RSS प्रचारक से शुभेंदु सरकार में ‘नंबर 2’ तक: कौन हैं दिलीप घोष? जिनके नेतृत्व में बंगाल में खिला ‘कमल’, अब मिली मंत्री पद की कमान

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में ‘सोनार बांग्ला’ के संकल्प के साथ भाजपा की नई सरकार ने कामकाज संभाल लिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ जिन पांच मंत्रियों ने शपथ ली, उनमें सबसे कद्दावर और चर्चित नाम दिलीप घोष का है। खड़गपुर सदर से विधायक और पूर्व सांसद दिलीप घोष को बंगाल में भाजपा के उत्थान का ‘शिल्पकार’ माना जाता है।

RSS की पाठशाला से सत्ता के गलियारों तक का सफर

दिलीप घोष का राजनीति में आना महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि दशकों की तपस्या का परिणाम है। 1984 में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचारक के रूप में अपना जीवन शुरू किया था। 1999 से 2007 तक उन्होंने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में संघ की विचारधारा को सींचा। पूर्व संघ प्रमुख केएस सुदर्शन के सहायक रह चुके घोष साल 2014 में भाजपा में शामिल हुए और महज एक साल के भीतर उन्हें बंगाल भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया।

77 साल के रिकॉर्ड को तोड़ने वाले ‘फायरब्रांड’ नेता

दिलीप घोष की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में है जो अपनी बेबाक बयानबाजी और जमीनी पकड़ के लिए जाने जाते हैं। उनके नाम कई बड़े कीर्तिमान दर्ज हैं:

  • ऐतिहासिक जीत: उन्होंने खड़गपुर सदर सीट से सात बार के विधायक ज्ञान सिंह सोहनपाल को हराकर राजनीति में अपनी धमक दिखाई थी।

  • वोट शेयर का जादू: दिलीप घोष के अध्यक्ष रहते हुए बंगाल में भाजपा का वोट शेयर 10% से उछलकर सीधा 40% के करीब पहुंच गया।

  • विपक्ष का दर्जा: उन्हीं के नेतृत्व में 2019 में भाजपा ने 18 लोकसभा सीटें जीतीं और 2021 में 77 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल बनी।

सादगी और संपत्ति: 3 करोड़ के मालिक हैं घोष

इंजीनियरिंग में डिप्लोमा रखने वाले दिलीप घोष अपनी सादगी के लिए कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय हैं। चुनावी हलफनामे के अनुसार, दिलीप घोष और उनके परिवार की कुल संपत्ति लगभग 3.07 करोड़ रुपये है। इसमें करीब 56.74 लाख रुपये की चल संपत्ति और 2.55 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है। उनके पास 14 लाख रुपये की एक चार पहिया गाड़ी भी है।

जंगलमहल और उत्तर बंगाल के ‘किंगमेकर’

नई सरकार में दिलीप घोष को शामिल करना भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। दिलीप घोष की जंगलमहल और उत्तर बंगाल के आदिवासी क्षेत्रों में जबरदस्त पकड़ है। भाजपा को 2026 की प्रचंड जीत दिलाने में इन क्षेत्रों का बड़ा योगदान रहा है। माना जा रहा है कि उन्हें गृह विभाग का कोई महत्वपूर्ण प्रभार या पंचायत राज जैसा विभाग सौंपा जा सकता है ताकि वे 2029 के मिशन के लिए संगठन और सरकार के बीच सेतु का काम कर सकें।

मोदी-शाह की मौजूदगी में भव्य शपथ ग्रहण

शनिवार को कोलकाता में आयोजित इस ऐतिहासिक समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के साथ-साथ भाजपा शासित राज्यों के 20 मुख्यमंत्री मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि देकर की गई। इस दौरान पीएम मोदी ने बुजुर्ग कार्यकर्ता माखनलाल सरकार के पैर छूकर यह संदेश दिया कि भाजपा में कार्यकर्ताओं का सम्मान ही सर्वोपरि है।

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