नई दिल्ली में सोमवार, 8 जून 2026 को विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल बैठक आयोजित की गई। करीब दो साल बाद दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई इस बड़ी बैठक में विपक्षी दलों के कई दिग्गज नेता शामिल हुए। इस बैठक के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने बेबाक और सस्पेंस भरे अंदाज से पूरी महफिल का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
अनौपचारिक बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं को सीधे तौर पर टोकते हुए कुछ ऐसा कह दिया, जिससे कांग्रेस खेमे में खलबली मच गई है और कई नेता अब तक कयास लगाने में जुटे हैं।
अखिलेश यादव ने नाम लिए बिना डाला सस्पेंस
पार्टी सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, अखिलेश यादव ने बैठक के दौरान कांग्रेस के बड़े नेताओं से आमने-सामने कहा:
अखिलेश यादव का बयान: “मुझे अच्छी तरह से पता है कि आपकी पार्टी (कांग्रेस) के कौन-कौन से लोग पीठ पीछे मेरे और मेरी पार्टी (सपा) के खिलाफ लगातार बयानबाजी कर रहे हैं।”
दिलचस्प बात यह रही कि अखिलेश यादव ने अपनी इस बात के दौरान कांग्रेस के किसी भी नेता या गुट का स्पष्ट रूप से नाम नहीं लिया। उनके इस अचानक और सस्पेंस से भरे अंदाज ने बैठक में मौजूद कांग्रेसी दिग्गजों को गहरी सोच और उलझन में डाल दिया है कि आखिर अखिलेश का इशारा उत्तर प्रदेश के किस नेता की तरफ था।
आखिर क्यों भड़के अखिलेश? जानिए इसके पीछे की वजह
एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, अखिलेश यादव का यह गुस्सा और तंज बेवजह नहीं है। उत्तर प्रदेश की सियासत में यह बात किसी से छिपी नहीं है कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) के कई राज्य स्तरीय और क्षेत्रीय नेता समाजवादी पार्टी के साथ इस गठबंधन को लेकर पूरी तरह सहज महसूस नहीं कर रहे हैं।
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सपा के प्रभुत्व पर सवाल: यूपी कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता अक्सर बंद कमरों की बैठकों और निजी बातचीत में अखिलेश यादव की कार्यशैली और राज्य में सपा के बढ़ते प्रभुत्व पर सवाल उठाते रहते हैं।
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जनाधार खोने का डर: इन कांग्रेसी नेताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश में लगातार सपा के छोटे भाई की भूमिका में रहने और गठबंधन में चुनाव लड़ने से कांग्रेस का अपना पारंपरिक जनाधार, वोट बैंक और सांगठनिक ढांचा पूरी तरह खत्म होता जा रहा है। यही वजह है कि वे आलाकमान से अकेले चुनाव लड़ने की वकालत करते हैं, और यही बातें छनकर सपा प्रमुख तक पहुंच रही थीं।
तेजस्वी यादव और वामपंथी नेताओं ने भी जताई नाराजगी
सोमवार को हुई इस बैठक में सिर्फ अखिलेश यादव ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव और कई वामपंथी (Left) नेताओं ने भी राज्यों में कांग्रेस के रवैये पर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
सहयोगी दलों ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को याद दिलाया कि राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उसे गठबंधन को जोड़ने वाली ‘गोंद’ (Glue) की तरह काम करना चाहिए, न कि राज्यों में अपने ही क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ प्रतिस्पर्धा (कंपटीशन) शुरू कर देनी चाहिए। हालांकि, बैठक के अंत में राहुल गांधी ने बेहद सौहार्दपूर्ण रुख अपनाते हुए सहयोगियों की सभी शिकायतों को स्वीकार किया और भविष्य में गठबंधन को पूरी तरह एकजुट रखने का मजबूत भरोसा दिया।
‘INDIA’ गठबंधन की बैठक में जब उछला ‘पोहा और भेलपुरी’ का किस्सा
बैठक के गंभीर राजनीतिक माहौल के बीच एक बेहद हल्का-फुल्का और मजेदार वाकया भी सामने आया:
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वर्चुअल शामिल हुए उद्धव और राउत: महाराष्ट्र में एक पारिवारिक कार्यक्रम में व्यस्त होने के कारण शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और सांसद संजय राउत इस बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल) के जरिए शामिल हुए थे।
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भेलपुरी या पोहा?: चर्चा के दौरान कैमरे पर संजय राउत कुछ खाते हुए दिखाई दिए। इसे देखकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक नेता ने मजाक करते हुए कहा कि शिवसेना नेता अकेले-अकेले ही मुंबई की मशहूर ‘भेल-पुरी’ का मजा ले रहे हैं, हमें पूछ भी नहीं रहे।
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राउत का मैसेज: बैठक के दौरान तो संजय राउत ने इस पर ज्यादा कुछ नहीं कहा, लेकिन मीटिंग खत्म होने के बाद उन्होंने मुस्कुराते हुए टीएमसी नेता को बकायदा फोन पर मैसेज करके सफाई दी कि वे भेल-पुरी नहीं, बल्कि महाराष्ट्र का एक और बेहद लोकप्रिय स्नैक ‘पोहा’ खा रहे थे।
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