
पाकिस्तान की राजनीति और रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय (GHQ) में उस समय बड़ा हड़कंप मच गया जब जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मौत की सनसनीखेज खबरें पूरी दुनिया में फैल गईं। महीनों से अदियाला जेल में बंद 73 वर्षीय इमरान खान के स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। इसी बीच अमेरिका में रह रहे पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार और एमी पुरस्कार के लिए नामांकित वजाहत सईद खान ने एक वीडियो जारी कर दावा कर दिया कि जीएचक्यू (GHQ) के तीन वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को आशंका है कि इमरान खान अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं। इस एक दावे ने न केवल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के लाखों समर्थकों में आक्रोश भर दिया, बल्कि पाकिस्तानी शासन व्यवस्था की चूले हिला दीं। हालांकि, इस दावे के महज 24 घंटे के भीतर पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) को अपनी महीनों पुरानी चुप्पी तोड़नी पड़ी और यह बयान जारी करना पड़ा कि इमरान खान पूरी तरह सुरक्षित और जिंदा हैं तथा अदियाला जेल में बंद हैं। इसके तुरंत बाद पत्रकार वजाहत सईद खान ने भी नया वीडियो जारी कर अपने पिछले बयान पर सफाई दी और खुलासा किया कि उन्होंने ऐसा दावा आखिर क्यों किया था।
रावलपिंडी जीएचक्यू (GHQ) के सैन्य अफसरों के हवाले से फैला था खौफ
वजाहत सईद खान ने अपने शुरुआती खुलासे में बताया था कि उन्होंने इस संवेदनशील जानकारी की पुष्टि के लिए रावलपिंडी के जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में तैनात कम से कम तीन वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से संपर्क किया था। उन्होंने कहा था कि सेना के ये वरिष्ठ अधिकारी खुद इस बात को लेकर गहरे खौफ और संशय में थे कि शायद जेल के भीतर इमरान खान के साथ कुछ अनहोनी हो चुकी है। पत्रकार का कहना था कि पाकिस्तान की शक्तिशाली सैन्य स्थापना (Establishment) जिस तरह इमरान खान की स्थिति पर पूरी तरह रहस्य बनाए हुए थी, उसने खुद सेना के भीतर के अफसरों को डरा दिया था। जीएचक्यू के भीतर संचार और सूचना निगरानी (C4I) निदेशालय से जुड़े अधिकारियों ने अपनी अनौपचारिक बातचीत में इस बात का डर जताया था कि बाहरी दुनिया से लंबे समय तक अलग-थलग रखे जाने के कारण सबसे बुरा घटित हो चुका हो सकता है। जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आई, पूरे पाकिस्तान में गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका बढ़ गई।
‘सेना को सच बोलने पर मजबूर किया’: वजाहत सईद खान का सफाई वीडियो
पाकिस्तान सेना के आधिकारिक खंडन और ISPR के जवाब के बाद पत्रकार वजाहत सईद खान ने एक नया वीडियो जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनके पिछले दावे का मकसद कोई गलत अफवाह फैलाना नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना की ‘खौफनाक और बहरे कर देने वाली चुप्पी’ को तोड़ना था। वजाहत ने कहा, “मुझे खुशी है कि मेरे इस बयान के बाद कम से कम पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR को सामने आकर बयान देना पड़ा। भले ही उन्होंने मेरी रिपोर्टिंग को झूठा करार दिया हो, लेकिन इस बयान से कम से कम यह आधिकारिक रूप से पक्का हो गया कि इमरान खान जिंदा हैं।” पत्रकार ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले भी इमरान खान की मौत की पुष्टि नहीं की थी, बल्कि केवल सेना के भीतर मौजूद आला अफसरों की गहरी आशंकाओं और डर को उजागर किया था। उन्होंने कहा कि रावलपिंडी का जीएचक्यू जिस तरह से अपने ही जनरलों और निचले अधिकारियों को अंधेरे में रख रहा है, उससे इस तरह के डर का पनपना स्वाभाविक था।
अदियाला जेल में अलग-थलग इमरान खान: परिवार को मिलने से रोकने पर बढ़ा संदेह
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की हाई-सिक्योरिटी अदियाला जेल में बंद हैं। उन पर तोशाखाना मामले, अल-कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले और 9 मई 2023 को हुई सैन्य प्रतिष्ठानों पर हिंसा से जुड़े दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। हाल के हफ्तों में स्थिति तब और अधिक बिगड़ गई जब पाकिस्तान सरकार और जेल प्रशासन ने इमरान खान के परिवारजनों, उनकी बहनों, कानूनी सलाहकारों और निजी डॉक्टरों को उनसे मिलने से पूरी तरह रोक दिया। पीटीआई नेताओं ने आरोप लगाया कि इमरान खान को जेल में एकांत कारावास (Isolation) में रखकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और बाहरी दुनिया से उनका संपर्क काटने के लिए बिजली और टीवी तक की सुविधाएं बंद कर दी गई हैं। जब परिवार को हफ्तों तक मिलने की अनुमति नहीं दी गई, तो यह संदेह और गहरा गया कि जेल प्रशासन या सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर का तंत्र कुछ बहुत बड़ा छिपाने की कोशिश कर रहा है।
20 लाख समर्थकों का इस्लामाबाद मार्च और अमेरिका से बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव
इमरान खान की मौत की अफवाहों और जेल में उनकी स्थिति को लेकर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने आक्रामक रुख अपना लिया है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री और पीटीआई नेता सोहेल अफरीदी ने साफ चेतावनी दी है कि पाकिस्तान का युवा वर्ग इस समय व्यवस्था से बेहद नाराज है और 20 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पीटीआई ने 27 सितंबर को राजधानी इस्लामाबाद की ओर एक विशाल ‘लॉग मार्च’ निकालने का ऐलान किया है। सोहेल अफरीदी ने कहा कि अगर शहबाज शरीफ सरकार और सेना ने इमरान खान से उनके परिवार व डॉक्टरों की मुलाकात की अनुमति नहीं दी, तो यह जनसैलाब इस्लामाबाद पर धावा बोल देगा जिसे रोक पाना किसी भी बल के बस की बात नहीं होगी। केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस्लामाबाद सरकार पर भारी दबाव बन रहा है। अमेरिकी कांग्रेस के 13 सांसदों के एक द्विदलीय समूह ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर पाकिस्तान सरकार के समक्ष इमरान खान की हिरासत और मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाने की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेष मानवाधिकार जांचकर्ताओं ने भी खान की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
सेना प्रमुख असीम मुनीर और इमरान खान के बीच पुरानी दुश्मनी का नया अध्याय
इमरान खान और पाकिस्तानी सेना के मौजूदा सेना प्रमुख असीम मुनीर के बीच की दुश्मनी कोई नई नहीं है। जब इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने असीम मुनीर को आईएसआई (ISI) प्रमुख के पद से हटा दिया था। इसके बाद से ही दोनों के बीच का टकराव सर्वविदित रहा है। अप्रैल 2022 में संसद में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से हटाए जाने के बाद इमरान खान ने सीधे तौर पर असीम मुनीर और सैन्य प्रतिष्ठान पर अपनी सरकार गिराने का आरोप लगाया था। आज पाकिस्तान में लोकतंत्र बनाम सैन्य वर्चस्व की जो लड़ाई चल रही है, उसकी धुरी में यही दो चेहरे खड़े हैं। पत्रकार वजाहत सईद खान के इस सनसनीखेज दावे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पाकिस्तान में सेना चाहे जितना भी सेंसरशिप लागू कर ले, लेकिन इमरान खान के नाम का खौफ और उनके प्रति जनसमर्थन ऐसा है कि एक अफवाह मात्र से पूरे देश का ढांचा हिल जाता है। फिलहाल, सेना द्वारा इमरान खान के जिंदा होने की पुष्टि के बाद कुछ समय के लिए राहत जरूर मिली है, लेकिन जब तक उन्हें सार्वजनिक रूप से सामने नहीं लाया जाता या परिवार से मिलने नहीं दिया जाता, तब तक पाकिस्तान की सियासत में यह उबाल शांत होने वाला नहीं है।
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