अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा काढ़े गए दान और चढ़ावे की गिनती के दौरान हुए कथित गबन और चोरी के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आ गई है। इस जांच रिपोर्ट ने न सिर्फ मंदिर परिसर में सुरक्षा की पोल खोल दी है, बल्कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में जो तरीके और खुलासे सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं।
45 दिनों में चोरी के 70 मामले: जूतों और कपड़ों में छिपती थी रकम
SIT द्वारा 23 जून 2026 को सौंपी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर के ‘गणना कक्ष’ (कैश काउंटिंग रूम) के अंदर लगे सीसीटीवी (CCTV) फुटेज में हैरान करने वाले दृश्य दिखे हैं। रूम में तैनात कर्मचारी नोटों की गड्डियों को अपने कपड़ों, जेबों और यहाँ तक कि जूतों के अंदर छिपाकर बाहर ले जाते हुए साफ दिखाई दिए हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि केवल 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच के 45 दिनों के फुटेज में ही चोरी के करीब 70 उदाहरण कैमरे में कैद मिले हैं, जिससे साफ है कि यह गड़बड़ी कितने बड़े पैमाने पर और रोजाना की आदत बन चुकी थी।
नष्ट हो गया पुराना डेटा: सीसीटीवी बैकअप पर बड़ी लापरवाही
जांच टीम को एक और बड़ी तकनीकी खामी और लापरवाही का सामना करना पड़ा। आंतरिक ऑडिट रिपोर्टों में यह स्पष्ट सिफारिश की गई थी कि गणना कक्ष की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को कम से कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखा जाना चाहिए। इसके बावजूद, मंदिर प्रशासन द्वारा इसे केवल 45 दिनों तक ही सुरक्षित रखा जाता था। इस वजह से 27 अप्रैल 2026 से पहले की संभावित चोरी की घटनाओं और सीसीटीवी फुटेज की जांच संभव ही नहीं हो सकी। उपलब्ध सबूतों, बैंक खातों और बयानों से पता चलता है कि यह कोई एक-दो बार का काम नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी और लगातार दोहराई जाने वाली प्रवृत्ति थी।
₹20000 सैलरी वाले कर्मचारियों के खातों में मिले लाखों रुपये और एफडी
SIT ने जब पैसों की हेराफेरी के सुराग ढूंढे, तो कर्मचारियों के बैंक खातों ने सारा सच उगल दिया। गणना कक्ष में नोट गिनने वाले कर्मचारियों का मासिक वेतन मात्र 20 हजार रुपये के आसपास था। लेकिन जांच में इन कर्मचारियों और उनके करीबी रिश्तेदारों के बैंक खातों में उनकी कानूनी आय से कहीं अधिक नकद जमा और कई फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पाए गए। चोरी की इस काली कमाई को छुपाने के लिए रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, एसआईटी के गठन से पहले ही करीब 78.94 lakh रुपये कैश, विदेशी मुद्रा और कीमती आभूषण बरामद किए जा चुके थे। वहीं, 4 जून को इसी गणना कक्ष से बिल्कुल सटे बाथरूम से भी 2.25 lakh रुपये नकद बरामद हुए थे।
सिस्टम की ये 6 बड़ी कमियां, जिन्होंने चोरी को बनाया बेहद आसान
विशेष जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर उन बुनियादी सुरक्षा कमियों को गिनाया है, जिनके चलते चोरों के हौसले बुलंद हुए और उन्होंने इतनी बड़ी हेराफेरी को आसानी से अंजाम दे दिया:
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तलाशी का अभाव: ड्यूटी पर आने और जाने वाले कर्मचारियों की कोई नियमित शारीरिक तलाशी नहीं ली जाती थी।
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जेब वाली यूनीफॉर्म: सुरक्षा के लिहाज से कर्मचारियों के लिए बिना जेब (Pocketless) वाली ड्रेस अनिवार्य नहीं की गई थी।
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निजी सामान की छूट: कर्मचारियों को गणना कक्ष के भीतर मोबाइल फोन और अपने अन्य निजी सामान ले जाने की पूरी अनुमति थी।
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मिश्रित काउंटिंग: मंदिर की अलग-अलग हुंडियों (दानपात्रों) से निकले पैसे को अलग रखने के बजाय एक साथ मिलाकर गिना जाता था।
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अटेंडेंस सिस्टम: परिसर में कर्मचारियों की एंट्री और एग्जिट के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति की कोई व्यवस्था मौजूद नहीं थी।
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बैंक एसओपी का उल्लंघन: संबंधित बैंक द्वारा भी कर्मचारियों के मासिक रोटेशन (बदलाव) जैसी महत्वपूर्ण मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) की जिम्मेदारी पूरी नहीं की गई।
2025 में नियमों में बदलाव: जानबूझकर की गई लापरवाही?
रिपोर्ट में सबसे गंभीर और तीखी टिप्पणी 6 फरवरी 2025 को बदली गई एसओपी (SOP) को लेकर की गई है। एसआईटी के अनुसार, पहले के नियमों में सभी कर्मचारियों की अनिवार्य तलाशी का सख्त प्रावधान था, लेकिन साल 2025 में इसे रहस्यमयी तरीके से बदलकर सिर्फ ‘नियमित या रैंडम जांच’ में तब्दील कर दिया गया। रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया है कि यह सुरक्षा नियमों में ढील देने वाला बदलाव किन परिस्थितियों में और किसके इशारे पर किया गया, इसकी विस्तृत जांच होना बेहद जरूरी है। वित्तीय वर्ष 2022-23 से लेकर 2025-26 तक की सभी इंटरनल ऑडिट रिपोर्टें लगातार इन सुरक्षा कमियों की ओर ध्यान दिलाती रही थीं, लेकिन इसके बावजूद समय रहते कोई सुधार नहीं किए गए। एसआईटी के निष्कर्ष के मुताबिक, यह कोई तकनीकी चूक नहीं बल्कि ‘जानबूझकर की गई लापरवाही’ का मामला है।
मंदिर के पास कितना है फंड? जानें कुल आय-खर्च का लेखा-जोखा
वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो 31 मार्च 2026 तक राम मंदिर ट्रस्ट के पास कुल 1,876.30 करोड़ रुपये का विशाल फंड मौजूद है, जिसका एक बड़ा हिस्सा अलग-अलग बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।
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वित्त वर्ष 2025-26 की कुल आय: ट्रस्ट को कुल 250.04 करोड़ रुपये की आय हुई। इसमें से 98.24 करोड़ रुपये श्रद्धालुओं के चढ़ावे से मिले और 151.80 करोड़ रुपये बैंक ब्याज से प्राप्त हुए।
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वित्त वर्ष 2025-26 का कुल खर्च: इसी अवधि में ट्रस्ट का कुल खर्च 514.50 करोड़ रुपये रहा, जो कि सालभर की कुल आय से दोगुने से भी अधिक है। आय और खर्च के इस बड़े अंतर को ट्रस्ट के पास पहले से मौजूद सरप्लस फंड से पूरा किया गया।
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जमीन की खरीद: इसी वित्तीय वर्ष के दौरान ट्रस्ट ने 20.16 करोड़ रुपये की लागत से करीब 2.57 एकड़ जमीन भी खरीदी है।
सोना-चांदी की ईंटों के चोरी के आरोपों पर मिली बड़ी राहत
चोरी के इस बड़े विवाद के बीच, हाल के दिनों में सोशल मीडिया और खबरों में चांदी की ईंटों और विशेष भेंटों के गायब होने से जुड़े तीन अलग-अलग गंभीर आरोप भी लगाए गए थे। हालांकि, एसआईटी की इस प्रारंभिक रिपोर्ट ने इन आरोपों को लेकर ट्रस्ट को बड़ी राहत दी है। रिकॉर्ड्स और स्टॉक की गहन जांच के बाद रिपोर्ट में कहा गया है कि चांदी की चोरी के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। वह संबंधित चांदी पूरी तरह से ट्रस्ट की सुरक्षित कस्टडी (अभिरक्षा) में ही थी और तय नियमों के तहत उसे मिंट (टकसाल) में गलाकर पूरी सुरक्षा के साथ रखा गया है। वर्तमान रिकॉर्ड के अनुसार, ट्रस्ट के पास अब तक 32.26 किलोग्राम सोना, 1,518.9 किलोग्राम चांदी और कुल 2,926 बहुमूल्य उपहार दर्ज हैं।
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