
उत्तर प्रदेश कैडर की तेजतर्रार, ईमानदार और जनता के बीच ‘जनसेवक’ के रूप में पहचान बनाने वाली 2013 बैच की आईएएस (IAS) अधिकारी दिव्या मित्तल के भारतीय प्रशासनिक सेवा से त्यागपत्र (इस्तीफा / स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) देने की खबरों के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मची हुई है। मिर्जापुर के लहुरियादह गांव में आजादी के 75 साल बाद पहली बार नल से पानी पहुंचाने जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियों के लिए चर्चित रहीं दिव्या मित्तल की सादगी और कार्यशैली की मिसालें पूरे देश में दी जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिव्या मित्तल से पहले उनके पति गगनदीप सिंह ने भी देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था?
दिव्या मित्तल और उनके पति गगनदीप सिंह का सफर किसी फिल्मी पटकथा या प्रेरणादायक उपन्यास से कम नहीं है। दोनों ने देश के शीर्षतम संस्थानों (IIT और IIM) से उच्च शिक्षा हासिल की, लंदन में करोड़ों के पैकेज वाली अंतरराष्ट्रीय नौकरियां कीं और फिर वतन लौटकर एक साथ देश की सबसे कठिन यूपीएससी (UPSC) परीक्षा पास की। आइए विस्तार से जानते हैं कि आईएएस दिव्या मित्तल के पति गगनदीप सिंह किस सर्विस में तैनात थे, उनका पूरा शैक्षणिक व प्रशासनिक बैकग्राउंड क्या रहा और उन्होंने यह ऐतिहासिक फैसला क्यों लिया था।
किस सर्विस में तैनात थे गगनदीप सिंह? जानिए उनका सिविल सर्विसेज सफर
आईएएस दिव्या मित्तल के पति गगनदीप सिंह भारतीय पुलिस सेवा (IPS – Indian Police Service) के अधिकारी थे। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE) को शानदार रैंक के साथ पास किया था और उन्हें आईपीएस कैडर अलॉट हुआ था।
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आईपीएस के रूप में चयन: गगनदीप सिंह ने सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद पुलिस सेवा में अपनी जिम्मेदारी संभाली थी। खाकी वर्दी पहनकर उन्होंने कानून-व्यवस्था और पुलिस सुधारों की दिशा में काम किया।
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दिव्या मित्तल का यूपीएससी सफर: दिव्या मित्तल ने भी यूपीएससी में दोहरी सफलता हासिल की थी। पहले प्रयास में उनका चयन गुजरात कैडर में आईपीएस (IPS) के लिए हुआ था, जिसके बाद उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और ऑल इंडिया 68वीं रैंक (AIR 68) हासिल कर उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी बनीं।
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पति-पत्नी दोनों रहे सिविल सर्वेंट: एक समय ऐसा था जब गगनदीप सिंह आईपीएस अधिकारी के रूप में और दिव्या मित्तल आईएएस अधिकारी के रूप में देश सेवा कर रहे थे। दोनों की प्रशासनिक जोड़ी को नौकरशाही में अत्यंत सम्मानित और बौद्धिक माना जाता था।
IIT और IIM का सफर: लंदन की करोड़ों की नौकरी छोड़ क्यों लौटे थे भारत?
प्रशासनिक सेवा में आने से पहले ही गगनदीप सिंह और दिव्या मित्तल दोनों का प्रोफाइल असाधारण रूप से मजबूत और वैश्विक स्तर का था।
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शीर्ष इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट संस्थान: दिव्या मित्तल ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) से बी.टेक और इसके बाद आईआईएम बैंगलोर (IIM Bangalore) से एमबीए की डिग्री पूरी की थी। वहीं, उनके पति गगनदीप सिंह ने भी शीर्ष इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद आईआईएम (IIM) से मैनेजमेंट की उच्च शिक्षा प्राप्त की थी।
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लंदन में इनवेस्टमेंट बैंकिंग और मल्टीनेशनल करियर: उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद दोनों का चयन बहुराष्ट्रीय वित्तीय कंपनियों (MNCs / Investment Banking) में हुआ और वे ब्रिटेन (लंदन) चले गए। लंदन में दोनों को लाखों-करोड़ों रुपये के सालाना पैकेज, लग्जरी लाइफस्टाइल और विदेशी जीवन की तमाम सुख-सुविधाएं हासिल थीं।
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मातृभूमि की सेवा का संकल्प: विदेशों में शानदार करियर होने के बावजूद दोनों के मन में अपने देश और समाज के लिए कुछ सार्थक करने का जज्बा था। उन्हें लगा कि कॉर्पोरेट जगत में केवल कंपनियों का मुनाफा बढ़ाने के बजाय भारत के जमीनी स्तर पर जरूरतमंद लोगों के जीवन में बदलाव लाना ज्यादा संतोषजनक होगा। इसी सोच के साथ दोनों ने अपनी सुरक्षित और मोटी कमाई वाली नौकरियां छोड़ दीं और भारत लौटकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की।
गगनदीप सिंह ने आईपीएस पद से इस्तीफा क्यों दिया था?
अक्सर जब कोई उम्मीदवार देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा आईपीएस में चयनित हो जाता है, तो वह पूरी जिंदगी इस पद की गरिमा और प्रभाव के साथ काम करता है। लेकिन गगनदीप सिंह ने कुछ वर्षों की सेवा के बाद अपने पद से इस्तीफा देकर सबको हैरत में डाल दिया था।
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सामाजिक क्षेत्र और उद्यमिता का विजन: सूत्रों और पारिवारिक करीबियों के अनुसार, गगनदीप सिंह का रुझान प्रशासनिक व्यवस्था की औपचारिक सीमाओं से बाहर निकलकर उद्यमिता (Entrepreneurship), सामाजिक बदलाव और नए क्षेत्रों में काम करने की ओर था।
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पारिवारिक संतुलन और निजी लक्ष्य: दोनों पति-पत्नी के 24×7 फील्ड पोस्टिंग वाली प्रशासनिक नौकरियों में होने के कारण पारिवारिक प्राथमिकताओं और सामाजिक प्रोजेक्ट्स को संतुलित करने के लिए उन्होंने सिविल सर्विसेज से अलग होकर स्वतंत्र रूप से काम करने का निर्णय लिया।
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इस्तीफे के बाद की राह: पुलिस सेवा से त्यागपत्र देने के बाद गगनदीप सिंह ने सामाजिक विकास, तकनीक और व्यावसायिक नवाचारों से जुड़े प्रोजेक्ट्स में अपनी सक्रियता बढ़ाई और अपनी विशेषज्ञता का उपयोग समाज के व्यापक विकास के लिए करना जारी रखा।
मिर्जापुर में पानी लाने से लेकर संतकबीर नगर तक: कैसा रहा IAS दिव्या मित्तल का प्रशासनिक सफर?
दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा की उन चुनिंदा महिला अधिकारियों में गिनी जाती हैं जिन्होंने जहां भी पोस्टिंग पाई, वहां अपनी अमिट छाप छोड़ी।
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मिर्जापुर का ऐतिहासिक लहुरियादह प्रोजेक्ट: मिर्जापुर की जिलाधिकारी (DM) रहते हुए दिव्या मित्तल ने विंध्य पर्वत श्रृंखला के अंतिम छोर पर बसे लहुरियादह गांव में पाइपलाइन बिछवाकर नल से जल पहुंचाया। यह वह गांव था जहां आजादी के बाद से लोग टैंकरों और गड्ढों के गंदे पानी पर निर्भर थे। जब पहली बार गांव में पानी की धार फूटी, तो ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़े बजाकर उनका स्वागत किया था।
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संतकबीर नगर, बरेली और बस्ती में छाप: संतकबीर नगर और बस्ती में डीएम रहते हुए उन्होंने शिक्षा सुधार, सरकारी स्कूलों के कायाकल्प, भू-माफिया पर सख्त कार्रवाई और जनता दर्शन में आम लोगों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए नए मानक स्थापित किए।
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सादगी और संवेदनशीलता: दिव्या मित्तल अक्सर बिना किसी तामझाम के औचक निरीक्षण करने और जमीन पर बैठकर बुजुर्गों व महिलाओं की समस्याएं सुनने के लिए जानी जाती रहीं। यूपी जल निगम के प्रबंध निदेशक (MD) पद पर रहते हुए भी उन्होंने जल जीवन मिशन के कार्यों को पारदर्शी बनाने में अहम योगदान दिया।
आईएएस दिव्या मित्तल और पूर्व आईपीएस गगनदीप सिंह की कहानी यह स्पष्ट करती है कि यह दंपति कभी भी केवल सरकारी पद, लाल बत्ती या सत्ता के मोह में नहीं रहा। आईआईटी और आईआईएम से लेकर लंदन की नौकरी और फिर यूपीएससी क्रैक करने के बाद अपनी शर्तों और जनसेवा के सिद्धांतों पर जीवन जीना ही उनकी असली पहचान रही है।
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