्त्रीय स्वरूप दे दिया गया है।
रामानंदाचार्य परंपरा और वैदिक आचार संहिता का पालन
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की धार्मिक न्यास समिति की उच्चस्तरीय बैठक में शास्त्रों और पूर्वाचार्यों द्वारा निर्धारित आचार संहिता के गहन अध्ययन के बाद यह निर्णय लिया गया है। वैष्णव संप्रदाय और विशेषकर स्वामी रामानंदाचार्य परंपरा में भगवान विष्णु व श्री राम की सेवा-पूजा के दौरान सिलाई वाले वस्त्रों के बजाय बिना सिले हुए पीले वस्त्रों को ही परम पवित्र माना गया है।
नए ड्रेस कोड के तहत गर्मी और सामान्य मौसम में पुजारियों के लिए नीचे पीले रंग की धोती और ऊपर पीला रेशमी उत्तरीय (अंगवस्त्र) पहनना अनिवार्य होगा। मौसम में बदलाव के साथ वस्त्र का फैब्रिक जरूर बदलेगा, लेकिन उसका रंग केवल पीला (पीत) ही रहेगा। सर्दियों के मौसम में पुजारियों के लिए पीले रंग के ही ऊनी बिना सिले वस्त्रों की व्यवस्था ट्रस्ट द्वारा की जाएगी।
सामान्य व्यवहार में धुले हुए कपड़े पहनना आम बात है, लेकिन देवी-देवताओं की उपासना और विशेष रूप से गर्भगृह की सेवा के लिए शास्त्रों में विशुद्ध पीताम्बरी वस्त्रों का ही विधान है। इसी धार्मिक मर्यादा का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी मुख्य पुजारियों, 18 प्रशिक्षित अर्चकों और छह परिक्रमा मंदिरों में सेवा देने वाले सहयोगियों के लिए यह निर्देश लागू कर दिया गया है।
पूजा नियमावली और दिनचर्या को दिया जा रहा स्थायी रूप
ट्रस्ट की धार्मिक समिति केवल वेशभूषा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राम मंदिर की संपूर्ण पूजा प्रणाली, दैनिक आचार-विचार, भगवान के अलग-अलग समय के श्रृंगार, बाल भोग, आरती विधियों और उत्सवों के संचालन के लिए एक विस्तृत ‘पूजा नियमावली’ (Manual) तैयार कर रही है।
ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन और धार्मिक समिति के सदस्य महन्त दिनेन्द्र दास तथा राजकुमार दास ने बताया कि पुजारियों की सेवा सुविधा और मंदिर परिसर की शुचिता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। पुजारियों को मंदिर परिसर में प्रवेश के समय अपने सामान्य वस्त्रों को बदलकर निर्धारित पोशाक पहनने के लिए परिसर के भीतर ही चेंजिंग रूम और लॉकर सुविधा दी गई है। इसके साथ ही, झूलनोत्सव, पालकी यात्रा और आने वाले आगामी पर्वों के दौरान श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के लिए भी नए दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं।
15 अगस्त से लागू हो रही यह नई एकरूप वेशभूषा न केवल राम मंदिर की प्राचीन आध्यात्मिक भव्यता को दर्शाएगी, बल्कि देश-विदेश से आने वाले लाखों रामभक्तों को भी त्रेतायुगीन संस्कृति और परंपरा की झलक प्रदान करेगी।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया