‘मेरे चैंबर से बाहर निकल जाओ…’: जब सीनियर जज की डांट ने बदल दी CJI सूर्यकांत की किस्मत

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को उस वक्त माहौल बेहद दिलचस्प हो गया जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने अपने शुरुआती करियर का एक अनसुना और प्रेरक किस्सा साझा किया। सीजेआई ने बताया कि कैसे एक सीनियर जज की ‘डांट’ और ‘झिड़की’ ने उनके न्यायिक अधिकारी बनने के सपने को खत्म कर दिया था, लेकिन उसी घटना ने उन्हें आज न्यायपालिका के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचा दिया।

दिल्ली न्यायिक सेवा मामले की सुनवाई के दौरान साझा की यादें

यह वाकया तब सामने आया जब सीजेआई सूर्यकांत की पीठ दिल्ली न्यायिक सेवा परीक्षा से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता खुद सुप्रीम कोर्ट की एक एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) थीं। जब सीजेआई को पता चला कि याचिकाकर्ता पहले से ही एक वकील के रूप में स्थापित हैं, तो उन्होंने उनसे पूछा कि वे न्यायिक अधिकारी क्यों बनना चाहती हैं? इसी चर्चा के दौरान सीजेआई ने अपने जीवन का वह मोड़ याद किया जिसने उनकी दिशा बदल दी थी।

लिखित परीक्षा पास थी, लेकिन जज ने दिखाई थी चैंबर की राह

सीजेआई ने बताया कि जब वे कानून की पढ़ाई के अंतिम वर्ष में थे, तब उन्होंने न्यायिक सेवा की लिखित परीक्षा पास कर ली थी। वे इंटरव्यू की तैयारी कर रहे थे और इसी दौरान उन्होंने हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस भी शुरू कर दी थी। एक वैवाहिक विवाद के मामले में उन्होंने एक सीनियर जज के सामने अपना पहला केस जीता था।

बाद में, जब इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू हुई, तो वही सीनियर जज इंटरव्यू पैनल का हिस्सा बने। जब जज ने उम्मीदवारों की लिस्ट में सूर्यकांत का नाम देखा, तो उन्होंने उन्हें अपने चैंबर में बुलाया। सीजेआई ने याद करते हुए कहा, “उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या तुम वाकई न्यायिक अधिकारी बनना चाहते हो? जैसे ही मैंने ‘हां’ कहा, उन्होंने चिल्लाकर कहा- मेरे चैंबर से बाहर निकल जाओ!”

“कांपते हुए बाहर आया, सपने चकनाचूर हो गए थे”

सीजेआई सूर्यकांत ने उस पल की घबराहट साझा करते हुए बताया कि वे इस व्यवहार से बुरी तरह हिल गए थे। उन्हें लगा कि उनका करियर शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया। लेकिन अगले दिन कहानी ने नया मोड़ लिया। जज ने उन्हें फिर बुलाया और कहा, “अगर तुम अधिकारी बनना चाहते हो, तो तुम्हारा स्वागत है। लेकिन मेरी निजी सलाह है कि तुम न्यायिक अधिकारी मत बनो। बार (वकील समुदाय) तुम्हारा इंतजार कर रहा है।”

वकालत से शुरू हुआ ‘शिखर’ तक का सफर

जज की उस सलाह को मानकर सूर्यकांत ने इंटरव्यू न देने का कठिन फैसला किया। उन्होंने यह बात अपने माता-पिता से भी छिपाई और वकालत में ही जुटे रहे। उनका यह फैसला मील का पत्थर साबित हुआ। 1984 में वकालत शुरू करने वाले सूर्यकांत 2000 में हरियाणा के महाधिवक्ता बने, 2004 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जज नियुक्त हुए और आज वे देश के मुख्य न्यायाधीश हैं।

अंत में सीजेआई ने याचिकाकर्ता वकील से मुस्कुराते हुए पूछा, “अब आप बताइए, क्या मेरा वह फैसला गलत था या सही?” इस किस्से के जरिए उन्होंने वकील को संदेश दिया कि वकालत के क्षेत्र में भी असीम संभावनाएं हैं और उन्हें उच्च न्यायिक सेवा की तैयारी करनी चाहिए।

Check Also

मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे से पहले विवाद: USCIRF ने की RSS पर बैन की मांग, PM मोदी का भी लिया नाम

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के आगामी अमेरिका दौरे को लेकर अंतरराष्ट्रीय …