South Cinema News: दक्षिण भारतीय सिनेमा से लेकर अब तमिलनाडु की राजनीति तक, जिस एक नाम की गूंज सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है, वह है— विजय। अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के साथ विजय अब असल जिंदगी में भी एक जननायक की भूमिका में नजर आ रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्क्रीन पर ‘थलापति’ के नाम से मशहूर इस अभिनेता का असली नाम क्या है और उन्हें यह खास टाइटल किसने और क्यों दिया?
असली नाम और फिल्मी सफर की शुरुआत
सुपरस्टार विजय का पूरा नाम जोसेफ विजय चंद्रशेखर है। वे एक फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखते हैं; उनके पिता एस.ए. चंद्रशेखर तमिल सिनेमा के जाने-माने निर्देशक और निर्माता रहे हैं। विजय ने अपने करियर की शुरुआत बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट 1984 में की थी, लेकिन मुख्य अभिनेता के रूप में उन्होंने 1992 में फिल्म ‘नालय्या थीरपू’ से डेब्यू किया, जिसे उनके पिता ने ही निर्देशित किया था।
कभी लुक्स के लिए झेला था क्रिटिसिज्म
आज भले ही विजय लाखों दिलों की धड़कन हों, लेकिन करियर की शुरुआत में उन्हें अपने लुक्स के लिए काफी कड़वे कमेंट्स सुनने पड़े थे। उनके दुबलेपन और घुंघराले बालों के कारण लोगों ने उन्हें ‘कुरूप’ तक कहा था। यहां तक कि उनकी पहली फिल्म के बाद उनकी एक्टिंग की भी काफी आलोचना हुई थी। लेकिन विजय ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत से आलोचकों का मुंह बंद कर दिया।
‘युवा सैनिक’ से ‘सेनापति’ तक का सफर
विजय को ‘थलापति’ बनने में दो दशकों से ज्यादा का समय लगा। यह सफर कुछ इस तरह रहा:
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इलैयाथलापति (1994): 1994 में उनकी फिल्म ‘रसगिन’ की सफलता के बाद उनके पिता ने उन्हें ‘इलैयाथलापति’ (Ilaya Thalapathy) का टाइटल दिया। तमिल में इसका मतलब होता है— ‘युवा सैनिक’ (Young Commander)। रजनीकांत की फिल्म ‘थलापति’ की लोकप्रियता को देखते हुए यह नाम विजय को एक अलग पहचान दिलाने के लिए दिया गया था।
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थलापति (2017): करीब 23 साल तक ‘इलैयाथलापति’ रहने के बाद, साल 2017 में फिल्म ‘मर्सल’ के साथ उनका टाइटल बदला। फिल्म के डायरेक्टर एटली ने स्क्रीन पर उनके नाम के आगे से ‘इलैया’ हटाकर सिर्फ ‘थलापति’ लिखा। मर्सल की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद वे जनता के ‘थलापति विजय’ बन गए।
क्या है ‘थलापति’ का हिंदी मतलब?
‘थलापति’ (Thalapathy) एक बेहद सम्मानित शब्द है। इसका हिंदी में अर्थ होता है— ‘सेनापति’। अंग्रेजी में इसे ‘Commander’ या ‘Leader’ कहा जा सकता है। यह शब्द उस नायक के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो सेना का नेतृत्व करता है और अपनी टीम को जीत की ओर ले जाता है। आज तमिलनाडु की राजनीति में कदम रखने के बाद, उनके प्रशंसक उन्हें अपना असली ‘कमांडर’ मान रहे हैं।
करियर का टर्निंग पॉइंट
विजय के करियर में 1996 में आई फिल्म ‘पूवे उनक्कागा’ सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म की सफलता ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वे न केवल सिनेमा के किंग हैं, बल्कि तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर भी प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।
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