Headphone Side Effects: क्या आप भी घंटों लगाए रखते हैं हेडफोन? कान के पर्दे हो सकते हैं डैमेज, ENT डॉक्टर से जानें बचाव का ’60/60 रूल’

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और डिजिटल दौर में हेडफोन या ईयरफोन हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन गए हैं। ऑफिस की मीटिंग हो, ऑनलाइन क्लास या फिर सोशल मीडिया पर रील्स का चस्का, लोग घंटों तक कानों में ईयरबड्स ठूंसकर बैठे रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह आदत आपको हमेशा के लिए बहरा बना सकती है? ईएनटी (ENT) विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हेडफोन का अत्यधिक इस्तेमाल न केवल कान में दर्द पैदा करता है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल रहा है।

सीधे कान के पर्दे (Eardrum) पर होता है प्रहार

जब हम हेडफोन लगाकर तेज आवाज में गाने सुनते हैं, तो ध्वनि की तरंगें सीधे हमारे ईयरड्रम से टकराती हैं। लंबे समय तक ऐसा होने से कान के पर्दे फटने या कमजोर होने का डर रहता है। इसके अलावा, हेडफोन के प्रेशर से कान के आसपास की नसों में खिंचाव आता है, जिससे कान के साथ-साथ सिर में भी असहनीय दर्द शुरू हो जाता है।

हेडफोन के इस्तेमाल से होने वाले गंभीर नुकसान

ईएनटी डॉक्टर प्रांशू मेहता के अनुसार, घंटों हेडफोन लगाने से शरीर पर ये दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं:

  • स्थाई सिरदर्द: कान में होने वाले दर्द का सीधा असर नसों के जरिए सिर तक पहुंचता है, जो धीरे-धीरे माइग्रेन या परमानेंट सिरदर्द का रूप ले सकता है।

  • ईयर इंफेक्शन का खतरा: विशेषकर रबड़ वाले ईयरफोन कान के अंदर हवा के प्रवाह को रोक देते हैं। इससे कान के अंदर पसीना और गंदगी जमा होती है, जिससे फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है।

  • सुनने की क्षमता में कमी: तेज आवाज में सुनने की आदत के कारण कान की कोशिकाएं डैमेज हो जाती हैं, जिससे व्यक्ति को सामान्य आवाजें सुनाई देना बंद हो जाती हैं और वह ‘ऊंचा’ सुनने लगता है।

  • कान में सूजन: अगर हेडफोन की पैडिंग सख्त है या डिजाइन कान के अनुकूल नहीं है, तो बाहरी कान में सूजन और लालिमा आ सकती है।

बचाव के लिए अपनाएं डॉक्टर का ’60/60 रूल’

अगर आपका काम ऐसा है कि हेडफोन लगाना मजबूरी है, तो डॉक्टर का बताया यह 60/60 नियम आपके कानों को बचा सकता है:

  1. 60% वॉल्यूम: अपने डिवाइस की आवाज को कभी भी उसकी कुल क्षमता के 60 प्रतिशत से ऊपर न ले जाएं। अधिकतर फोन ‘सेफ वॉल्यूम’ की चेतावनी देते हैं, उसे नजरअंदाज न करें।

  2. 60 मिनट की लिमिट: एक बार में हेडफोन का इस्तेमाल केवल 60 मिनट यानी एक घंटे तक ही करें। इसके बाद कम से कम 15-20 मिनट का ब्रेक लें ताकि कानों को प्राकृतिक हवा मिल सके और नसों को आराम मिले।

इन लक्षणों को देखते ही तुरंत पहुंचें ENT डॉक्टर के पास

कानों की समस्या को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। यदि आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस हों, तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें:

  • कानों में हर वक्त साय-साय या कुछ बजने जैसी आवाज (Tinnitus) आना।

  • हेडफोन हटाने के बाद भी कान में भारीपन या दर्द बने रहना।

  • सामान्य बातचीत सुनने में कठिनाई महसूस होना।

  • कान के अंदर से तरल पदार्थ निकलना या खुजली होना।

Check Also

हार्ट अटैक का खतरा करना है कम? खान-पान और वर्कआउट के अलावा रोज करें ये 5 जरूरी काम, दिल रहेगा हमेशा मजबूत और हेल्दी

आज की तेज रफ्तार और तनावभरी जिंदगी में दिल की बीमारियां (Cardiovascular Diseases) किसी भी …