नई दिल्ली। ईरान पर इजरायल और अमेरिकी हमलों के बाद दहकते मध्य-पूर्व के बीच फंसे सैकड़ों भारतीय छात्रों के लिए राहत की बड़ी खबर आई है। युद्ध के 13वें दिन भारत सरकार और यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मिलकर छात्रों की सुरक्षित निकासी (Evacuation) का इंतजाम पूरा कर लिया है। कल यानी गुरुवार को भारतीय छात्रों का पहला जत्था ईरान की सरजमीं छोड़ देगा। सुरक्षित वापसी के लिए दो देशों—आर्मेनिया और अजरबैजान—के रास्तों को ‘लाइफलाइन’ के तौर पर चुना गया है।
सुरक्षित निकासी के लिए दो ‘एग्जिट रूट’ का विकल्प
ईरान की प्रमुख यूनिवर्सिटीज (TUMS, IUMS और SBUMS) में पढ़ने वाले छात्रों, जिनमें अधिकांश जम्मू-कश्मीर के मेडिकल स्टूडेंट हैं, को निकलने के लिए दो रास्तों का विकल्प दिया गया है।
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आर्मेनिया रूट: छात्र बस या सड़क मार्ग से आर्मेनिया बॉर्डर तक पहुंचेंगे, जहां से उन्हें आगे भारत भेजा जाएगा।
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अजरबैजान रूट: शिराज यूनिवर्सिटी के 86 मेडिकल छात्रों के लिए शिराज-क़ोम-बाकू का विशेष मार्ग सुझाया गया है। बाकू (अजरबैजान) पहुंचकर छात्र अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ले सकेंगे।
हवाई मार्ग का इंतजार: 15 मार्च की फ्लाइट्स पर टिकी निगाहें
जमीनी रास्तों के खतरे को देखते हुए कई छात्रों ने हवाई मार्ग को प्राथमिकता दी है। बड़ी संख्या में छात्रों ने 15 और 16 मार्च के लिए ‘फ्लाईदुबई’ (flydubai) की टिकटें बुक कराई हैं। हालांकि, क्षेत्र में उड़ानों पर मंडराते खतरे के बीच यह छात्र और उनके परिवार लगातार प्रार्थना कर रहे हैं कि हवाई अड्डे सुरक्षित रहें।
‘ईरान का कोई कोना सेफ नहीं’: छात्रों में दहशत का माहौल
ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) जम्मू-कश्मीर के अध्यक्ष मोहम्मद मोमिन खान ने बताया कि केरमान, इस्फ़हान और गोलेस्तान यूनिवर्सिटी के छात्र गहरे तनाव में हैं। छात्रों का कहना है कि धमाकों की गूंज के बीच उन्हें ईरान का कोई भी हिस्सा अब सुरक्षित नहीं लग रहा है। छात्र संगठन लगातार भारत सरकार और राजनीतिक प्रतिनिधियों के संपर्क में हैं। खान ने सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी का भी आभार जताया, जो छात्रों की सुरक्षित वापसी के लिए लगातार दिल्ली में पैरवी कर रहे हैं।
परिजनों की थमी सांसें, वतन वापसी की घड़ी आई पास
जैसे-जैसे निकासी की घड़ी नजदीक आ रही है, भारत में मौजूद परिजनों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। छात्र संगठनों और स्थानीय अधिकारियों के बीच तालमेल बिठाया गया है ताकि छात्रों को सीमा तक पहुंचने में कोई आंच न आए। अधिकारियों का कहना है कि पहले जत्थे की सफलता के बाद आने वाले दिनों में और अधिक बैचों को सुरक्षित निकाला जाएगा।
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