नई दिल्ली। रत्न शास्त्र की दुनिया में मोती (Pearl) को एक अत्यंत सौम्य और प्रभावशाली रत्न माना गया है। सफेद रंग का यह रत्न न केवल सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि इसका सीधा संबंध हमारे मन और भावनाओं के स्वामी चंद्रमा से है। मोती शांति और शीतलता का प्रतीक है, लेकिन इसे धारण करना जितना सरल दिखता है, इसके नियम उतने ही कड़े हैं। यदि बिना सही जानकारी के मोती पहना जाए, तो यह मानसिक अशांति और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण भी बन सकता है।
आइए जानते हैं मोती धारण करने से पहले ध्यान रखने योग्य 5 सबसे महत्वपूर्ण बातें और इसे पहनने का सही तरीका।
मोती पहनने से पहले इन 5 बातों का रखें खास ख्याल
1. सही धातु और सही उंगली का चुनाव
मोती को कभी भी सोने (Gold) में नहीं जड़वाना चाहिए। रत्न शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा की शीतलता चांदी में ही सुरक्षित रहती है, इसलिए मोती को हमेशा चांदी की अंगूठी में ही पहनना चाहिए। साथ ही, इसे हमेशा हाथ की सबसे छोटी उंगली यानी कनिष्ठा (Little Finger) में धारण करना चाहिए।
2. इन रत्नों के साथ भूलकर भी न पहनें मोती
रत्नों का आपसी तालमेल बहुत मायने रखता है। मोती को कभी भी गोमेद या नीलम के साथ नहीं पहनना चाहिए। चंद्रमा का राहु (गोमेद) और शनि (नीलम) के साथ शत्रुतापूर्ण संबंध होता है। यदि इन रत्नों के साथ मोती पहना जाए, तो यह जीवन में भारी तनाव और दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।
3. राशि के अनुसार ही करें धारण
हर किसी के लिए मोती शुभ नहीं होता। बिना कुंडली दिखाए इसे पहनना ‘इमोशनल इम्बैलेंस’ पैदा कर सकता है।
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शुभ राशियां: मेष, कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वालों के लिए मोती अक्सर वरदान साबित होता है।
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सावधान रहें: मिथुन, कन्या, धनु, मकर और कुंभ राशि वालों को बिना विशेषज्ञ की सलाह के मोती पहनने से बचना चाहिए।
4. शुद्धिकरण और मंत्र जाप है अनिवार्य
बाजार से लाकर मोती सीधे उंगली में नहीं डालना चाहिए। धारण करने से पहले इसे गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध करना जरूरी है। इसके बाद “ॐ सोमाय नमः” या चंद्र देव के बीज मंत्र का 108 बार जाप करके ही इसे सिद्ध करना चाहिए, तभी यह पूर्ण फल देता है।
5. धारण करने का सही समय
चूंकि मोती का स्वामी चंद्रमा है, इसलिए इसे धारण करने के लिए सोमवार (Monday) का दिन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसे शुक्ल पक्ष के सोमवार को सुबह सूर्योदय के समय पहनना सबसे ज्यादा फलदायी होता है।
मोती धारण करने की सही विधि (Step-by-Step)
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खरीद: कम से कम 5 से 7 रत्ती का असली बसरा या दक्षिण सागर का मोती लें।
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शुद्धिकरण: सोमवार की सुबह स्नान के बाद अंगूठी को कच्चे दूध, शहद और गंगाजल के मिश्रण में कुछ देर के लिए रख दें।
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पूजन: शिवजी या चंद्र देव की मानसिक पूजा करें और सफेद फूल अर्पित करें।
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मंत्र: अंगूठी को हाथ में लेकर मंत्र का जाप करें।
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धारण: मंत्र जाप के बाद पूरी श्रद्धा के साथ इसे कनिष्ठा उंगली में पहन लें।
विशेष टिप: यदि आपको बहुत ज्यादा गुस्सा आता है या मन अशांत रहता है, तो मोती आपके लिए रामबाण साबित हो सकता है, लेकिन पहनने से पहले अपनी कुंडली की जांच अवश्य करवाएं।
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