तेहरान/इस्लामाबाद। पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आ रही है। ईरान ने करीब दो महीने के लंबे अंतराल के बाद अपना एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) पूरी तरह से खोल दिया है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के साथ शुरू हुए सैन्य टकराव के बाद यह पहली बार है जब तेहरान के इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कमर्शियल फ्लाइट्स ने उड़ान भरी है। इस कदम को अमेरिका के साथ होने वाली आगामी शांति वार्ता के सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
तेहरान से मदीना और इस्तांबुल तक: फिर गूंजी विमानों की गड़गड़ाहट
ईरान के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, शनिवार सुबह तेहरान हवाई अड्डे से इस्तांबुल (तुर्की), मस्कट (ओमान) और मदीना (सऊदी अरब) के लिए वाणिज्यिक उड़ानें रवाना हुईं। विमानों की आवाजाही पर नजर रखने वाली वेबसाइट ‘फ्लाइटराडार24’ ने भी पुष्टि की है कि शनिवार सुबह इस्तांबुल के लिए कम से कम तीन विमानों ने सुरक्षित उड़ान भरी। गौरतलब है कि 28 फरवरी को हुए हमलों के बाद से ईरान ने सुरक्षा कारणों से अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक विमानन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई थीं।
इस्लामाबाद में वार्ता की मेज सजी, लेकिन सस्पेंस अब भी बरकरार
एयरस्पेस खोलने का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता प्रस्तावित है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची अपनी टीम के साथ इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं, लेकिन अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के आगमन को लेकर अब भी संशय बना हुआ है। पूरे इस्लामाबाद को ‘लॉकडाउन’ कर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। अमेरिका ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि ईरान को उसकी शर्तों के आधार पर ही प्रस्ताव तैयार करना होगा, तभी बातचीत आगे बढ़ेगी।
भारतीय नागरिकों के लिए सख्त चेतावनी: “अभी ईरान न जाएं”
भले ही ईरान ने अपनी उड़ानें शुरू कर दी हैं, लेकिन भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए नई एडवायजरी जारी की है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने स्पष्ट रूप से कहा है कि भारतीय नागरिक हवाई या सड़क मार्ग से ईरान की यात्रा करने से बचें। दूतावास के अनुसार, क्षेत्रीय तनाव के कारण परिचालन संबंधी अनिश्चितताएं अभी भी बनी हुई हैं और किसी भी समय हवाई प्रतिबंध दोबारा लगाए जा सकते हैं।
संघर्ष विराम के बीच शांति की तलाश
बता दें कि पाकिस्तान की मध्यस्थता से 8 अप्रैल को शुरू हुआ अस्थायी संघर्ष विराम 22 अप्रैल को समाप्त हो चुका है। हालांकि, दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति को टालने के लिए पर्दे के पीछे से कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। ईरान के भीतर भी सत्ता संघर्ष की खबरें आ रही हैं, जहां कट्टरपंथी गुट और उदारवादी गुटों के बीच भावी रणनीति को लेकर मतभेद गहरा रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस्लामाबाद की बैठक से पश्चिम एशिया में शांति का कोई ठोस रास्ता निकलता है या नहीं।
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