गोरखपुर | उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को अपने गृह जनपद गोरखपुर में ‘रंगोत्सव’ को बेहद खास बनाने जा रहे हैं। बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर, सीएम योगी भगवान नृसिंह की ऐतिहासिक और पारंपरिक रंगभरी शोभायात्रा का नेतृत्व करेंगे। श्री होलिकोत्सव समिति और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बैनर तले निकलने वाली यह यात्रा केवल रंगों का त्यौहार नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही सामाजिक समरसता और एकजुटता की एक अनूठी मिसाल है।
घंटाघर से निकलेगी भक्ति और रंगों की टोली
बुधवार सुबह घंटाघर से शुरू होने वाली इस शोभायात्रा की ख्याति अब मथुरा-वृंदावन की होली जैसी हो चुकी है। करीब 5 किलोमीटर से अधिक लंबी इस यात्रा में भगवान नृसिंह के रथ पर सवार होकर योगी आदित्यनाथ जनता के बीच पहुंचेंगे।
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बिना भेदभाव का उत्सव: इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ऊंच-नीच और जाति-पाति के भेदभाव को भुलाकर समाज को एक सूत्र में पिरोना है।
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रंगों की बौछार: रथ पर सवार गोरक्षपीठाधीश्वर खुद रंगों में सराबोर होकर जनता पर गुलाल और फूलों की वर्षा करेंगे।
नानाजी देशमुख ने रखी थी इस परंपरा की नींव
इस भव्य शोभायात्रा का इतिहास गौरवशाली है। इसकी शुरुआत 1944 में आरएसएस के प्रचारक नानाजी देशमुख ने की थी।
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इतिहास: नानाजी के अनुरोध पर गोरक्षपीठ इस अभियान से जुड़ी। पहले ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के निर्देश पर महंत अवेद्यनाथ ने इसका प्रतिनिधित्व किया।
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योगी का नेतृत्व: 1996 से योगी आदित्यनाथ ने इसकी कमान संभाली और इसे पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश का विशिष्ट पर्व बना दिया।
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कोरोना काल के बाद वापसी: 2020 और 2021 में कोरोना के कारण वे इसमें शामिल नहीं हो सके थे, लेकिन 2022 से वे पुनः इस परंपरा को नई ऊर्जा दे रहे हैं।
भस्म से तिलक और फाग गीतों की गूँज
शोभायात्रा से पहले गोरखनाथ मंदिर में पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी और साधु-संतों के साथ होलिकादहन की राख (भस्म) से तिलक लगाकर उत्सव की शुरुआत करेंगे। मंदिर परिसर में फाग गीत गाए जाएंगे और दोपहर बाद मुख्यमंत्री के सानिध्य में भव्य ‘होली मिलन समारोह’ का आयोजन होगा, जहाँ वे जनता से सीधा संवाद करेंगे।
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