समुद्री लुटेरों और हमलों पर भारत का सख्त रुख: अंतरराष्ट्रीय मंच पर दी चेतावनी, कहा- जहाजों पर निशाना अब बर्दाश्त से बाहर…

लंदन/नई दिल्ली: वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों पर जहाजों और नावों को निशाना बनाए जाने की बढ़ती घटनाओं पर भारत ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के मुद्दे पर भारत ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए दुनिया को साफ संदेश दिया है कि भारतीय हितों और समुद्री सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। लंदन में आयोजित इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) की महत्वपूर्ण बैठक में भारत ने अपनी चिंताएं पुरजोर तरीके से साझा कीं।

ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त ने जताई गहरी चिंता

यूके में भारत के उच्चायुक्त ने इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गनाइजेशन की बैठक के दौरान वैश्विक समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि हाल के दिनों में समुद्र में जहाजों पर हमलों की घटनाओं में इजाफा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इन हरकतों को मूकदर्शक बनकर नहीं देख सकता। उच्चायुक्त ने जोर देकर कहा कि इस तरह के हमले न केवल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बाधित करते हैं, बल्कि नाविकों के जीवन को भी गंभीर खतरे में डालते हैं। भारत ने दोटूक कहा कि समुद्री डकैती और ड्रोन हमलों जैसी घटनाओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

वैश्विक व्यापार और सुरक्षा पर मंडराता खतरा

समुद्री मार्गों पर होने वाले ये हमले केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं हैं। भारत ने बैठक में तर्क दिया कि अगर जहाजों को निशाना बनाया जाना जारी रहा, तो इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में असुरक्षा की भावना पैदा होगी। हिंद महासागर और उससे जुड़े महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों की सुरक्षा भारत की प्राथमिकता में शामिल है। भारतीय उच्चायुक्त ने मांग की कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जो समुद्री सीमाओं का उल्लंघन कर रहे हैं और जहाजों को निशाना बना रहे हैं।

भारत की समुद्री ताकत और भविष्य की रणनीति

बैठक में भारत की ओर से दिए गए इस कड़े बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी अहमियत दी जा रही है। गौरतलब है कि भारतीय नौसेना पहले ही समुद्र में अपनी सक्रियता बढ़ा चुकी है और संकट में फंसे जहाजों को बचाने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। भारत ने आईएमओ के मंच से यह साफ कर दिया है कि वह अपनी समुद्री सीमाओं और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार है। इस कड़े रुख के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि वैश्विक एजेंसियां समुद्री सुरक्षा प्रोटोकॉल को और अधिक सख्त करेंगी।

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