तमिलनाडु में जम्मू-कश्मीर जैसा ‘बेमेल’ फॉर्मूला? TVK को रोकने के लिए DMK-AIADMK में महामंथन

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति उस मोड़ पर आ खड़ी हुई है जिसकी कल्पना चंद महीनों पहले तक असंभव थी। राज्य में दशकों से एक-दूसरे की धुर विरोधी रहीं द्रविड़ पार्टियां—DMK और AIADMK—क्या सत्ता के गलियारों में हाथ मिलाने जा रही हैं? राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि थलपति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कजगम’ (TVK) के बढ़ते प्रभाव को कुचलने के लिए दोनों दल साल 2015 के जम्मू-कश्मीर वाले ‘BJP-PDP’ फॉर्मूले को दोहरा सकते हैं।

जब मिले थे ‘उत्तर और दक्षिण ध्रुव’: J&K की यादें

साल 2015 में जम्मू-कश्मीर में जब धुर दक्षिणपंथी भाजपा और नरम अलगाववादी झुकाव वाली पीडीपी ने गठबंधन किया था, तो मुफ्ती मोहम्मद सईद ने इसे ‘उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव का मिलन’ कहा था। हालांकि, वह गठबंधन वैचारिक विरोधाभासों के कारण लंबे समय तक नहीं टिक सका। अब तमिलनाडु में भी वैसी ही स्थिति दिख रही है, जहां द्रविड़ राजनीति के दो स्तंभ (DMK-AIADMK) एक ‘तीसरे विकल्प’ यानी विजय को रोकने के लिए अपनी 50 साल की दुश्मनी भुलाने को मजबूर नजर आ रहे हैं।

विजय का ‘MGR 2.0’ खौफ और त्रिशंकु विधानसभा

2026 के विधानसभा चुनाव नतीजों ने द्रविड़ किलों को हिलाकर रख दिया है। 234 सीटों वाली विधानसभा में विजय की TVK 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े (118) से 5 कदम दूर है।

  • TVK: 108 सीटें (कांग्रेस के समर्थन के साथ 113)

  • DMK: 59 सीटें

  • AIADMK: 47 सीटें

  • बहुमत का आंकड़ा: 118

स्टालिन की हार और DMK-AIADMK का गिरता ग्राफ दोनों पार्टियों के लिए अस्तित्व का संकट बन गया है। द्रविड़ नेताओं को डर है कि यदि विजय सत्ता में आए, तो वे अगले ‘MGR’ साबित होंगे, जिन्होंने दशकों तक द्रविड़ राजनीति पर एकछत्र राज किया था।

इनसाइड स्टोरी: AIADMK का प्रस्ताव और स्टालिन का दांव

सूत्रों के मुताबिक, AIADMK ने खुद DMK से संपर्क साधकर ‘बाहर से समर्थन’ देने का प्रस्ताव रखा है। योजना यह है कि AIADMK सरकार बनाए और DMK उसे समर्थन दे, ताकि विजय को सत्ता से दूर रखा जा सके। 7 मई को हुई DMK विधायकों की बैठक में स्टालिन को ‘अस्थिरता रोकने’ के लिए कोई भी बड़ा फैसला लेने के लिए अधिकृत कर दिया गया है। यह संकेत है कि स्टालिन अब ‘असंभव’ को हकीकत में बदलने की तैयारी कर रहे हैं।

क्या होगा अंजाम?

गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आरलेकर ने फिलहाल विजय को बहुमत साबित करने के लिए समय दिया है, लेकिन बहुमत का जुगाड़ न होने पर राज्य में ‘राष्ट्रपति शासन’ का खतरा मंडरा रहा है। दूसरी ओर, TVK ने धमकी दी है कि यदि उनके जनादेश के साथ खिलवाड़ हुआ, तो उनके सभी 108 विधायक सामूहिक इस्तीफा दे देंगे, जिससे राज्य फिर से चुनाव की ओर बढ़ जाएगा।

अगर DMK और AIADMK साथ आते हैं, तो यह भारतीय राजनीति का इस दशक का सबसे बड़ा ‘यू-टर्न’ होगा। हालांकि, इसका सबसे बड़ा जोखिम यह है कि इससे विपक्ष की जगह पूरी तरह खाली हो जाएगी, जिसे भरने के लिए विजय की लोकप्रियता पहले से ही चरम पर है।

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